मां स्कंदमाता की हुई पूजा-अर्चना

नवरात्र के अवसर पर मंदिरों को बड़े ही आकर्षक व भव्य तरीके से सजाया गया है

सुपौल. जिले में नवरात्र को लेकर भक्तिमय माहौल बना हुआ है. शहर के प्रमुख दुर्गा मंदिरों के साथ-साथ ग्रामीण क्षेत्रों के दुर्गा मंदिरों में पूजा का आयोजन किया जा रहा है. वहीं घरों में भी श्रद्धालुओं द्वारा माता भगवती की पूजा-अर्चना पूरी श्रद्धा और आस्था के साथ की जा रही है. शनिवार को नवरात्र के पंचमी को भगवती के पंचम स्वरूप स्कंदमाता की आराधना की गयी. पूजा को लेकर खास तौर पर जिला मुख्यालय स्थित बड़ी दुर्गा स्थान निराला नगर, गांधी मैदान स्थित सार्वजनिक दुर्गा मंदिर तथा माल गोदाम दुर्गा मंदिर सहित बरूआरी पश्चिम स्थित दुर्गा मंदिर सहित बरैल, परसरमा, सुखपुर स्थित माता के मंदिरों में श्रद्धालुओं का तांता लगा रहा. नवरात्र के अवसर पर मंदिरों को बड़े ही आकर्षक व भव्य तरीके से सजाया गया है. जहां बड़ी संख्या में लोग यहां माता की पूजा व धूप-आरती के लिए पहुंच रहे हैं. माता के प्रति श्रद्धा व आस्था का सैलाब धीरे-धीरे उमड़ता जा रहा है. आज षष्ठी तिथि पर होगी श्री कात्यायनी माता की पूजा : आचार्य धर्मेंद्रनाथ मिश्र नवरात्र के षष्ठम दिन यानी रविवार को आदि शक्ति के छठे स्वरूप मां कात्यायनी की पूजा-अर्चना होगी. आचार्य धर्मेंद्रनाथ मिश्र ने बताया कि कात्यायनी माता का जन्म महर्षि कात्यायन की तपस्या से हुआ था, इसलिए इन्हें कात्यायनी कहा जाता है. धार्मिक मान्यता है कि इस दिन साधक को अपना चित्त आज्ञा चक्र में स्थिर कर साधना करनी चाहिए. कात्यायनी की उपासना से आज्ञा चक्र जागृत होता है और साधक को धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष चारों पुरुषार्थों की प्राप्ति होती है. आचार्य मिश्र ने बताया कि मां कात्यायनी की पूजा से भक्तों के रोग, शोक और संताप का नाश होता है तथा वह अलौकिक तेज और प्रभाव से युक्त होकर परम शांति, सुख और ऐश्वर्य का अधिकारी बन जाता है.

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