गुरुवार की रात्रि थाना क्षेत्र के बलवा पंचायत स्थित लालगंज गांव में छापेमारी कर चोरी की बाइक के साथ एक युवक को गिरफ्तार किया है.
सुपौल : वाहन चोर गिरोह के विरुद्ध अभियान चला रही सदर थाना पुलिस को गुरुवार की रात एक बड़ी कामयाबी हासिल हुई है. सदर थानाध्यक्ष राम इकबाल यादव ने गुप्त सूचना के आधार पर गुरुवार की रात्रि थाना क्षेत्र के बलवा पंचायत स्थित लालगंज गांव में छापेमारी कर चोरी की बाइक के साथ एक युवक को गिरफ्तार किया है.
गिरफ्तार युवक धर्मेंद्र कुमार लालगंज गांव के हरेराम कामत का पुत्र बताया जा रहा है. जो पिपराखुर्द चौक पर मोबाइल सर्विस की दुकान का संचालक है. इस बाबत थानाध्यक्ष ने बताया कि गिरफ्तार युवक का तार बाइक चोरी करने वाले गिरोह के सदस्यों से जुड़ा हुआ है.
चोरी की बाइक के खरीद फरोख्त में इस युवक की महत्वपूर्ण भूमिका बतायी गयी है. गिरफ्तार युवक के पास से बरामद होंडा ड्रीम युगाबाइक भी चोरी का है. जिस पर गलत नंबर बीआर 50डी/3777 का बोर्ड लगा कर यह युवक विगत चार माह से सवारी कर रहा था.
थानाध्यक्ष ने बताया कि वैज्ञानिक अनुसंधान के बाद स्पष्ट हुआ कि जब्त बाइक पर अंकित नंबर किसी ग्लैमर बाइक का है. वहीं गिरफ्तार युवक ने पूछताछ के दौरान चोरी की बाइक खरीदने की बात को स्वीकार किया है.
गिरफ्तार युवक ने बाइक चोर गिरोह के सदस्यों से मेलजोल रहने की बात भी कबूल किया है. थानाध्यक्ष ने बताया कि बाइक चोर गिरोह के अन्य सदस्यों की शिनाख्त हो चुकी है. गिरोह के अन्य सदस्यों की गिरफ्तारी के लिए पुलिस लगातार छापेमारी अभियान चला रही है. शीघ्र ही गिरोह के अन्य सदस्यों को गिरफ्तार कर विगत दिनों थाना क्षेत्र में हो रहे बाइक चोरी की सभी घटनाओं का उद्भेदन करने में पुलिस सफल रहेगी. वहीं गिरफ्तार युवक को न्यायिक हिरासत में भेजा जा रहा है.
15 से 20 हजार में बिकती है चोरी की बाइक : किसी शो रूम में 55 से 90 हजार रुपये में बिकने वाली ग्लेमर, अपाचे, होंडा साइन, ड्रीम युगा जैसी स्टालिश बाइक जिले के चोर बाजार में आसानी से उपलब्ध है. यह खुलासा चोरी की बाइक के साथ गिरफ्तार युवक धर्मेंद्र कुमार ने किया है.
धर्मेंद्र की माने तो लूट व चोरी के बाद अपराधी बाइक को ग्रामीण इलाके में महज 15 से 20 हजार रुपये लेकर बेच देते हैं. चोरी की बाइक को खपाने के दौरान चोर गिरोह के सदस्य तटबंध के अंदर रहने वाले लोगों को खास तबज्जो देते हैं. ऐसी बाइकों की बिक्री के लिए गिरोह के सदस्य खास तौर पर सीधे साधे ग्रामीणों को अपना सेफ टारगेट बनाते हैं.
हालांकि कई बार बिक्री के दौरान खरीदार को चोरी की बाइक रहने की जानकारी भी दे दी जाती है. जिससे खरीदार सावधान रह कर ऐसे बाइक की सवारी करता है. ऐहतियात के तौर पर ऐसे बाइक को जिला मुख्यालय नहीं लाया जाता है. खरीददार तटबंध के अंदर ही सवारी करता है. मीलों दूर फैले तटबंध के भीतर के इलाके में पुलिस की अनुपलब्धता का ही नतीजा है कि सैंकड़ों की संख्या में चोरी की बाइक फर्राटे भर रही है.
जिला मुख्यालय सहित जिले के विभिन्न थाना क्षेत्रों में विगत कुछ माह के दौरान एक दर्जन से अधिक बाइक चोरी की घटना घटित हो चुकी है.
जिला मुख्यालय में खासतौर पर अपराधियों के टारगेट पर पुरानी बाइक रही. सिर्फ व्यवहार न्यायालय परिसर से अब तक आधा दर्जन से अधिक बाइक गायब हो चुके हैं. पुलिस सूत्रों की माने तो अपराधियों का नया नश्ल और नौसिखिये युवा अपराधी बाइक चोरी की घटना को अंजाम दे रहे हैं. अपराधियों के इस थर्ड जेनरेशन का कोई लोकेशन पुलिस के पास नहीं रहने के कारण बाइक चोरी की घटना के बाद पुलिस पदाधिकारी हाथ मलते रह जाते हैं और थ्री जी अपराधी महज कुछ हजार रुपये के लिये एक के बाद बाइक चोरी की घटना को अंजाम देते रहते हैं.
बाइक चोरों के दहशत का आलम व्यवहार न्यायालय में कुछ यूं पसरा हुआ है कि कई अधिवक्ता और न्यायालय कर्मी अब रिक्शा से न्यायालय आना शुरू कर चुके हैं. हालांकि गुरुवार को मिली सफलता के बाद बाइक चोरी की घटना पर अंकुश लगने और थ्री जी अपराधियों के गिरफ्तार होने की संभावना प्रबल हो गयी है.
