बाढ़ पूर्व तैयारियों का हाई लेवल निरीक्षण, कोसी बराज के गेटों की हुई जांच

कोसी क्षेत्र में 1 जून से शुरू हो रही बाढ़ अवधि को लेकर जेएफसीसी और नेपाल के अधिकारियों ने कोसी बराज के सभी 56 गेटों और 40 करोड़ के कटावरोधी कार्यों का हाई लेवल निरीक्षण किया. नदी के बीच सिल्ट हटाने के लिए बने सेंट्रल पायलट चैनल का भी अधिकारियों ने मोटर बोट से जायजा लिया.

वीरपुर (सुपौल) से प्रमोद कुमार की रिपोर्ट. कोसी क्षेत्र में हर वर्ष की तरह इस बार भी 1 जून से बाढ़ अवधि की शुरुआत होने जा रही है. आगामी मानसून और संभावित बाढ़ के खतरों को देखते हुए प्रशासनिक व तकनीकी तैयारियां तेज कर दी गई हैं. इसी कड़ी में जेएफसीसी (जॉइंट फ्लड कोऑर्डिनेशन कमिटी) के उच्च स्तरीय अधिकारियों की टीम ने कोसी योजना के बाढ़ नियंत्रण एवं जल निस्सरण के चीफ इंजीनियर तथा नेपाल के अधिकारियों के साथ मिलकर वित्तीय वर्ष 2025-26 में कराए गए बाढ़ पूर्व कटाव निरोधक कार्यों का सघन निरीक्षण किया.

50 संवेदनशील स्थानों पर कराए गए सुरक्षा कार्य

निरीक्षण के दौरान उच्च स्तरीय कमेटी ने अनुशंसित लगभग 40 करोड़ रुपये की लागत से कराए गए विभिन्न सुरक्षा कार्यों का भौतिक सत्यापन (स्पॉट वेरिफिकेशन) किया.

  • नेपाल और भारतीय क्षेत्र में काम: प्राप्त जानकारी के अनुसार, इस बार नेपाल क्षेत्र में 29 और भारतीय क्षेत्र में 21 (कुल 50) चिन्हित संवेदनशील स्थानों पर तटबंधों एवं स्परों की सुरक्षा से जुड़े कार्य किए गए हैं.
  • संतुष्टि: निरीक्षण के दौरान अधिकारियों ने काम की गुणवत्ता पर संतोष जताया. टीम ने नेपाल प्रभाग के 26.44 किलोमीटर क्षेत्र में बने स्परों समेत कई स्थानों पर कराए गए परकोपाइन कार्यों का भी जायजा लिया. इसके बाद अधिकारियों की टीम नेपाल प्रभाग के कोसी पूर्वी बाहोत्थान बांध का निरीक्षण करते हुए कोसी बराज पहुंची.

बराज के सभी 56 गेटों की यांत्रिक जांच

कोसी बराज पहुंचकर तकनीकी अधिकारियों ने सभी 56 गेटों के संचालन, उनकी वर्तमान स्थिति तथा भारी जलप्रवाह (बाढ़) के समय अपनाई जाने वाली त्वरित तकनीकी व्यवस्था की बारीकी से जानकारी ली. इसके बाद अधिकारियों ने लगभग 3.04 करोड़ रुपये की लागत से बने सेंट्रल पायलट चैनल का मोटर बोट के जरिए ऑन-स्पॉट निरीक्षण किया.

सेंट्रल पायलट चैनल से कम होगा तटबंधों पर दबाव

अधिकारियों ने बताया कि 28 नंबर फाटक (गेट) के सामने निर्मित सेंट्रल पायलट चैनल पूरी तरह सुचारू रूप से कार्यरत है. इस चैनल की वजह से नदी के बीच में जमा गाद (सिल्ट) कटकर धीरे-धीरे समाप्त हो रही है. वर्तमान में पूरी जलधारा को इसी चैनल में प्रवाहित करने का प्रयास किया जा रहा है, ताकि बाढ़ की अवधि शुरू होने से पहले कोसी नदी की मुख्य धारा नदी के बिल्कुल मध्य भाग में बह सके. ऐसा होने से पूर्वी कोसी तटबंध, स्पर तथा स्टड पर बढ़ते जलस्तर का सीधा दबाव काफी कम हो जाएगा और तटबंध सुरक्षित रहेंगे.

कंट्रोल रूम में हुई उच्च स्तरीय समीक्षा बैठक

निरीक्षण कार्यक्रम के पश्चात कोसी बराज के मुख्य कंट्रोल रूम में एक महत्वपूर्ण समीक्षा बैठक आयोजित की गई. इस बैठक में केंद्रीय जल बोर्ड, केंद्रीय विद्युत अनुसंधान संस्थान (पुणे) के वैज्ञानिकों, बिहार सरकार के जल संसाधन विभाग के अभियंताओं तथा नेपाल सरकार के प्रतिनिधियों ने भाग लिया. इस दौरान आपातकाल में गेटों के ऑपरेटिंग सिस्टम और बैकअप तकनीकी व्यवस्थाओं की गहन समीक्षा की गई.

“यह संयुक्त समीक्षा बैठक प्रत्येक वर्ष आयोजित होती है, जिसमें केंद्र सरकार, बिहार सरकार, पुणे के अनुसंधान संस्थान एवं नेपाल के अधिकारी शामिल होते हैं. कोसी क्षेत्र में तटबंधों के मजबूतीकरण और सुरक्षा से जुड़े अधिकांश कार्य लगभग पूरे हो चुके हैं. 1 जून से बाढ़ अवधि शुरू होने से पहले सभी आवश्यक तैयारियां शत-प्रतिशत पूरी कर ली जाएंगी, ताकि कोसी क्षेत्र के ग्रामीणों को संभावित खतरे से सुरक्षित रखा जा सके.” – संजीव शैलेश, चीफ इंजीनियर (बाढ़ नियंत्रण एवं जल निस्सरण).

इस बैठक का मुख्य उद्देश्य कोसी बराज के गेटों के सफल संचालन, तकनीकी कोऑर्डिनेशन और बाढ़ के दौरान उत्पन्न होने वाली किसी भी संभावित वीआईपी या आपातकालीन समस्या पर चर्चा कर समय रहते उसका समाधान सुनिश्चित करना है.

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Published by: Divyanshu Prashant

Divyanshu Prashant is a contributor at Prabhat Khabar.

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