पछुवा हवा ने बढ़ाई ठिठुरन, जिले में शीतलहर जैसे हालात
ठंड के मौसम में बच्चों को हमेशा गर्म कपड़ों में रखें : डॉ हरिशंकर
– धुंध, कनकनी और तेज ठंड से जनजीवन प्रभावित, अलाव बना लोगों का सहारा – जिले में पछुवा हवा से बढ़ी ठंड – कनकनी से जनजीवन प्रभावित – अलाव बना सहारा, दोपहर तक नहीं हुए सूर्यदेव के दर्शन सुपौल. जिले में शुक्रवार को मौसम ने अचानक करवट ली. पछुवा हवा के प्रभाव से ठंड में तेज इजाफा दर्ज किया गया, जिससे पूरे जिले में शीतलहर जैसे हालात बन गए. सुबह से ही ठंडी हवा के झोंकों और हल्की कनकनी ने लोगों को परेशान कर दिया. हालात ऐसे रहे कि आवश्यक कार्य से बाहर निकलने वालों को भी खासा दिक्कतों का सामना करना पड़ा, जबकि अधिकांश लोग घरों में दुबके रहे. दिन की शुरुआत घने कोहरे और धुंध के साथ हुई. सुबह के समय दृश्यता काफी कम रही, जिससे सड़क यातायात प्रभावित हुआ. दोपहर तक सूर्यदेव के दर्शन नहीं हो सके. बादलों की चादर और लगातार बह रही पछुवा हवा के कारण तापमान में गिरावट महसूस की गई और ठंड का असर दिनभर बना रहा. सुबह-शाम ज्यादा चुभन भरी ठंड मौसम विशेषज्ञों के अनुसार पछुवा हवा के सक्रिय होने से उत्तर भारत के मैदानी इलाकों में ठंड बढ़ती है, जिसका असर सीमावर्ती जिलों तक देखने को मिलता है. सुपौल जिला भी इससे अछूता नहीं रहा. लोगों का कहना है कि बीते कुछ दिनों की तुलना में शुक्रवार को ठंड अधिक चुभन भरी रही. हल्की हवा के साथ कनकनी ने शरीर में सिहरन पैदा कर दी. बुजुर्गों और बच्चों को सबसे अधिक परेशानी हुई. लोग ऊनी कपड़े, मफलर और टोपी का सहारा लेते नजर आए. अलाव बना ठंड से राहत का जरिया बढ़ती ठंड को देखते हुए शहर और ग्रामीण इलाकों में अलाव लोगों के लिए सहारा बने. प्रमुख चौराहों, बस स्टैंड, रेलवे स्टेशन, बाजारों और ग्रामीण क्षेत्रों में सुबह से ही अलाव जलते नजर आए. ठेले-खोमचे लगाने वाले, रिक्शा चालक, मजदूर और राहगीर अलाव के आसपास जुटकर ठंड से राहत पाने की कोशिश करते दिखे. ग्रामीण इलाकों में चौपालों और घरों के सामने अलाव जलाए गए. लोग आग तापते हुए आपसी बातचीत करते नजर आए. कई जगहों पर लकड़ी, उपले और सूखे पत्तों से अलाव जलाया गया. ठंड के कारण देर शाम तक सड़कों पर चहल-पहल कम रही. यातायात और स्वास्थ्य पर असर सुबह के समय धुंध और ठंडी हवा के कारण राष्ट्रीय राजमार्ग समेत ग्रामीण सड़कों पर वाहन धीमी गति से चलते नजर आए. खासकर दोपहिया वाहन चालकों को अधिक परेशानी हुई. ठंड बढ़ने के साथ ही स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं की आशंका भी बढ़ गई है. चिकित्सकों के अनुसार अचानक ठंड बढ़ने से सर्दी-खांसी, जुकाम, बुखार और सांस संबंधी दिक्कतें हो सकती हैं. बुजुर्गों, बच्चों और पहले से बीमार लोगों को विशेष सावधानी बरतने की सलाह दी गई है. किसानों की बढ़ी चिंता मौसम में आए बदलाव का असर किसानों पर भी पड़ सकता है. ठंड बढ़ने से रबी फसलों पर मिश्रित प्रभाव देखने को मिल सकता है. किसानों का कहना है कि यदि ठंड इसी तरह बनी रही और धूप नहीं निकली तो सब्जियों व दलहनी फसलों को नुकसान हो सकता है. मौसम जानकारों के अनुसार पछुवा हवा के चलते आने वाले दिनों में भी ठंड का असर बना रह सकता है. सुबह और शाम के समय ठंड ज्यादा महसूस होने की संभावना है. लोगों को सतर्क रहने और ठंड से बचाव के सभी उपाय अपनाने की सलाह दी जा रही है. ठंड के मौसम में बच्चों को हमेशा गर्म कपड़ों में रखें : डॉ हरिशंकर सदर अस्पताल में कार्यरत शिशु रोग विशेषज्ञ डॉ. हरिशंकर ने कहा कि ठंड के मौसम में बच्चों को हमेशा गर्म कपड़ों में रखें, खासकर सिर, कान, हाथ और पैरों को ढककर रखे. सुबह और देर शाम बच्चों को ठंडी हवा में बाहर ले जाने से बचें. नवजात शिशुओं को सीधे ठंडी हवा के संपर्क में न लाएं और कमरे को हल्का गर्म रखे.
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