नेपाल में राजनीतिक अस्थिरता का पांचवां दिन, सीमावर्ती इलाकों में दहशत

भारतीय सीमा से नेपाल जाने लगीं ट्रेड गाड़ियां, आम जनजीवन अब भी प्रभावित

भारतीय सीमा से नेपाल जाने लगीं ट्रेड गाड़ियां, आम जनजीवन अब भी प्रभावित वीरपुर. नेपाल में सेना के हाथों में सत्ता आने के बाद आज राजनीतिक अस्थिरता का पांचवां दिन है. धीरे-धीरे जनजीवन सामान्य होने की कोशिश जरूर दिख रही है, लेकिन हालात अब भी पूरी तरह सामान्य नहीं हो पाए हैं. इसी बीच भारत-नेपाल सीमा पर कई दिनों से फंसी ट्रेड गाड़ियों को शुक्रवार को नेपाल भेजा गया. हालांकि कोसी बराज स्थित नेपाल का भंसार कार्यालय अब भी बंद है. जानकारी के अनुसार, नेपाल सेना आवागमन को सुचारु रूप से बहाल करने की पूरी कोशिश में जुटी हुई है. शुक्रवार को नेपाल प्रभाग में फंसे वाहनों को भारतीय एसएसबी की सघन तलाशी के बाद नेपाल जाने दिया गया. वहीं, नेपाल जाने वाले आम नागरिकों को भी जरूरी कार्य का कारण बताने के बाद ही प्रवेश की अनुमति दी गई. नेपाल से लौटने वाले लोगों ने बताया कि स्थिति सामान्य से काफी दूर है. सुनसरी जिले के इटहरी निवासी सूरज चौधरी ने कहा कि जिस दिन दंगा हुआ था उसी दिन सुबह वे घर से निकले थे और पांच दिन बाद अब घर लौटने की हिम्मत कर पाए हैं. उनके साथ लौटीं सुशीला चौधरी ने कहा, यह घटना नेपाल के लिए शर्मनाक है. इसने देश को 50 साल पीछे धकेल दिया है. लोग डर में जी रहे हैं, यह कहना मुश्किल है कि कब कौन-सी घटना घट जाए. उन्होंने बताया कि झुमका जेल से लगभग दो हजार कैदी फरार हो गए हैं, जिनमें ज्यादातर कुख्यात अपराधी हैं. ऐसे में घटनाओं में बढ़ोतरी की आशंका और भी गहरी हो गई है. अभी कई स्थानों पर विरोध प्रदर्शन जारी है, सेना सड़कों पर तैनात है और कर्फ्यू के बावजूद यातायात व्यवस्था पूरी तरह सामान्य नहीं हो पाई है. स्कूल, कॉलेज और दुकानें बंद हैं. हालांकि भीमनगर बॉर्डर पर एसएसबी ने लोगों के आवाजाही पर रोक नहीं लगाई है, लेकिन काम का कारण जरूरी होना चाहिए. उधर, नेपाल में अस्थिरता के कारण भीमनगर बाजार में भी सन्नाटा पसरा हुआ है. पिछले पांच दिनों से दुकानें सूनी पड़ी हैं और व्यापारी ग्राहकों के आने तथा नेपाल में स्थिति सुधरने का इंतजार कर रहे हैं.

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