संतों की अमृतवाणी से भाव विभोर हुए श्रद्धालु

सनातन धर्म का मूलमंत्र मातृ देवो भव पितृ देवो भव सनातन धर्म का मूलमंत्र है

छातापुर. कबीर साहेब कहते हैं जब परमात्मा या प्रकृति किसी से भेद नहीं करते तो मानव मानव में भेदभाव क्यों है? कहते हैं न हिंदू बनेंगे ना मुसलमान बनेंगे, इंसान की औलाद हैं इंसान बनेंगे. हिंदू मुस्लिम सिख इसाई सभी परम पिता परमेश्वर के ही संतान हैं. उक्त बातें मुख्यालय बाजार स्थित मध्य विद्यालय परिसर में आयोजित त्रिदिवसीय कबीर मत सत्संग सह प्रवचन के वार्षिक सम्मेलन के दूसरे दिन अपराह्न कालीन सत्र में संत मनमोहन साहेब ने कही. उन्होंने कहा कि तुम समझ जाओ की मैं कौन हूं, कहां से आया हूं, कहां जाना है. तब ज्ञात होगा कि हम सभी मानव हैं और मानवता ही हमारा धर्म है. यह शरीर यहीं से मिला है और यहीं मिट्टी में मिल जाना है. साथ कुछ जायेगा तो वह अच्छे या बुरे कर्म है. सदगुरूदेव कबीर साहेब का यह विचार है. इस विचार को अपनाने वाला मनुष्य ही अपने जीवन को सफल बना सकता है. उन्होंने कहा कि सनातन धर्म का मूलमंत्र मातृ देवो भव पितृ देवो भव सनातन धर्म का मूलमंत्र है. जिस परिवार में मातायें सुरक्षित नहीं हैं. पिता का आदर नहीं होता वह घर नर्क जैसा बन जाता है. दुनियां में कबीर विचार मंच ही है जो सनातन व संस्कृति को दोहराता है. समस्त जगत का कल्याण करता है. इसलिए सर्वधर्म समभाव को आत्मसात कर जीवन को सफल बनाया जा सकता है. रानी पतरा पूर्णिया के संत जयस्वरूप साहेब ने कहा कि आज के समय वैचारिक, पारिवारिक, सामाजिक व राजनैतिक विषमता ही मनुष्य के समस्त दुखों का कारण है. सच्चे सुख और शांति को पाने के लिए कबीर साहेब के विचारों को अपनाना होगा. कबीर साहेब के विचार समतावादी, समन्वयवादी और यथार्थवादी का समन्वय है. कबीर साहेब के साधु संत व अनुयाई समस्त मानव व जगत कल्याण के लिए बीते छह सौ वर्षों से प्रचार प्रसार कर रहे हैं. अपने प्रवचन के दौरान बंग्लादेश में एक हिंदू की पीट पीटकर मारने व पेड़ में लटकाकर जलाने की घटना पर चिंता व्यक्त की. मधेपुरा से आये असंगस्वरूप साहेब ने कहा कि मन को स्वस्थ बनाने के लिए संतों की वाणी एवं तन को स्वस्थ्य बनाने के लिए योग प्रणायाम मनुष्य के लिए आवश्यक है. संत उपेंद्र साहेब के संचालन में कई साधु व संतों मंचासीन रहे. सुमधुर गीत व भजन का दौर चलता रहा. इस अवसर पर आगत श्रद्धालुओं के लिए तीनों पहर का भंडारा आयोजित है. आयोजन को सफल बनाने में बैजनाथ बाबा के अगुआई में उपेंद्र भगत, हीरालाल साह, विजेंद्र उर्फ बौआ मंडल, अरूण बहरखेर, रामलखन पासवान, पवन कुमार ठाकुर, बिनोद भगत, संजीव सहनी, सकलदेव राम सहित स्थानीय नागरिक जुटे हुए हैं.

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