सम्मान से होगी अब गांवों में ही बेटियों की शादी

32 पंचायतों में विवाह मंडल निर्माण के लिए चिन्हित किया गया जमीन

– जिले के 174 पंचायतों में बनेंगे आधुनिक कन्या विवाह मंडप – गरीब परिवारों को मिलेगी बड़ी राहत – 32 पंचायतों में विवाह मंडल निर्माण के लिए चिन्हित किया गया जमीन सुपौल. जिले के ग्रामीण इलाकों की तस्वीर अब बदलने वाली है. गांवों में भी शहरों जैसी सुविधाओं के साथ बेटियों की शादी हो सके, इसी उद्देश्य से सरकार की महत्वाकांक्षी मुख्यमंत्री कन्या विवाह मंडप योजना तेजी से धरातल पर उतरने लगी है. इस योजना के तहत जिले की सभी 174 पंचायतों में एक-एक आधुनिक विवाह मंडप का निर्माण किया जाना है. योजना की शुरुआत से ही गरीब और आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों में नई उम्मीद जगी है. जिले में अब तक 32 पंचायतों में विवाह मंडप निर्माण के लिए जमीन चिन्हित कर ली गई है, जिसे विभागीय स्वीकृति भी मिल चुकी है. इन पंचायतों में निर्माण कार्य को गति देने के लिए राशि उपलब्ध कराने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है. वहीं शेष पंचायतों में जमीन उपलब्ध कराने के लिए सभी अंचल अधिकारियों को निर्देश जारी किए गए हैं, ताकि योजना समय पर पूरी हो सके. गरीब परिवारों के लिए बड़ी राहत ग्रामीण क्षेत्रों में आज भी शादी-ब्याह गरीब परिवारों के लिए एक बड़ी चुनौती मानी जाती है. सीमित जगह, बरात ठहराने की समस्या, मौसम की मार और टेंट-पंडाल पर भारी खर्च इन सबके कारण कई परिवार कर्ज के बोझ तले दब जाते हैं. मुख्यमंत्री कन्या विवाह मंडप योजना के तहत बनने वाले ये आधुनिक विवाह भवन इन समस्याओं का स्थायी समाधान बनेंगे. यहां विवाह आयोजन के साथ-साथ बरातियों के ठहरने, भोजन और अन्य आवश्यक कार्यक्रमों के लिए भी पर्याप्त सुविधाएं उपलब्ध होंगी. प्रत्येक विवाह भवन पर होंगे 50 लाख रुपये खर्च जिला पंचायती राज पदाधिकारी गयानंद यादव ने बताया कि प्रत्येक पंचायत में बनने वाले विवाह मंडप के निर्माण पर लगभग 50 लाख रुपये खर्च किए जाएंगे. ये भवन आधुनिक सुविधाओं से युक्त होंगे, ताकि ग्रामीण क्षेत्रों में भी गरिमापूर्ण, सुरक्षित और सम्मानजनक विवाह समारोह आयोजित किए जा सकें. उन्होंने आम लोगों से योजना को सफल बनाने में सहयोग की अपील की है और कहा कि भूमि चिन्हित करने व निर्माण कार्य में जनप्रतिनिधियों की भूमिका बेहद अहम है. इन पंचायतों में चिह्नित हो चुकी है जमीन अब तक जिन पंचायतों में जमीन उपलब्ध हो चुकी है, उनमें बसंतपुर प्रखंड के कुशहर, सातनपट्टी, बिशनपुर शिवराम, छातापुर प्रखंड के जीवछपुर, लक्ष्मीनियां, किसनपुर प्रखंड के किसनपुर उत्तर, मलाढ़, मेहासिमर, परसामाधो, मरौना प्रखंड के गनौरा, पिपरा प्रखंड के पथरा दक्षिण, पथरा उत्तर, अमहा, बसहा, दुबियाही, प्रतापगंज प्रखंड के सुखानगर, श्रीपुर, चिलौनी उत्तर, राघोपुर प्रखंड के डुमरी, परमानंदपुर, सदर प्रखंड के हरदी पूरब, करिहो, पिपरा खुर्द, लौकहा, एकमा एवं त्रिवेणीगंज प्रखंड के औरलाहा, कुशहा, कोरियापट्टी पूरब, कोरियापट्टी पश्चिम, परसागढ़ी दक्षिण, महेशुआ शामिल हैं. इन पंचायतों में भूमि चिन्हित होने के बाद अब निर्माण प्रक्रिया तेज करने की तैयारी है. शेष पंचायतों में जमीन खोजने के निर्देश जिले की बाकी पंचायतों में अभी जमीन चिन्हित नहीं हो सकी है. इसके लिए जिला प्रशासन ने सभी अंचल अधिकारियों को प्राथमिकता के आधार पर भूमि की पहचान करने का निर्देश दिया है. प्रशासन का लक्ष्य है कि जल्द से जल्द सभी पंचायतों में जमीन उपलब्ध हो, ताकि योजना पूरे जिले में एक साथ लागू की जा सके. मुख्यमंत्री कन्या विवाह मंडप योजना को केवल एक निर्माण परियोजना नहीं, बल्कि सामाजिक बदलाव की दिशा में बड़ा कदम माना जा रहा है. इन विवाह मंडपों का उपयोग भविष्य में सामाजिक, सांस्कृतिक और सरकारी कार्यक्रमों के आयोजन के लिए भी किया जा सकेगा. यदि यह योजना तय समय पर और पारदर्शिता के साथ पूरी होती है, तो आने वाले वर्षों में गांवों में भी बेटियों की शादी सम्मान, सुविधा और सुरक्षा के साथ हो सकेगी. गरीब परिवारों के लिए यह योजना न केवल आर्थिक राहत बनेगी, बल्कि सामाजिक सम्मान का मजबूत आधार भी तैयार करेगी.

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