मंडल कारा में बंदियों को मिली कानूनी जानकारी

प्ली बार्गेनिंग व कंपाउंडिंग ऑफेंस पर हुआ जागरूकता कार्यक्रम

By RAJEEV KUMAR JHA | January 10, 2026 7:02 PM

– प्ली बार्गेनिंग व कंपाउंडिंग ऑफेंस पर हुआ जागरूकता कार्यक्रम सुपौल. जिला विधिक सेवा प्राधिकार के सचिव के निर्देशानुसार शनिवार को मंडल कारा में एक विशेष जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया गया. कार्यक्रम का उद्देश्य बंदियों को प्ली बार्गेनिंग एवं कंपाउंडिंग ऑफेंस (अपराधों का समझौता) से संबंधित कानूनी प्रावधानों की जानकारी देना था. कार्यक्रम के दौरान उप अधीक्षक मंडल कारा शंभू कुमार दास ने उपस्थित बंदियों को संबोधित करते हुए बताया कि प्ली बार्गेनिंग और कंपाउंडिंग ऑफेंस आपराधिक मामलों के त्वरित निपटारे के महत्वपूर्ण तरीके हैं. उन्होंने बताया कि प्ली बार्गेनिंग भारत में बीएनएसएस 2023 के तहत एक नया प्रावधान है, जिसमें आरोपी कम गंभीर अपराध स्वीकार कर कम सजा पाने का अनुरोध कर सकता है. यह सुविधा पहली बार अपराध करने वाले आरोपियों के लिए है, जिनके अपराध में अधिकतम सात साल की सजा का प्रावधान हो और जो राष्ट्रीय अर्थव्यवस्था या महिलाओं व बच्चों के विरुद्ध गंभीर अपराध से संबंधित न हों. शंभू कुमार दास ने बताया कि प्ली बार्गेनिंग की प्रक्रिया में आरोपी को आरोप तय होने के 30 दिनों के भीतर आवेदन देना होता है, जिसमें अभियोजक, जांच अधिकारी और पीड़ित पक्ष की भागीदारी होती है. इस प्रक्रिया के बाद न्यायालय न्यूनतम सजा की आधी या उससे कम सजा सुना सकता है और इस फैसले के खिलाफ अपील का कोई प्रावधान नहीं होता. वहीं सहायक मंडल कारा राकेश गियर ने कंपाउंडिंग ऑफेंस के बारे में जानकारी देते हुए बताया कि इसमें पीड़ित की सहमति से मामले का समझौता किया जाता है, जिससे आरोपित को बरी किए जाने की संभावना रहती है. यह व्यवस्था केवल कुछ चुनिंदा, कम गंभीर अपराधों के लिए लागू होती है, जिनकी सूची कानून में पहले से तय है. उन्होंने कहा कि कंपाउंडिंग का उद्देश्य सजा कम करना नहीं, बल्कि आपसी सहमति से मामला समाप्त करना होता है. इसमें दोष स्वीकार करना जरूरी नहीं होता, बल्कि पीड़ित द्वारा क्षमा किया जाना मुख्य आधार होता है. कार्यक्रम में पैनल अधिवक्ता विमलेश कुमार एवं मो अज्जम ने भी बंदियों को कानूनी प्रक्रिया से जुड़ी जानकारी दी और उनके सवालों का समाधान किया. जागरूकता कार्यक्रम के माध्यम से बंदियों को यह संदेश दिया गया कि कानूनी प्रावधानों की सही जानकारी से वे अपने मामलों का त्वरित, न्यायसंगत और वैधानिक समाधान प्राप्त कर सकते हैं.

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