खुशहाल जीवन के लिए स्वच्छता बहुत जरूरी
सुपौल : स्वच्छता स्वतंत्रता से ज्यादा जरूरी तथा खुशहाल जीवन की आधारशीला है. स्वच्छता के सात आयाम को अपनाकर पंचायत को निर्मल ग्राम पंचायत बनाया जा सकता है. स्वच्छता बेहतर जिंदगी जीने का माध्यम है. उक्त बातें जिला मुख्यालय स्थित बीबीसी कॉलेज में आयोजित पांच दिवसीय समुदाय संचालित संपूर्ण स्वच्छता प्रशिक्षण कार्यशाला का विधिवत उद्घाटन […]
सुपौल : स्वच्छता स्वतंत्रता से ज्यादा जरूरी तथा खुशहाल जीवन की आधारशीला है. स्वच्छता के सात आयाम को अपनाकर पंचायत को निर्मल ग्राम पंचायत बनाया जा सकता है. स्वच्छता बेहतर जिंदगी जीने का माध्यम है. उक्त बातें जिला मुख्यालय स्थित बीबीसी कॉलेज में आयोजित पांच दिवसीय समुदाय संचालित संपूर्ण स्वच्छता प्रशिक्षण कार्यशाला का विधिवत उद्घाटन करते हुए उप विकास आयुक्त अखिलेश कुमार झा ने कही. जिला जल एवं स्वच्छता समिति के मार्ग दर्शन व बीबीसी ट्रस्ट द्वारा संचालित प्रशिक्षण कार्यशाला को संबोधित करते हुए उप विकास आयुक्त ने कहा कि स्वच्छ,
सुंदर और खुशहाल भारत बनाने के लिए 125 करोड़ भारतीय को स्वच्छता अभियान की जिम्मेदारी उठानी होगी. तभी राज्य और केंद्र सरकार का सपना साकार हो सकता है. कहा कि गंदगी के कारण 80 प्रतिशत लोग बीमार पड़ते हैं. जल, स्वच्छता और स्वास्थ्य के बीच घनिष्ट संबंध है. इसीलिए स्वच्छता के बिना बेहतर जीवन व स्वास्थ्य की कल्पना संभव नहीं है. स्वच्छ भारत मिशन व लोहिया स्वच्छ बिहार अभियान को सफल बनाने के लिए दिल और दिमाग से जुड़कर जमीनी स्तर पर कार्य करने की जरूरत है. “स्वच्छता है जहां, जिंदगी है वहां ”
स्वच्छता के लिए व्यवहार परिवर्तन जरूरी
बीबीसी ट्रस्ट मुख्य संरक्षक -सह- प्रशिक्षक डॉ अमन कुमार ने कहा कि एक ग्राम मानव मल में दस लाख वायरस, एक लाख बैक्टीरिया, एक हजार परजीवी सिष्ट एवं सौ परजीवी अंडे पाए जाते है. स्वच्छता अभियान नहीं राष्ट्रव्यापी आंदोलन है. यह आजादी की दूसरी लड़ाई है. स्वच्छता का सीधा संबंध खान-पान, वेश-भूषा और आस-पास से है. स्वच्छ भारत मिशन का उद्देश्य 2019 तक में खुले में शौच मुक्त भारत बनाना है. व्यवहार में परिवर्तन लाकर स्वच्छ भारत बनाया जा सकता है. डॉ कुमार ने कहा कि खुले में शौच मुक्त भारत बनाने की दिशा में स्वच्छता कर्मी के साथ-साथ हर भारतीय को संकल्प लेना होगा. बीबीसी ट्रस्ट के संस्थापक सचिव स्वाति साधना ने कहा कि खान-पान, रहन-सहन, घर-द्वार आदि के मामले में गरीब अमीर में फर्क है. लेकिन इज्जत सबका एक समान है. महिलाओं के मान-सम्मान और सामाजिक प्रतिष्ठा के लिए शौचालय अति आवश्यक है . कहा कि “गहना जेवर रूप शृंगार शौचालय बिना सब बेकार ” इस अवसर पर संरक्षक सुधीर मिश्र, डॉ. पूनम भारती,रामविलास यादव, जितेंद्र कुमार झा, प्रीतम कुमार चौधरी, अमलेश कुमार झा, ललन कुमार झा, प्रकाश कुमार लालू, शिवशंकर जी, सुभाष कुमार सुमन, राज कुमार साह, सबीना खातून आदि मौजूद थे.