सुरसर नदी पुल का अप्रोच पथ ध्वस्त, कभी भी हो सकता है बड़ा हादसा, पुल के दोनों सिरों पर है गहरा कटाव

सुपौल के जदिया में सुरसर नदी पुल का अप्रोच पथ ध्वस्त होने से एसएच-91 और एनएच-327 ई को जोड़ने वाली प्रधानमंत्री सड़क पर आवागमन ठप हो गया है. पुल के दोनों ओर गहरा गड्ढा होने से भारी वाहनों का परिचालन बंद है और लोग जान जोखिम में डालकर सफर कर रहे हैं.

जदिया (सुपौल) से उमेश कुमार की रिपोर्ट: कोरियापट्टी पंचायत भवन के समीप एसएच-91 (SH-91) को ठाकुरबाड़ी के पास एनएच-327 ई (NH-327 E) से जोड़ने वाली प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना की महत्वपूर्ण सड़क इन दिनों बदहाली और प्रशासनिक उपेक्षा का दंश झेल रही है. सुरसर नदी पर बने पुल के दोनों ओर का अप्रोच पथ पूरी तरह ध्वस्त हो जाने से इस मार्ग पर आवागमन संकट में पड़ गया है. पुल के दोनों सिरों पर सड़क कटकर बह गई है और कई जगह पिच का हिस्सा हवा में लटका नजर आ रहा है, जिससे यहां कभी भी कोई बड़ा हादसा हो सकता है.

बारिश और नदी के बहाव से खिसकी मिट्टी, पुल हुआ खोखला

स्थानीय ग्रामीणों के अनुसार, पिछले दिनों हुई बारिश और सुरसर नदी के तेज बहाव के कारण पुल के दोनों किनारों की मिट्टी तेजी से खिसकने लगी. देखते ही देखते अप्रोच पथ का एक बड़ा हिस्सा ढह गया. वर्तमान स्थिति यह है कि पुल और सड़क के बीच गहरा गड्ढा बन चुका है. सड़क के नीचे की जमीनी मिट्टी पूरी तरह कट जाने से पुल का किनारा खोखला हो गया है, जिससे अब पुल के अस्तित्व पर भी खतरा मंडराने लगा है.

चारपहिया वाहनों का परिचालन बंद, रात का सफर जानलेवा

सड़क टूटने से सबसे अधिक परेशानी बड़े वाहनों को हो रही है. स्थानीय लोगों ने बताया:

  • यातायात ठप: मोटरसाइकिल और ई-रिक्शा जैसे छोटे वाहन किसी तरह जान जोखिम में डालकर निकल रहे हैं, लेकिन चारपहिया और मालवाहक वाहनों का परिचालन पूरी तरह बंद हो चुका है.
  • सुरक्षा के इंतजाम नहीं: रात के समय इस मार्ग से गुजरना बेहद खतरनाक साबित हो रहा है. इतने संवेदनशील मोड़ पर प्रशासन द्वारा न तो बैरिकेडिंग की गई है और न ही कोई चेतावनी बोर्ड लगाया गया है.
  • संकरी हुई सड़क: एक तरफ पुल के पास गहरा गड्ढा है, तो दूसरी तरफ ग्रामीण पुल पर ही मक्का सुखा रहे हैं, जिससे बची-खुची सड़क और भी संकरी हो गई है.

हजारों की आबादी प्रभावित, किसानों और मरीजों की बढ़ी मुश्किलें

यह सड़क इलाके के हजारों लोगों के लिए जीवनरेखा (लाइफलाइन) मानी जाती है. इसी मार्ग से खूंट, नाढी, ठाकुरबाड़ी समेत आसपास के दर्जनों गांवों के लोग जदिया बाजार, त्रिवेणीगंज और एनएच-327 ई तक पहुंचते हैं. अप्रोच पथ ध्वस्त होने से लोगों को कई किलोमीटर की लंबी दूरी तय करनी पड़ रही है. सबसे ज्यादा परेशानी आपातकालीन मरीजों को अस्पताल पहुंचाने में हो रही है. इसके साथ ही, इन दिनों इलाके में मक्के की फसल तैयार है, लेकिन सड़क टूटने के कारण किसान ट्रैक्टर या मालवाहक वाहनों से अपनी उपज बाजार तक नहीं ले जा पा रहे हैं, जिससे उन्हें आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है.

स्थानीय स्तर पर ‘शोक नदी’ के नाम से कुख्यात है सुरसर

इलाके के बुजुर्गों का कहना है कि सुरसर नदी वर्षों से अपनी धारा बदलने और तेज कटाव के लिए कुख्यात रही है. यह हर साल उपजाऊ जमीन और सड़कों को लील जाती है, यही वजह है कि स्थानीय लोग इसे ‘शोक नदी’ भी कहते हैं. इसके बावजूद प्रशासन द्वारा आज तक यहां कोई स्थाई कटावरोधी कार्य नहीं कराया गया.

ग्रामीणों ने दी आंदोलन की चेतावनी

ग्रामीणों ने संबंधित विभाग और स्थानीय प्रशासन पर घोर लापरवाही का आरोप लगाते हुए कहा कि कई बार गुहार लगाने के बाद भी इस दिशा में कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया है. ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि मानसून की अगली बारिश से पहले तत्काल बैरिकेडिंग, मजबूत अप्रोच पथ का निर्माण और कटावरोधी कार्य शुरू नहीं किया गया, तो पूरी सड़क नदी में विलीन हो जाएगी और लोग उग्र आंदोलन के लिए बाध्य होंगे.

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Published by: Divyanshu Prashant

Divyanshu Prashant is a contributor at Prabhat Khabar.

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