बेटियां अल्लाह की नेमत व रहमत हैं - मुफ्ती सोहराब

दुआ के साथ संपन्न हुआ दस्तारबंदी व इसलाहे मुआशरा

-दुआ के साथ संपन्न हुआ दस्तारबंदी व इसलाहे मुआशरा – बेटा-बेटी को एक समान तालिम दिलाने की दी गयी नसीहत छातापुर. मुख्यालय पंचायत वार्ड संख्या छह स्थित मदरसा अजबरूल उलूम में आयोजित एक दिवसीय दस्तारबंदी व इसलाहे मुआशरा का समापन दुआ के साथ हो गया. मौलाना मुफ्ती सोहराब नदवीं के साथ अकीदतमंदों ने समाज, देश व दुनियां में तरक्की एवं अमन चैन के लिए दुआ की. तालिम को बढ़ावा देने, समाज सुधार व मदरसे की तरक्की के लिए जलसा का आयोजन किया गया. कार्यक्रम के दौरान मदरसा में कुरआन ए पाक में हीब्ज मुकम्मल करने वाले चार छात्रों को हाफिज की दस्तारबंदी की गई. जिसमें हाफिज असदुल्लाह रहमानी, हाफिज मार्गुबुर रहमान, हाफिज मो एहतशाम अल हुसैनी व हाफिज मो जिब्राईल शामिल हैं. जलसा में कौम व समाज के मौजूदा हालात और समाज में फैली हुई कुरीतियों पर ओलमा ए केराम ने तकरीर किया. वहीं बेटा-बेटी को एक समान तालिम दिलाने की नसीहत दी. ओलमा-ए केराम ने अपने तकरीर में कहा कि अल्लाह ने मुसलमानों को दुनिया में इबादत के लिए और आखरी नबी के बताए मार्ग पर जिंदगी जीने तथा सीधे रास्ते पर चलने के लिए भेजा है. कहा जो लोग कुरआन के बताएं मार्ग पर चलेगा उसी को जन्नत नसीब होगा. तालिम या इल्म सभी मुसलमानों पर फर्ज है. जिसे खुशहाली के लिए हासिल करना जरूरी है. कहा कि मदरसा में पढ़कर कई लोग बड़े-बड़े पद पर गए हैं. अपने परिवार, आस-पड़ोस और गांव के बच्चों को पढ़ने के लिए प्रेरित करें. चाहे मदरसा में पढ़े या स्कूल में लेकिन पढ़ना हर हाल में जरूरी है. उन्होंने कहा कि अपने-अपने बच्चों को उच्च से उच्च तालीम दिलाने पर जोर दें. जब तालीम बेहतर होगा तब जीवन में खुशहाली आएगी. मौलाना मुफ्ती सोहराब आलम नदवी कहा कि शादी में दहेज लेना हराम है. सरकार ने भी दहेज प्रथा पर रोक लगा रखी है. कहा कि समाज के बेटी की रक्षा के लिए हम सभी को आगे आना पड़ेगा. बेटी अल्लाह की नेमत और रहमत है. इसलिए बेटा और बेटी से एक समान मोहब्बत करना चाहिए. कहा कि मां के कदमों में जन्नत है. बाप जन्नत का दरवाजा है. इसलिए मां बाप का खिदमत व एहतराम करें. उनका दिल को न दुखाएं. कहा कि दूसरे की बुराई करने से बचे, पड़ोसियों का ख्याल रखें. किसी को भी कोई कष्ट ना पहुंचाएं. मुखिया प्रतिनिधि मकसूद मसन जलसा की अध्यक्षता एवं नाजिम ए जलसा मौलवी रूस्तम समीर नेपाली संचालन कर रहे थे. कार्यक्रम में मौलाना मुफ्ती सोहराब साहब के अलावे मौलाना जईम अहमद रहमानी, शायर ए इस्लाम असजद दरभंगवी, एहतेशाम अल हुसैनी, हिफजूल रहमान, शादुल्लाह अता, मदरसा कमेटी के अध्यक्ष मास्टर अबूजर गफ्फारी, प्रिसिंपल शादुल्लाह रहमानी, सचिव अब्दुल रकीब उर्फ पिंकु, जनाब हाफिज रागिब साहब, कारी साहिद साहब, मौलाना रफीक साहब, मौलाना कारी एनायतुल्लाह, मौलाना मोबारक मजरी, मौलाना नोमान, मौलाना सवान, मो सगीर, डा सादिक, मो नुरुद्दीन, मो साबीर, मो मोजाहिद उर्फ हीरा, मो रब्बान, जियाउल हक, नौशाद आलम उर्फ पप्पू, शरीफ मास्टर, मो इजहार, मो हारूण, मो कलीम, मो तमीजउद्दीन, मो नईम सहित सैकड़ों लोग मौजूद थे.

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