नगर निकाय चुनाव. प्रशासन ने कसी कमर
नगर निकाय चुनाव की तिथि का एलान होने के बाद नगर परिषद सहित जिले के वीरपुर व निर्मली नगर पंचायत में संभावित प्रत्याशी अपनी जोर आजमाइश में जुट चुके हैं.
सुपौल : राज्य निर्वाचन आयोग ने नगर निकाय चुनाव की तिथि का एलान कर दिया है. जिसके बाद से नगर परिषद सहित जिले के वीरपुर व निर्मली नगर पंचायत में संभावित प्रत्याशी अपनी जोर आजमाइश में जुट चुके हैं. खास बात यह है कि निकाय चुनाव में नामांकन के लिए किन दस्तावेजों की आवश्यकता होगी, इसकी स्पष्ट जानकारी प्रत्याशियों को न के बराबर है. इस बीच पार्षद सीट के बदले आरक्षण रोस्टर ने प्रत्याशियों की परेशानी और भी बढ़ा दी है. सबसे ज्यादा परेशान वैसे पार्षद हैं,
जो इस बार अपनी जीत पक्की मान कर चल रहे थे. लेकिन आरक्षण रोस्टर ने सारा खेल खराब कर दिया और अब मैदान पर बल्ला चलाने के लिए ये पार्षद किसी अन्य पिच की तलाश कर रहे हैं. जानकार बताते हैं कि नये पिच की तलाश यूं तो उस वक्त ही आरंभ कर दी गयी थी, जब आरक्षण रोस्टर में बदलाव संबंधी प्रस्ताव निर्वाचन आयोग को भेजा गया था.
लेकिन कुछ पार्षद ऐसे हैं जो अपना चुनाव क्षेत्र चयन करने के मामले में अभी भी अशमंजश में हैं. जबकि कुछ पार्षदों ने बकायदा अपने वार्ड से अधिक अन्य वार्डों में समय बिताना और लोगों को अपने पक्ष में करने की पूरी जोर आजमाइश भी आरंभ कर दी है. इसके अलावा कई ऐसे लोग भी हैं जो अपनी दावेदारी प्रबल मान कर चल रहे हैं. यही कारण है कि जैसे-जैसे नामांकन की तिथि नजदीक आती जा रही है, वार्ड के गलियारों में चुनावी चर्चा तेज है. इस बीच जगह-जगह भोज और समर्थकों के माध्यम से चुनाव प्रचार का दौर भी आरंभ हो चुका है.
मतदाता भी मौके की नजाकत को जानते हैं. लिहाजा संभावित प्रत्याशियों के समक्ष अपने पत्ते खोलने से कतरा रहे हैं. हालांकि बोल-भरोस देने का सिलसिला जारी है. वही प्रशासन ने भी चुनाव के मद्देनजर कमर कस ली है. बकायदा जिला प्रशासन द्वारा विभिन्न कोषांगों का गठन कर लिया गया है. वही चुनाव संबंधी सूचना भी शीघ्र सार्वजनिक करने की तैयारी चल रही है.
नामांकन के पूर्व दाखिल करने होंगे ये दस्तावेज : निर्वाचन हेतु नामांकन के लिए अभ्यर्थी को मतदाता के रूप में अंकित रहने संबंधी उद्घोषणा करनी होगी. वही किसी न्यायालय द्वारा दोष सिद्धि अथवा लंबित आपराधिक मामलों की उद्घोषणा, एससी, एसटी अथवा ओबीसी का जाति प्रमाणपत्र, निर्वाचन आयोग द्वारा निर्दिष्ट विवरण, परिसंपत्तियां, देनदारी व शैक्षणिक योग्यता आदि से संबंधित शपथपत्र भी दाखिल करना होगा. इसके अलावा नगर पंचायत के सामान्य अभ्यर्थियों के लिए 400 रुपये व नगर परिषद के लिए 1000 रुपये का सरकारी चालान अथवा नाजिर रसीद जमा कराना होगा.
जबकि एससी/एसटी, पिछड़ा वर्ग तथा महिलाओं को चालान अथवा नाजिर रशीद में 50 फीसदी की छूट दी गयी है. एक से अधिक सेट में नामांकन के लिए भी एक बार ही राशि ली जायेगी. अंतिम दिन अपराह्न 03 बजे के बाद नामांकन पत्र दाखिल नहीं लिया जायेगा. जबकि इससे पूर्व निर्वाची पदाधिकारी स्वयं नामांकन पत्र प्राप्त नहीं करेंगे. नामांकन पत्र में मतदाता सूची के विवरण से निर्वाची पदाधिकारी स्वयं संतुष्ट होंगे. जबकि यहां लिपिकीय भूल सुधार के लिए आदेश का भी उन्हें अधिकार होगा. अभ्यर्थियों को अधिकतम दो सेट में नामांकन की अनुमति होगी.
अयोग्य व्यक्तियों का नहीं लिया जायेगा नामांकन
निर्वाचन आयोग के सचिव दुर्गेश नंदन द्वारा नगर निकाय चुनाव के बाबत सभी जिलाधिकारी सह जिला निर्वाचन पदाधिकारी नगर पालिका को चुनाव के बाबत आदेश जारी किया गया है. जिसमें स्पष्ट किया गया है कि प्रत्येक मतदाता को चुनाव लड़ने का अधिकार है और आरक्षण रोस्टर के अनुरूप वह संबंधित निर्वाचन क्षेत्र से नामांकन दाखिल कर सकता है. छोटी-छोटी बातों के लिए इच्छुक व्यक्ति का नामांकन दाखिल लेने से इनकार नहीं किया जा सकता है.
हालांकि उन्होंने पंचायत चुनाव 2016 का जिक्र करते हुए कहा है कि उस वक्त विस्तृत दिशा-निर्देश में ही स्पष्ट किया गया था कि निर्वाचन अधिकारी अपने अधिकारों का दुरुपयोग करते हुए अथवा जानकारी के अभाव में अविवेकपूर्ण तरीके से कुछ अभ्यर्थियों को लाभ या हानि पहुंचाने के उद्देश्य से नामांकन पत्रों को अस्वीकृत नहीं कर सकता है.
जिसके कारण अनियमितता की शिकायतों में काफी कमी आयी थी. लेकिन इसके परिणाम स्वरूप अयोग्य व्यक्ति भी नामांकन दाखिल करने में सफल रहे. लिहाजा नगर निकाय चुनाव के दौरान निर्वाचन अधिकारी को विशेष सतर्कता बरतने को कहा गया है. कहा है कि बावजूद शिकायत मिलने पर ऐसे अधिकारियों के विरुद्ध आयोग द्वारा संबंधित अधिकारी व कर्मियों के विरुद्ध कठोरतम कार्रवाई की जायेगी. उन्होंने निर्वाची पदाधिकारी को अपने स्तर से सहायक निर्वाची पदाधिकारियों की बैठक कर स्पष्ट निर्देश जारी करने को कहा है.
