महावीर मंदिर में नौ दिवसीय संकीर्तन सह अष्टयाम का भव्य समापन

मंदिर परिसर में सुबह से भक्तों का लगा रहा तांता

मंदिर परिसर में सुबह से भक्तों का लगा रहा तांता सुपौल. जिला मुख्यालय स्थित महावीर मंदिर में आयोजित नौ दिवसीय संकीर्तन सह अष्टयाम का भव्य समापन शुक्रवार को भक्तिमय वातावरण में संपन्न हुआ. “हरे राम हरे राम, राम राम हरे हरे, हरे कृष्ण हरे कृष्ण, कृष्ण कृष्ण हरे हरे” की मधुर धुनों पर श्रद्धालु नृत्य, संगीत और कीर्तन में भाव-विभोर नजर आए. पूरे क्षेत्र में भक्ति और आस्था की अलौकिक छटा देखने को मिली. समापन समारोह के अवसर पर बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ पड़ी. सुबह से ही मंदिर परिसर में भक्तों का तांता लगा रहा. संकीर्तन मंडलियों द्वारा लगातार भजन-कीर्तन प्रस्तुत किए गए, जिससे वातावरण पूरी तरह कृष्णमय हो गया. श्रद्धालु ढोल, मंजीरा और करताल की धुन पर नृत्य करते हुए प्रभु के नाम का स्मरण करते रहे. विदाई धुन के साथ संकीर्तन सह अष्टयाम का समापन किया गया. रंग बिरंगे लाइट से जगमग रहा मंदिर महावीर मंदिर परिसर को आकर्षक ढंग से सजाया गया था. रंग-बिरंगी लाइटिंग, फूलों की सजावट और धार्मिक झांकियों ने श्रद्धालुओं का मन मोह लिया. आयोजन समिति द्वारा भक्तों के लिए प्रसाद वितरण की भी व्यवस्था की गई थी. मंदिर प्रशासन ने सुरक्षा और व्यवस्था के लिए स्वयंसेवकों की तैनाती की थी. समापन के दौरान महावीर चौक पर श्रद्धालुओं की भारी भीड़ के कारण कुछ समय के लिए जाम की स्थिति उत्पन्न हो गई. पुलिस प्रशासन और ट्रैफिक कर्मियों ने मौके पर पहुंचकर यातायात को सुचारू कराया. स्थानीय लोगों का कहना है कि इस तरह के धार्मिक आयोजनों से समाज में आपसी भाईचारा, शांति और सद्भाव का संदेश मिलता है. संकीर्तन और अष्टयाम के माध्यम से युवाओं में भी धार्मिक आस्था बढ़ रही है. बुजुर्गों, महिलाओं और बच्चों ने भी पूरे उत्साह के साथ कार्यक्रम में भाग लिया. विशेष आरती का हुआ आयोजन आयोजन समिति के सदस्यों ने बताया कि पिछले नौ दिनों से लगातार भगवान के नाम का जाप, प्रवचन और भजन-कीर्तन का आयोजन किया जा रहा था. इसका उद्देश्य समाज में आध्यात्मिक चेतना को जागृत करना और लोगों को धर्म के मार्ग पर प्रेरित करना है. कार्यक्रम के अंत में विश्व शांति, सुख-समृद्धि और जनकल्याण की कामना के साथ विशेष आरती और प्रसाद वितरण किया गया. श्रद्धालु संतोष और आनंद की अनुभूति के साथ अपने-अपने घर लौटे. महावीर मंदिर में आयोजित यह नौ दिवसीय संकीर्तन सह अष्टयाम न केवल धार्मिक दृष्टि से सफल रहा, बल्कि सामाजिक एकता और सांस्कृतिक परंपरा को भी मजबूत करने वाला सिद्ध हुआ.

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