देवी भागवत कथा में उमड़े श्रद्धालु, दुर्गा सप्तशती के महत्व पर हुआ विशेष प्रवचन

पूरे श्रद्धा भाव के साथ संपन्न हुए इस अनुष्ठान में वैदिक मंत्रोच्चार से वातावरण भक्तिमय हो उठा

सुपौल. बाबा पीठ कर्णपुर में चल रही देवी भागवत कथा में आचार्य शुकदेवानंद जी ने श्रद्धालुओं को देवी महिमा का दिव्य ज्ञान कराया. कथा के दौरान उन्होंने दुर्गा सप्तशती के महत्व को रेखांकित करते हुए कहा कि इसके 700 श्लोक मात्र शब्द नहीं, बल्कि साक्षात मां भगवती का स्वरूप हैं. जो भी श्रद्धा और भक्ति भाव से इन श्लोकों का पाठ करता है, उसे मां दुर्गा की कृपा सहज ही प्राप्त होती है. आचार्य जी ने बताया कि दुर्गा सप्तशती का पाठ न केवल आध्यात्मिक उन्नति प्रदान करता है, बल्कि जीवन की सभी बाधाओं को दूर कर भक्त को सुख-समृद्धि और शांति प्रदान करता है. उन्होंने विशेष रूप से यह संदेश दिया कि यदि कोई श्रद्धालु प्रतिदिन केवल एक श्लोक का भी पाठ करता है, तो उसे साक्षात मां दुर्गा की कृपा प्राप्त होती है और उसका जीवन कष्टों से मुक्त हो जाता है. यज्ञ का पारिवारिक, सामाजिक व पर्यावरणीय महत्व सहस्त्र चण्डी महायज्ञ के तृतीय दिवस के अवसर पर मुख्य यजमान विरेन्द्र चौधरी ने विधि-विधान से पूजन-अर्चन किया. पूरे श्रद्धा भाव के साथ संपन्न हुए इस अनुष्ठान में वैदिक मंत्रोच्चार से वातावरण भक्तिमय हो उठा. इस पावन अवसर पर गुरुदेव शिवाचार्य पंडित जीवेश्वर मिश्र ने यज्ञ और पूजन की महत्ता पर प्रकाश डालते हुए कहा कि वैदिक परंपरा में यज्ञ केवल धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि यह व्यक्ति, समाज और पर्यावरण के समग्र कल्याण का माध्यम है. उन्होंने बताया कि यज्ञ से सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है, जिससे मानसिक शांति, आरोग्यता और समृद्धि प्राप्त होती है. उन्होंने कहा कि सहस्त्र चण्डी महायज्ञ विशेष रूप से कलियुग में आध्यात्मिक उत्थान का स्रोत है. इसके माध्यम से देवी शक्ति का आह्वान किया जाता है, जिससे न केवल साधक का कल्याण होता है, बल्कि समूचे क्षेत्र में आध्यात्मिक चेतना का जागरण होता है. उन्होंने श्रद्धालुओं को यज्ञ और पूजन को अपनी दिनचर्या में शामिल करने का संदेश देते हुए कहा कि इससे नकारात्मकता समाप्त होती है और जीवन में आध्यात्मिक उन्नति का मार्ग प्रशस्त होता है. भक्तिमय हुआ पूरा क्षेत्र, श्रद्धालुओं की भारी उपस्थिति महायज्ञ में बड़ी संख्या में पंडित प्रानेश्वर मिश्र, मनोज मिश्रा, पंडित मणिरमण, पंडित कन्हैया झा, पंडित आशीष, पंडित चन्दन झा, पंडित रतन जी झा, पंडित कुंदन बबिता आदि विद्वान पंडितों के मंत्रोच्चारण एवं हवन से पूरा इलाका भक्तिमय हो गया. इस महायज्ञ में कर्णपुर, मल्हनी, सुखपुर, सुपौल से श्रद्धालु बड़ी संख्या में उपस्थित हो रहे हैं.

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By RAJEEV KUMAR JHA

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