सुपौल. हिंदू धर्म में जितिया को जीवित्पुत्रिका व्रत भी कहा जाता है, मातृत्व और संतान के मंगल की कामना से जुड़ा एक विशेष पर्व है. इस व्रत को संतान की लंबी उम्र, स्वस्थ जीवन और परिवार की समृद्धि के लिए रखा जाता है. धार्मिक मान्यता है कि विधि-विधान से जितिया व्रत करने पर संतान को निरोगी और दीर्घायु जीवन का आशीर्वाद प्राप्त होता है, साथ ही परिवार में सुख-शांति बनी रहती है. कब है जितिया व्रत 2025 पंडित आचार्य धर्मेंद्र नाथ मिश्र ने कहा कि इस वर्ष आश्विन माह के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि 14 सितंबर 2025 को प्रातः काल 08 बजकर 50 मिनट से शुरू होगी व अगले दिन 15 सितंबर को प्रातः काल 05 बजकर 36 मिनट तक रहेगी. उसके बाद नवमी तिथि प्रवेश कर पारण किया जाएगा. जितिया व्रत से एक दिन पहले नहाय-खाय की परंपरा निभाई जाती है. इस वर्ष नहाय-खाय 13 सितंबर, मंगलवार को होगा. इस दिन व्रती महिलाएं स्नान कर पवित्रता का पालन करती हैं और एक समय सात्विक भोजन ग्रहण करती हैं. कई क्षेत्रों में इस दिन खास व्यंजन बनाए जाते हैं, जिन्हें व्रती महिलाएं नियमपूर्वक ग्रहण करती हैं. व्रत और पारण का महत्व 14 सितंबर को महिलाएं निर्जला उपवास करते हुए दिन-रात भगवान जीमूतवाहन की पूजा करेंगी. व्रत का पारण अगले दिन 15 सितंबर की सुबह सूर्योदय के बाद किया जाएगा. पारण से पहले स्नानादि कर विधिपूर्वक पूजा करने की परंपरा है. इस अवसर पर परंपरागत व्यंजन जैसे नोनी साग, तोरई की सब्जी, रागी की रोटी और अरबी आदि बनाए जाते हैं. महत्व व आस्था धार्मिक मान्यता है कि जितिया व्रत से माताओं को मानसिक शांति और शक्ति मिलती है, वहीं संतान के जीवन में समृद्धि और कल्याण का मार्ग प्रशस्त होता है. पूर्वांचल और मिथिला क्षेत्र में यह व्रत बड़ी श्रद्धा और आस्था के साथ मनाया जाता है. पंडित आचार्य धर्मेंद्र नाथ मिश्र ने कहा कि अष्टमी तिथि 14 सितंबर रविवार को प्रातः काल 08 बजकर 50 मिनट से शुरू होगी तथा अगले दिन सोमवार को प्रातः काल 05 बजकर 36 मिनट तक रहेगी. उसके बाद नवमी तिथि प्रवेश कर पारण किया जाएगा. इस दौरान डाली भरने का शुभ मुहूर्त रविवार को अर्द्धप्रहरा वर्जित कर यानि चौथा और पंचम अर्द्धप्रहरा रहने से दोपहर के 01 बजकर 34 मिनट के बाद डाली भरी जाएगी. जितिया व्रत ही एक ऐसी व्रत है जो त्रिदिवसीय यज्ञ सभी महिलाएं अपने संतान की लंबी आयु, विद्या प्राप्ति के साथ साथ स्वस्थ शरीर की कामना के लिए व्रत रखती है. जितिया व्रत में खरजितिया का है योग पंडित आचार्य धर्मेंद्र नाथ मिश्र ने बताया कि खरजीतिया लगने से जो महिलाएं जितिया व्रत करना चाहती हैं वे महिलाएं व्रत उठा सकती हैं. पहली बार जितिया व्रत करने वाली स्त्रियां खरजितिया लगने की इंतजार में रहती हैं. खरजीतिया लगने पर व्रत उठाने वाली महिलाओं के संतानों की अकाल अवस्था नहीं प्राप्त होती है. गंगा पुलकित और विद्यापति पंचांग अनुसार व्रत के दौरान विशेष संकट की स्थिति में गंगाजल, शर्बत, शुद्ध देसी गाय का दूध एवं जूस आदि ग्रहण कर व्रत पूर्ण किया जा सकता है जिससे कोई दोष नहीं होता है. इस दौरान डलिया में बांस के पत्तों का प्रयोग से वंशवृद्धि की परंपरा स्थापित करता है. मरुआ रोटी ग्रहण करने से व्रती को प्रोटीन की कमी नहीं होती है. मरुआ में प्रोटीन के साथ साथ विटामिन, आयरन भरपूर मात्रा में पाया जाता है जिससे व्रती को ऊर्जा की प्राप्ति होती है.
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