तीन दिनों में भीमनगर बाजार में डेढ़ करोड़ रुपये का बाजार पर पड़ा असर वीरपुर. नेपाल में पिछले तीन दिनों से जारी राजनीतिक उथल-पुथल और अराजकता की स्थिति का सीधा असर सीमावर्ती भारतीय इलाकों पर भी पड़ रहा है. हालात को देखते हुए भारत-नेपाल सीमा को आदेशानुसार अगले आदेश तक सील कर दिया गया है. सीमा बंद होने से आवागमन पूरी तरह ठप हो गया है, जिसका सबसे बड़ा असर गुरुवार को भीमनगर बाजार में देखने को मिला. गुरुवार को भीमनगर बाजार पूरी तरह सुनसान नजर आया. दुकानदार सुबह से शाम तक ग्राहकों का इंतजार करते रहे, लेकिन सीमा सील होने के कारण नेपाल से एक भी खरीदार बाजार नहीं पहुंच सके. इससे यहां का कारोबारी माहौल बुरी तरह प्रभावित हुआ. भीमनगर व्यापार संघ के अध्यक्ष सत्येंद्र सिंह ने बताया कि तीन दिन से नेपाल में जारी अशांति का असर सीधे-सीधे व्यापार पर पड़ रहा है. उन्होंने कहा कि गुरुवार को नेपाल से एक भी ग्राहक नहीं आया, जिससे बाजार को लगभग 1.5 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ है. अगर यही स्थिति आगे भी बनी रही तो व्यापारियों को कारोबार छोड़कर दूसरी जगह पलायन करने की नौबत आ सकती है. वहीं, स्थानीय व्यापारी सत्यदेव साह, राजेश भगत, मनोज भगत, नीरज सिंह, अरुण साह, श्यामसुंदर साह, उमेश मेहता और गौरीशंकर ने भी हालात पर गहरी चिंता जताई. उनका कहना है कि तीन दिनों की इस अराजक स्थिति ने सीमावर्ती व्यापार को हिला दिया है. आमतौर पर रोजाना नेपाल से बड़ी संख्या में ग्राहक भीमनगर बाजार में खरीदारी करने आते हैं, लेकिन गुरुवार को पूरा दिन बाजार में सन्नाटा पसरा रहा. व्यापारियों का मानना है कि हालात तब तक नहीं सुधर सकते जब तक नेपाल में स्थायी नई सरकार का गठन नहीं हो जाता और स्थिति सामान्य नहीं होती. सभी की निगाहें नेपाल की राजनीतिक परिस्थितियों पर टिकी हैं. सीमावर्ती लोग उम्मीद लगाए बैठे हैं कि जल्द ही स्थिरता लौटेगी, जिससे दोनों देशों के बीच व्यापार और आपसी आवागमन फिर से सामान्य हो सकेगा. नेपाल की अराजकता से प्रभावित यह इलाका फिलहाल भय और असमंजस के माहौल में जी रहा है. दुकानदारों का कहना है कि अगर स्थिति शीघ्र नहीं सुधरी तो यहां का आर्थिक ढांचा पूरी तरह चरमरा जाएगा. बॉर्डर बंद, वतन लौटने के लिए घंटों कतार में खड़े रहे लोग पड़ोसी राष्ट्र नेपाल में जारी राजनीतिक अस्थिरता का गुरुवार चौथा दिन रहा. स्थिति बिगड़ने के चलते सुपौल जिले के भारत-नेपाल सीमावर्ती भीमनगर बॉर्डर लगातार दूसरे दिन बंद रहा. इससे दोनों ओर से आवागमन प्रभावित हुआ और अपने-अपने वतन लौटने को लोग घंटों कतार में खड़े दिखे. गुरुवार सुबह करीब 11 बजे बॉर्डर पर भारतीय साधु-संतों सहित बड़ी संख्या में लोग फंसे रहे. इनमें हरियाणा से आए बाबा रामपाल नाथ भी शामिल थे, जो अपनी 12 सदस्यीय टोली के साथ काठमांडू के पशुपतिनाथ मंदिर जाने निकले थे. बाबा रामपाल ने बताया कि पिछले चार दिनों से वे नेपाल के सुनसरी जिले के इटहरी और इनरवा में फंसे थे. हालात इतने खराब थे कि खाने तक के लाले पड़ गए और किसी तरह मंदिर में शरण लेकर दिन गुजारना पड़ा. सेना की ओर से शांति बहाल किए जाने के बाद वे किसी तरह भीमनगर तक लौट पाए. इसी तरह, सीतामढ़ी के राजेश प्रसाद अपनी पत्नी सुषमा देवी के साथ नेपाल के धरान गए थे. राजेश ने बताया कि बुधवार तक उन्हें यकीन ही नहीं था कि वे सुरक्षित घर लौट पाएंगे. बार-बार कर्फ्यू लगने और हटने की अफवाहों के बीच उन्हें प्रशासन से विशेष अनुमति लेनी पड़ी. सुषमा देवी ने बताया कि घर या होटल से निकलने तक नहीं दिया जा रहा था, जिससे भारी परेशानी का सामना करना पड़ा. उन्होंने आशंका जताई कि यदि हालात ऐसे ही रहे तो आने वाले पर्व-त्योहार पर लोग अपने घर नहीं लौट पाएंगे. वहीं, बाबाधाम जाने वाले कई श्रद्धालु भी वापस लौटते समय बॉर्डर पर अटक गए. उन्हें दस्तावेज और सामान की जांच के बाद नेपाल जाने की अनुमति दी गई.
डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है
