आइआइएसएफ में भाग लेकर चंदन ने क्षेत्र का बढ़ाया गौरव

सुपौल अभियंत्रण महाविद्यालय के डीन एकेडेमिक एवं सहायक प्राध्यापक (ईसीई) डॉ चंदन कुमार ने इंडियन इंटरनेशनल साइंस फेस्टिवल में भाग लेकर संस्थान एवं क्षेत्र का गौरव बढ़ाया है.

चंडीगढ़ के पंचकूला में आयोजित हुआ था इंडियन इंटरनेशनल साइंस फेस्टिवल

डॉ चंदन ने अपने शोध कार्य हैंड हेल्ड सेंसर डिवाइस की दी प्रस्तुति

सुपौल. सुपौल अभियंत्रण महाविद्यालय के डीन एकेडेमिक एवं सहायक प्राध्यापक (ईसीई) डॉ चंदन कुमार ने इंडियन इंटरनेशनल साइंस फेस्टिवल में भाग लेकर संस्थान एवं क्षेत्र का गौरव बढ़ाया है. यह विज्ञान महोत्सव छह से नौ दिसंबर तक चंडीगढ़ के पंचकूला में आयोजित हुआ. कार्यक्रम का उद्घाटन भारत सरकार के विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्री डॉ जितेंद्र सिंह ने किया. आइआइएसएफ के अंतर्गत आयोजित यंग साइंटिस्ट कॉन्फ्रेंस में डॉ चंदन कुमार ने अपने शोध कार्य हैंड हेल्ड सेंसर डिवाइस की प्रस्तुति दी, जिसे वैज्ञानिक समुदाय द्वारा सराहा गया. उनका यह शोध कार्य विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में उपयोगी, किफायती और भविष्य की आवश्यकताओं के अनुरूप बताया गया. प्रस्तुति के दौरान देश भर से आए वैज्ञानिकों, प्रोफेसरों, उद्योग विशेषज्ञों एवं शोधार्थियों ने डॉ कुमार से चर्चा की और उनके प्रयासों की प्रशंसा की.

सम्मेलन के दौरान डॉ कुमार ने विभिन्न वैज्ञानिक गतिविधियों में सक्रिय सहभागिता दर्ज कराई तथा विद्यालयों से आए छात्रों से संवाद स्थापित कर उन्हें विज्ञान, नवाचार और शोध की दिशा में प्रेरित किया. उन्होंने छात्रों को उपलब्ध वैज्ञानिक संसाधनों का उपयोग कर नयी तकनीकों के विकास के लिए प्रोत्साहित किया. सुपौल कॉलेज ऑफ इंजीनियरिंग के प्राचार्य डॉ एएन मिश्रा ने डॉ. चंदन कुमार की इस उपलब्धि पर बधाई देते हुए कहा कि आइआइएसएफ में सहभागिता एवं शोध प्रस्तुति हमारे संस्थान के लिए गौरव की बात है. ऐसे प्रयास ना केवल कॉलेज की शैक्षणिक गुणवत्ता को मजबूत करते हैं, बल्कि छात्रों में शोध संस्कृति को भी बढ़ावा देते है. डॉ मिश्रा ने कहा कि संस्थान सदैव अपने प्राध्यापकों एवं शोधकर्ताओं को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय मंचों पर भागीदारी के लिए प्रोत्साहित करता रहा है और डॉ कुमार की यह उपलब्धि अन्य प्राध्यापकों एवं छात्रों के लिए प्रेरणादायक है. संस्थान के मीडिया प्रभारी कमर तबरेज ने बताया कि आइआइएसएफ में सुपौल कॉलेज ऑफ इंजीनियरिंग का यह प्रतिनिधित्व ना केवल संस्थान को राष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाता है बल्कि क्षेत्र में वैज्ञानिक सोच तथा नवाचार को प्रोत्साहन देने की दिशा में भी महत्वपूर्ण कदम है.

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