चिराग तले अंधेरा वाली कहावत हो रही चरितार्थ
सुपौल : स्वच्छ भारत अभियान हो या लोहिया स्वच्छता अभियान, केंद्र से लेकर राज्य सरकार तक लोगों को शौचालय निर्माण के लिए प्रेरित कर रही है. खुले में शौच करने वालों पर नकेल कसने व अभियान की सफलता के लिए तो बकायदा राज्य सरकार ने पूरा खाका तैयार कर लिया है. चिह्नित पंचायतों में टास्क फोर्स खुले में शौच करने वालों की निगरानी करती है और लोगों से जुर्माना भी वसूला जाता है, लेकिन जिस प्रखंड कार्यालय पर इस अभियान की सफलता का दारोमदार रहता है, वहां हालात चिराग तले अंधेरा वाले हैं. क्योंकि अधिकारियों के लिए यहां उनके कार्यालय वेश्म में शौचालय उपलब्ध है
लेकिन आम लोग खुले में शौच करने को विवश हो जाते हैं. दरअसल सदर प्रखंड कार्यालय परिसर में कुल 07 सार्वजनिक शौचालय बने हैं. इसमें दो शौचालय का निर्माण करीब एक माह पूर्व ही मनरेगा भवन के समीप कराया गया है. लेकिन बदइंतजामी का आलम यह है कि इनमें से एक भी शौचालय ऐसा नहीं है, जो आम लोगों के लिए चालू अवस्था में हो. शौचालयों पर लटका ताला और पुराने शौचालयों में उगे झाड़ प्रशासन की संजीदगी की पोल खोलते नजर आ रहे हैं. इस बीच वजह चाहे जो भी हो, परेशानी आम लोगों को ही झेलनी पड़ती है.
…केवल भवन निर्माण से सफल होगा अभियान: प्रखंड कार्यालय परिसर में गत माह निर्मित दो शौचालयों के अतिरिक्त पूर्व से ही निर्मित शौचालयों पर भी ताला लटका रहता है.
आलम यह है कि इन शौचालयों में कई पेड़-पौधे और झाड़ उग आये हैं. जानकार बताते हैं कि लंबे समय से प्रयोग में नहीं लाये जाने के कारण इन शौचालयों की स्थिति अब दयनीय हो गयी है और अब यह उपयोग लायक भी नहीं रह गये हैं. यहां दिलचस्प यह है कि राज्य सरकार की सात निश्चय योजना में घर-घर शौचालय को सर्वोच्च प्राथमिकता पर रखा गया है. जिसमें शौचालय निर्माण के लिए लोगों को प्रोत्साहन राशि का भुगतान भी किया जाता है. इसके अतिरिक्त सरकार की योजना पंचायतों में भी सार्वजनिक शौचालय निर्माण की है. ऐसे में सवाल अहम हो चला है कि क्या केवल भवन निर्माण मात्र से स्वच्छ भारत अभियान या लोहिया स्वच्छता अभियान सफल हो जायेगा.
प्रखंड परिसर में कई कार्यालय है संचालित: प्रखंड कार्यालय परिसर में बीडीओ व अंचल अंचल कार्यालय सहित मनरेगा कार्यालय, प्रखंड आपूर्ति शाखा, सदर पीएचसी, आरटीपीएस काउंटर, जिला उद्योग कार्यालय, श्रम कार्यालय आदि संचालित हैं. आरटीपीएस काउंटर पर विशेष तौर पर वृद्धा पेंशन, जाति, आवासीय, आय, दाखिल-खारिज, भूस्वामित प्रमाण पत्र, राशन कार्ड, जन्म प्रमाण पत्र, मृत्यु प्रमाण पत्र, कन्या विवाह योजना लाभ आदि से संबंधित आवेदन जमा करने रोजना सैकड़ों आवेदकों की भीड़ जुटती है. सबसे अधिक परेशानी कन्या विवाह से संबंधित आवेदन करने वाले महिलाओं को होती है, क्योंकि आवेदन करने के लिए दो से तीन घंटे का समय आरटीपीएस काउंटर पर बिताना पड़ता है. इस दौरान जरूरत होने पर आवेदकों की परेशानी और अधिक बढ़ जाती है.
महिलाओं को होती है सबसे अधिक परेशानी
प्रखंड कार्यालय परिसर में शौचालय पर लटका ताला आम लोगों के लिए परेशानी का सबब बना हुआ है. दरअसल काफी चहल-पहल रहने के कारण यहां शौच के लिए सुरक्षित जगह तलाशना भी मुश्किल होता है. ऐसे में सबसे अधिक परेशानी महिलाओं को होती है.महिलाओं को जरूरत पड़ने पर नगर परिषद द्वारा शहर के अन्य इलाकों में निर्मित सार्वजनिक शौचालय का रुख करना पड़ता है. गौरतलब है कि सदर प्रखंड कार्यालय से शहर के किसी भी सार्वजनिक शौचालय की दूरी न्यूनतम एक किमी है, जो महिलाओं की परेशानी को और भी अधिक बढ़ाने वाला है. लोगों की मानें तो कई बार आशय की शिकायत करने के बावजूद प्रशासन का रवैया काफी लचर रहा है. वही प्रखंड कार्यालय के कई कर्मी भी दबी जुबान शौचालय बंद रहने से होने वाली परेशानी की बात कबूलते हैं. जाहिर है, स्वच्छता अभियान की सफलता तभी संभव है, जब प्रशासन वास्तव में इसके प्रति संजीदा हो और इसके लिए पहल सर्वप्रथम अपने कार्यालय से ही करनी होगी.
लोगों की सुविधा हेतु प्रखंड कार्यालय परिसर में शौचालय का निर्माण कराया गया है. अगर कार्यालय परिसर स्थित शौचालय बंद रहता है तो इसकी शिकायत विभागीय अधिकारियों से की जायेगी. शौचालय का लोग उपयोग कर सकें, इसके लिए समुचित प्रयास किया जायेगा.
मिलन देवी, प्रखंड प्रमुख, सुपौल सदर
गार्ड रूम के पीछे एक शौचालय चालू अवस्था में है. शेष पुराने शौचालयों में जलापूर्ति की समस्या है. मनरेगा वाले शौचालय बंद रहने की बाबत जानकारी नहीं है. शीघ्र ही इन शौचालयों को चालू करा लिया जायेगा.
आर्य गौतम, सदर बीडीओ, सुपौल
