सुपौल जिले के छातापुर मुख्यालय बाजार स्थित प्रसिद्ध एवं ग्रामीण देवी के रूप में प्रतिष्ठित माता डिहवारिणी स्थान पर आगामी 29 जुलाई (बुधवार) की रात भव्य पूजनोत्सव का आयोजन किया जाएगा. प्रतिवर्ष आषाढ़ मास की पूर्णिमा के अवसर पर आयोजित होने वाले इस पारंपरिक पूजनोत्सव को स्थानीय लोग 'अखाड़िया पूजा' के नाम से भी जानते हैं. वार्षिक धार्मिक अनुष्ठान को भव्य एवं सुव्यवस्थित बनाने के लिए पूजा समिति द्वारा तैयारियां जोर-शोर से शुरू कर दी गई हैं.
प्राचीन काल से चली आ रही परंपरा
पूजा समिति के सक्रिय सदस्य अशोक भगत ने कार्यक्रम की जानकारी देते हुए बताया:
- प्राचीन लोक आस्था: छातापुर बाजार वासियों द्वारा प्राचीन काल से ही आषाढ़ पूर्णिमा पर यह विशेष पूजनोत्सव धूमधाम से मनाया जाता रहा है.
- अपार श्रद्धा का केंद्र: माता डिहवारिणी स्थान छातापुर और आसपास के दर्जनों गांवों के निवासियों के लिए अगाध श्रद्धा का केंद्र है.
- रात्रिकालीन पूजा: मुख्य पूजा का आयोजन बुधवार की रात को होगा, जिसमें हजारों की संख्या में श्रद्धालु उपस्थित होकर विशेष अर्चना और दीप प्रज्वलन करेंगे.
मनौतियां होती हैं पूरी, खिंचे चले आते हैं दूर-दराज के श्रद्धालु
माता डिहवारिणी मंदिर की महिमा के संबंध में स्थानीय लोगों का अटूट विश्वास है:
- मनोकामना पूर्ति: मान्यता है कि जो भी भक्त सच्चे मन से माता के दरबार में आकर प्रार्थना करते हैं, देवी माता उनकी सभी मनोकामनाएं अवश्य पूर्ण करती हैं.
- प्रवासियों का जुड़ाव: इस अखाड़िया पूजा की सबसे बड़ी खासियत यह है कि छातापुर के जो लोग रोजगार या व्यवसाय के सिलसिले में महाराष्ट्र, राजस्थान और देश के अन्य दूर-दराज राज्यों में जाकर बस गए हैं, वे भी इस खास दिन खिंचे चले आते हैं.
पूजा समिति ने की शामिल होने की अपील
पूजा समिति के प्रतिनिधि अशोक भगत ने छातापुर एवं आसपास के समस्त इलाके के धर्मप्रेमी जनता और शिव-शक्ति भक्तों से 29 जुलाई की रात आयोजित होने वाले इस पावन पूजनोत्सव में सपरिवार शामिल होकर माता डिहवारिणी का आशीर्वाद प्राप्त करने का सहर्ष अनुरोध किया है.
