आगामी 12 सितंबर 2026 को आयोजित होने वाली राष्ट्रीय लोक अदालत में अधिक से अधिक मामलों का त्वरित एवं सौहार्दपूर्ण समाधान सुनिश्चित करने को लेकर जिला विधिक सेवा प्राधिकार, सुपौल सक्रिय हो गया है. प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश सह अध्यक्ष, जिला विधिक सेवा प्राधिकार राजेश कुमार बच्चन के निर्देश पर विभिन्न स्तरों पर बैठकें आयोजित कर लंबित मामलों को चिह्नित किया जा रहा है.
एमएसीटी मामलों के शीघ्र निष्पादन पर हुई चर्चा
इसी क्रम में प्रधान न्यायाधीश, परिवार न्यायालय राहुल उपाध्याय के न्यायिक कक्ष में मोटर दुर्घटना दावा अधिकरण यानी एमएसीटी से जुड़े लंबित मामलों को लेकर महत्वपूर्ण बैठक हुई. बैठक में एमएसीटी मामलों से जुड़े अधिवक्ताओं ने भाग लिया. इस दौरान लंबित मामलों के शीघ्र निष्पादन, पक्षकारों के बीच आपसी सहमति की संभावनाओं और लोक अदालत के माध्यम से अधिकाधिक मामलों के निस्तारण को लेकर विस्तार से विचार-विमर्श किया गया.
बैठक में जिला विधिक सेवा प्राधिकार के सचिव अमित गौरव भी मौजूद रहे. पात्र मामलों में संबंधित पक्षकारों को राष्ट्रीय लोक अदालत के लाभों की जानकारी देने और आपसी सहमति के आधार पर मामलों का त्वरित समाधान कराने पर विशेष जोर दिया गया.
आपराधिक और एनआई एक्ट मामलों को भी प्राथमिकता
वहीं, रामचंद्र प्रसाद एवं जिला विधिक सेवा प्राधिकार के सचिव अमित गौरव की संयुक्त अध्यक्षता में दूसरी बैठक आयोजित की गई. इसमें दंडनीय समझौता योग्य आपराधिक मामलों, विधिक माप-विज्ञान एवं बाट-माप से संबंधित मामलों, वन अधिनियम, परक्राम्य लिखत अधिनियम यानी एनआई एक्ट समेत अन्य समझौता योग्य मामलों के अधिकतम निष्पादन पर विशेष जोर दिया गया.
पक्षकारों को नोटिस देकर लोक अदालत में लाने की तैयारी
बैठक में न्यायिक पदाधिकारियों से लंबित मामलों की पहचान करने तथा संबंधित पक्षकारों को समय पर नोटिस और आवश्यक सूचना उपलब्ध कराने को कहा गया. समझौते की संभावना वाले मामलों को प्राथमिकता के आधार पर चिह्नित कर आगामी राष्ट्रीय लोक अदालत में लाने को लेकर भी आवश्यक विचार-विमर्श किया गया.
इस अवसर पर अफजल आलम, एसीजेएम वन, नंदिता कुमारी, एसीजेएम पंचम, निधि कुमारी, एसडीजेएम, सुदीप कुमार, मुंसिफ, श्वेताभ सैंडिल्या, स्वाति चतुर्वेदी सहित अन्य न्यायिक पदाधिकारी उपस्थित रहे. जिला विधिक सेवा प्राधिकार का लक्ष्य है कि 12 सितंबर को आयोजित राष्ट्रीय लोक अदालत में अधिक से अधिक पात्र मामलों का आपसी सहमति के आधार पर त्वरित और प्रभावी समाधान कराया जा सके.
