शतचंडी महायज्ञ की भव्य तैयारी, काशी के विद्वान पंडितों की देखरेख में बन रहा दिव्य यज्ञ मंडप
19 जनवरी को यज्ञ प्रारंभ होगा, जबकि 27 जनवरी को यज्ञ समापन होगा
सुपौल. सदर प्रखंड के गढ़ बरूआरी पश्चिम स्थित मां दुर्गा दस महाविद्या एवं नवग्रह मंदिर परिसर में होने वाले शतचंडी महायज्ञ को लेकर क्षेत्र में धार्मिक उत्साह चरम पर है. यज्ञ समिति द्वारा व्यापक स्तर पर तैयारी की जा रही है, जिसमें यज्ञ की पवित्रता, विधि-विधान और श्रद्धालुओं की सुविधा का विशेष ध्यान रखा जा रहा है. पूजन-पाठ, कलश यात्रा से लेकर यज्ञ मंडप निर्माण तक सभी कार्य शास्त्रीय परंपरा के अनुसार कराए जा रहे हैं. यज्ञ मंडप के अंदर और बाहर काशी-बनारस से आए विद्वान पंडित शास्त्री हिमांशु त्रिपाठी की देखरेख में राजमिस्त्री द्वारा हवन कुंड, पंचवेदी एवं पांच कुंडों का निर्माण कराया जा रहा है. उन्होंने बताया कि यज्ञ मंडप के मध्य में प्रधान वेदी बनाई जा रही है, जबकि चारों दिशाओं में विशेष प्रकार के पंचकुंड तैयार किए जा रहे हैं. शास्त्री हिमांशु त्रिपाठी के अनुसार पश्चिम एवं ईशान कोण में वृत्त कुंड, दक्षिण दिशा में चंद्र कुंड, उत्तर दिशा में पद्म कुंड, पूर्व दिशा में चतुर्थ कुंड का निर्माण किया जा रहा है. सभी कुंड शास्त्रों में वर्णित विधि के अनुसार बनाए जा रहे हैं, ताकि यज्ञ पूरी तरह से वैदिक परंपरा के अनुरूप संपन्न हो सके. 14 ब्राह्मण करेंगे विधि-विधान से अनुष्ठान उन्होंने बताया कि शतचंडी महायज्ञ में आचार्य, सहायक आचार्य सहित कुल 14 ब्राह्मण एवं अन्य सहयोगी ब्राह्मण शामिल रहेंगे. यज्ञ मंडप के अंदर चारों दिशाओं में ब्रह्मा, विष्णु, रुद्र एवं इंद्र का विधान होगा, जबकि यज्ञ मंडप के बाहर सूर्य, गणपति, यमराज, नारद, स्कंद, वायु, सोम, वरुण, अष्टवास्तु, धनद, बृहस्पति एवं विश्वकर्मा का विधिवत पूजन किया जाएगा. यज्ञ की सभी विधियां वैदिक मंत्रोच्चार और शास्त्रीय नियमों के अनुसार संपन्न कराई जाएंगी. 18 जनवरी को निकलेगी भव्य कलश यात्रा यज्ञ समिति के संरक्षक शेखर प्रसाद सिंह ने बताया कि यज्ञ की तैयारियां अब अंतिम चरण में हैं. उन्होंने कहा कि 18 जनवरी को सुबह 07 बजे भव्य कलश यात्रा निकाली जाएगी, जो आसपास के पांच गांवों का भ्रमण करते हुए पुनः यज्ञ स्थल पर लौटेगी. कलश यात्रा में बड़ी संख्या में श्रद्धालु महिलाएं, युवक-युवतियां एवं बुजुर्ग शामिल होंगे. 19 जनवरी से यज्ञ का होगा शुभारंभ जबकि 19 जनवरी को यज्ञ प्रारंभ होगा, जबकि 27 जनवरी को यज्ञ समापन होगा. समिति के अध्यक्ष सुनील कुमार यादव एवं सचिन रमेश कुमार सिंह ने बताया कि शतचंडी महायज्ञ की पवित्रता बनाए रखने के लिए शुक्रवार से पूरा गांव लहसुन, प्याज, मांस, मछली एवं मदिरा से मुक्त रहेगा. इसके लिए ढोल-नगाड़ों और साउंड सिस्टम के माध्यम से ग्रामीणों को जागरूक किया गया है, ताकि सभी लोग सात्विक जीवनशैली अपनाकर यज्ञ में भाग लें. यज्ञ की सफलता के लिए नवीन कुमार झा, सोना झा, नीरज कुमार झा, आनंद कुमार सिंह, अक्षय कुमार सिंह, इंद्रशेखर सिंह, कल्याण सिंह, सीता शरण सिंह, शंकर दत्त, उमेश चौधरी, आनंद बच्चा बाबू सहित बड़ी संख्या में ग्रामीण और युवा वर्ग तन-मन-धन से सहयोग कर रहे हैं. गांव में चारों ओर भक्तिमय माहौल है. यज्ञ स्थल को सजाया जा रहा है, रास्तों की साफ-सफाई हो रही है और श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए आवश्यक व्यवस्थाएं की जा रही है.
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