कोहरे की सफेद चादर में लिपटा सुपौल: जनजीवन प्रभावित, रफ्तार पर लगा ब्रेक
कोहरे की सफेद चादर में लिपटा सुपौल: जनजीवन प्रभावित, रफ्तार पर लगा ब्रेक
सुपौल. जिले के लोगों के लिए सोमवार की सुबह किसी रहस्यमयी दृश्य से कम नहीं रही. जब लोग अपने-अपने घरों से बाहर निकले तो चारों ओर फैले घने कुहासे ने सब कुछ अपनी आगोश में ले लिया था. हालत ऐसी थी कि कुछ मीटर की दूरी पर खड़े व्यक्ति तक को पहचानना मुश्किल हो रहा था. हल्की पछुआ हवा के साथ घना कोहरा वातावरण में व ज्यादा ठंडक घोल रहा था. सड़के, खेत, बाजार, रेलवे ट्रैक व बस स्टैंड हर जगह धुंध की सफेद चादर फैली हुई थी. सुबह-सुबह काम पर निकलने वाले लोग, छात्र-छात्राएं व मजदूर कुहासे के बीच रास्ता तलाशते नजर आये. कई वाहन चालक हेडलाइट जलाकर बेहद धीमी रफ्तार से आगे बढ़ते रहे.
दृश्यता बेहद कम रहने से आमलोग रहे परेशान
सोमवार सुबह करीब छह बजे से ही घना कोहरा छाया हुआ था. दृश्यता महज 10 से 20 मीटर तक सिमट गयी थी. सड़क किनारे लगे साइन बोर्ड, दुकानें व पेड़-पौधे तक नजर नहीं आ रहे थे. लोगों को अंदाजे से रास्ता तय करना पड़ रहा था. स्थानीय निवासी अरुण कुमार बताते हैं, ऐसा लग रहा था जैसे पूरा शहर किसी सफेद धुंध में खो गया हो. सामने से कौन आ रहा है, कुछ समझ में नहीं आ रहा था. बहुत सावधानी से चलना पड़ रहा था.
सड़कों पर रेंगते रहे वाहन
घने कुहासे का सीधा असर यातायात पर देखने को मिला. राष्ट्रीय राजमार्ग, मुख्य सड़कें व ग्रामीण रास्तों पर वाहन रेंगते नजर आये. बस, ट्रक, ऑटो व बाइक चालक हेडलाइट और इंडिकेटर जलाकर बेहद धीमी गति से चल रहे थे. कई जगहों पर जाम जैसी स्थिति भी बनी रही. खासकर स्कूल बसों और सरकारी कार्यालय जाने वाले लोगों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ा. सुबह-सुबह स्कूल और कॉलेज जाने वाले बच्चों को भी भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ा. नौवीं की छात्रा नेहा कुमारी बताती हैं, सड़क पर कुछ दिखाई नहीं दे रहा था. बहुत डर लग रहा था. हम धीरे-धीरे स्कूल पहुंचे. दोपहिया वाहन चालकों को सबसे ज्यादा मुश्किल हुई. उन्हें सामने से आ रहे वाहनों का अंदाजा समय पर नहीं लग पा रहा था.
प्रभावित हुई ट्रेन और बस सेवाएं
घने कोहरे के कारण ट्रेन और बस सेवाओं पर भी असर पड़ा. कई ट्रेनें अपने निर्धारित समय से देरी से पहुंची. बस स्टैंड पर यात्री ठंड और धुंध से परेशान नजर आए. यात्री रविंद्र यादव कहते हैं सुबह की ट्रेन लेट हो गई. प्लेटफॉर्म पर कुछ भी साफ दिखाई नहीं दे रहा था. लोग ठंड से कांप रहे थे.
पछुआ हवा ने बढ़ाई ठंड
हल्की पछुआ हवा के चलते ठंड और ज्यादा महसूस की गयी. लोग ऊनी कपड़ों, शॉल और टोपी में खुद को ढंककर बाहर निकले. चाय की दुकानों पर भीड़ बढ़ गयी, जहां लोग गर्म चाय और पकौड़े का सहारा लेते नजर आए. ग्रामीण इलाकों में किसान अपने खेतों में जाने से पहले मौसम का जायजा लेते दिखे. कुछ किसानों ने बताया कि कुहासा फसलों के लिए नुकसानदेह भी हो सकता है, खासकर सब्जियों और दलहनी फसलों पर इसका असर पड़ता है.
स्वास्थ्य पर भी असर
घना कुहासा और ठंडी हवा का असर लोगों की सेहत पर भी पड़ रहा है. सर्दी, खांसी और सांस की परेशानी वाले मरीजों की संख्या बढ़ने लगी है. डॉक्टरों ने बुजुर्गों और बच्चों को सुबह-शाम बाहर निकलने से बचने की सलाह दी है. डॉ रामचंद्र कुमार के अनुसार, कोहरे और ठंड के कारण सांस संबंधी बीमारियां बढ़ सकती हैं. लोगों को गर्म कपड़े पहनने और गर्म तरल पदार्थ लेने की जरूरत है.
मौसम विभाग का अनुमान
मौसम विभाग के अनुसार आने वाले कुछ दिनों तक सुबह व रात में घना कुहासा बने रहने की संभावना है. पछुआ हवा के कारण तापमान में और गिरावट हो सकती है. विशेषज्ञों का कहना है कि इस मौसम में सतर्कता ही सबसे बड़ा बचाव है. धुंध में लिपटी सुबह के बावजूद लोगों की दिनचर्या थमी नहीं.
धूप खिलते ही बाजारों में लौटी रौनक, खरीदारी से गुलजार हुए बाजार
सुपौल. लगातार बादलों व ठंडे मौसम के बाद जैसे ही धूप निकली, सुपौल के बाजारों में एक बार फिर चहल-पहल बढ़ गयी. सुबह से ही लोग घरों से बाहर निकलकर रोजमर्रा की जरूरतों की खरीदारी में जुटे नजर आए. सब्जी मंडी, कपड़ा दुकानें, दवा दुकानें और चाय-नाश्ते की दुकानें ग्राहकों से भरी रही. धूप खिलते ही खासकर बुजुर्गों और बच्चों की संख्या बाजारों में बढ़ी, जो लंबे समय से ठंड व कोहरे के कारण घरों में ही रह रहे थे. दुकानदारों के चेहरों पर भी मुस्कान दिखी व बिक्री में सुधार हुआ. स्थानीय लोगों का कहना है कि धूप निकलने से न सिर्फ मौसम सुहावना हुआ है, बल्कि लोगों के मनोबल में भी बढ़ोतरी हुई है. बाजार की रौनक से सुपौल की दिनचर्या फिर से पटरी पर लौटती नजर आ रही है.
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