गरमी से मिली थोड़ी राहत परेशानी. ओलावृष्टि से किसानों को हुई भारी क्षति

गुरुवार की देर शाम अचानक हुई ओलावृष्टि व बारिश से आम जीवन अस्त-व्यस्त हो गया है. हालांकि अचानक बारिश व ओलावृष्टि से बढ़ रही गर्मी से लोगों को रात में राहत मिली. सुपौल : सदर प्रखंड व उसके आस-पास के इलाकों में गुरुवार की देर शाम अचानक हुई ओलावृष्टि व बारिश से आम जीवन अस्त-व्यस्त […]

गुरुवार की देर शाम अचानक हुई ओलावृष्टि व बारिश से आम जीवन अस्त-व्यस्त हो गया है. हालांकि अचानक बारिश व ओलावृष्टि से बढ़ रही गर्मी से लोगों को रात में राहत मिली.

सुपौल : सदर प्रखंड व उसके आस-पास के इलाकों में गुरुवार की देर शाम अचानक हुई ओलावृष्टि व बारिश से आम जीवन अस्त-व्यस्त हो गया है. हालांकि अचानक बारिश व ओलावृष्टि से बढ़ रही गर्मी से लोगों को रात में राहत मिली. वहीं ओलावृष्टि से किसानों को काफी क्षति पहुंची है. सबसे ज्यादा असर मूंग, मक्का, गेहूं, आम, लीची व सब्जी की फसलों पर पड़ा है. एक तरफ जहां किसानों द्वारा गेहूं की तैयारी की जा रही है. वहीं खेतों में मूंग व मक्का का फसल खेतों में लगा है.
जिसकी कटाई एक दो सप्ताह में होने वाली थी. ओला गिरने से आम के बगानों पर भी इसका असर पड़ा है. जलवायु परिवर्तन के कारण कोसी के क्षेत्र में अधिकांश आम के बगीचों में एक वर्ष के अंतराल पर आम की पैदावार होती है. लेकिन अचानक इतने बड़े ओले गिरने से आम के बढ़ रहे टिकोले पेड़ से गिर गये हैं. बुजुर्गों की माने तो ओले का आकार इतना बड़ा था कि विगत कई दशक में इतने बड़े गोले कभी नहीं गिरे. एक-एक ओले की साइज ढ़ाई सौ से तीन सौ ग्राम का था. यही वजह रही कि किसानों की फसल को इतनी भारी मात्रा में क्षति पहुंची है. हालांकि ओलावृष्टि से सरकारी तौर पर क्षति के आकलन का अंदाजा अभी नहीं लगाया गया है. किसानों की माने तो विगत कुछ दिनों में हुई ओलावृष्टि से जिले के हजारों हेक्टेयर भूमि पर लगी फसल प्रभावित हुई है.
विगत कई वर्षों में नहीं गिरे इतने बड़े ओले
सदर प्रखंड के वीणा निवासी 92 वर्षीय किसाना शीलानाथ मिश्र, पिपरा प्रखंड के पथरा दक्षिण निवासी 85 वर्षीय किसान बलदेव मंडल, परमेश्वरी साह, योगेंद्र यादव आदि ने बताया कि आज तक इतने बड़े ओले गिरते हमलोगों ने अपने जिंदगी में कभी नहीं देखे. बताया कि ओलावृष्टि से सबसे ज्यादा नुकसान मूंग, मक्का, आम, लीची व सब्जियों की फसल पर पड़ा है. मूंग व मक्का की फसल की कटाई का समय आ गया था. लेकिन अचानक हुई ओलावृष्टि से जहां मूंग के पौधा का दाना खेत में झड़ गया है. वहीं मक्का के पौधे में लगा बाली को भी काफी नुकसान पहुंचा है. आम व लीची के पेड़ में लगा फल भी ओलावृष्टि के कारण टूट कर गिर गया है.
किसानों का कहना है कि प्रकृति के इस प्रकोप के कारण किसानों के सामने आर्थिक संकट उत्पन्न हो गया है. लगातार हो रही ओलावृष्टि का सबसे ज्यादा नुकसान किसानों को फसल के रूप में उठाना पड़ा है. क्योंकि इससे पूर्व भी दो बार इस तरह की आंधी बारीश व ओलावृष्टि हो चुकी है. जिसमें किसानों को सबसे ज्यादा नुकसान गेहूं के फसल के रूप में उठाना पड़ा था.

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