सात निश्चय योजना पार्ट 03 से सुपौल की स्वास्थ्य व्यवस्था में ऐतिहासिक बदलाव,

सदर अस्पताल में एमएलसीयू की स्थापना

– 2026 में जिले के स्वास्थ्य केंद्रों पर मिलेगा आधुनिक व सुलभ इलाज सुपौल. वर्ष 2026 में बिहार सरकार की महत्वाकांक्षी सात निश्चय योजना पार्ट 03 के तहत सुपौल जिले की स्वास्थ्य सेवाओं में बड़े और व्यापक बदलाव किए जाएंगे. इन सुधारों का उद्देश्य जिले की स्वास्थ्य व्यवस्था को अधिक मजबूत, आधुनिक और आम जनता के लिए सुलभ बनाना है. सात निश्चय योजना के अंतर्गत जिले के संपूर्ण स्वास्थ्य ढांचे का पुनर्गठन किया जा रहा है, जिससे ग्रामीण से लेकर शहरी क्षेत्रों तक लोगों को बेहतर चिकित्सा सुविधाएं मिल सकें. योजना के तहत जिले के सभी सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) को विशिष्ट स्वास्थ्य केंद्र के रूप में विकसित किया जाएगा, जबकि सदर अस्पताल को अतिविशिष्ट स्वास्थ्य केंद्र का दर्जा मिलेगा. उन्होंने कहा कि इससे लोगों को यह स्पष्ट जानकारी मिलेगी कि किस स्वास्थ्य केंद्र पर किस स्तर की चिकित्सा सुविधा उपलब्ध है. सदर अस्पताल में एमएलसीयू की स्थापना सदर अस्पताल को अत्याधुनिक चिकित्सा उपकरणों, विशेषज्ञ डॉक्टरों और उन्नत जांच सुविधाओं से लैस किया जाएगा. नए साल में यहां एमएलसीयू (मेडिकल लॉजिस्टिक, क्रिटिकल यूनिट) की स्थापना की जाएगी, जिससे गंभीर और आपातकालीन मरीजों को त्वरित और बेहतर इलाज मिल सकेगा व बाहर रेफर करने की जरूरत कम होगी. 358 उप स्वास्थ्य केंद्र होंगे पूरी तरह क्रियाशील स्वास्थ्य विभाग की प्राथमिकता जिले के 358 उप स्वास्थ्य केंद्रों को पूरी तरह क्रियाशील बनाना है. इन केंद्रों के माध्यम से गांव-गांव तक प्राथमिक उपचार, मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य सेवाएं, टीकाकरण और सामान्य बीमारियों का इलाज उपलब्ध कराया जाएगा. उप स्वास्थ्य केंद्रों पर आयुष्मान आरोग्य मंदिर (ग्रामीण) एवं अर्बन हेल्थ एंड वेलनेस सेंटर संचालित किए जाएंगे. यहां एएनएम और सीएचओ के माध्यम से नियमित ओपीडी सेवाएं दी जाएंगी. जिससे छोटी बीमारियों के लिए लोगों को बड़े अस्पतालों की ओर नहीं जाना पड़ेगा. योजना की एक बड़ी विशेषता टेली मेडिसिन सेवा होगी. इसके माध्यम से ग्रामीण क्षेत्रों के मरीज वीडियो कॉल या डिजिटल प्लेटफॉर्म के जरिए विशेषज्ञ चिकित्सकों से परामर्श ले सकेंगे. जिससे समय और खर्च दोनों की बचत होगी और गंभीर मामलों की समय पर पहचान संभव होगी. ओपीडी सेवाओं का होगा व्यापक विस्तार उप स्वास्थ्य केंद्रों और आयुष्मान आरोग्य मंदिरों पर बुखार, सर्दी-खांसी, पेट दर्द, ब्लड प्रेशर, शुगर जैसी सामान्य बीमारियों की जांच व इलाज की सुविधा मिलेगी. साथ ही गर्भवती महिलाओं की जांच, बच्चों का टीकाकरण और स्वास्थ्य परामर्श सेवाएं भी नियमित रूप से उपलब्ध रहेंगी. इन सभी बदलावों का सीधा लाभ ग्रामीण क्षेत्रों के लोगों को मिलेगा. अब छोटी स्वास्थ्य समस्याओं के लिए जिला मुख्यालय या निजी अस्पतालों पर निर्भरता कम होगी और गांव स्तर पर ही भरोसेमंद इलाज उपलब्ध हो सकेगा. मानव संसाधन और प्रशिक्षण पर विशेष जोर सीएस डॉ ललन कुमार ठाकुर ने बताया कि योजना को सफल बनाने के लिए एएनएम और सीएचओ को नियमित प्रशिक्षण दिया जाएगा, ताकि वे आधुनिक चिकित्सा पद्धतियों और तकनीकों से अपडेट रहें.. उन्होंने कहा कि वर्ष 2026 में लागू होने वाले ये बदलाव केवल शुरुआत है. आने वाले समय में स्वास्थ्य सेवाओं को और बेहतर बनाने के लिए नई योजनाएं जोड़ी जाएंगी.

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