सरकार द्वारा जलाये जा रहे अनेकों लाभकारी योजनाओं का हाल बनी हुई है बदतर.
सुपौल : जिले भर में संचालित बाल विकास परियोजना कार्यालय की स्थिति बदतर बनी हुई है. मालूम हो कि कई माह पूर्व जिले के सरायगढ़ भपटियाही प्रखंड क्षेत्र में एक आंगनबाड़ी केंद्र पर फरजी प्रमाण पत्र के आधार पर सेविका कार्यरत थी. जहां जांच के बाद उक्त सेविका का शैक्षणिक प्रमाण पत्र फरजी पाते हुए चयनमुक्त किया गया था. इसके उपरांत जिला कार्यक्रम पदाधिकारी ने जिले के सभी सीडीपीओ को आंगनबाड़ी केंद्र पर कार्यरत सेविकाओं के प्रमाण पत्र के सत्यापन कराये जाने का आदेश निर्गत किया है. जिला प्रोग्राम कार्यालय के ज्ञापांक 1069/प्रो दिनांक 10 अगस्त 2016 के द्वारा बाल विकास कार्यालय को निर्गत पत्र में बताया गया है
कि प्रमाण पत्र के सत्यापन में कई और मामले शामिल है. जिसे तीन माह के अंदर चयनित व कार्यरत ऐसे सभी आंगनबाड़ी सेविकाओं का प्रमाण पत्र स्वयं बिहार विद्यालय परीक्षा समिति, बिहार संस्कृत शिक्षा बोर्ड व मदरसा बोर्ड में उपस्थित होकर प्रमाण पत्रों का सत्यापन कराना सुनिश्चित करेंगे. जांच को लेकर सेविकाओं में दहशत का माहौल व्याप्त है.
साथ ही प्रमाण पत्र के सत्यापनोपरांत सीडीपीओ द्वारा यह प्रमाण पत्र भी निर्गत कराना सुनिश्चित करेंगे कि उनके द्वारा स्वयं अभिलेखों का अवलोकन किया गया है. साथ ही बोर्ड द्वारा निर्गत प्रमाण पत्र एवं सत्यापन प्रतिवेदन जिला प्रोग्राम कार्यालय आईसीडीएस को उपलब्ध करावेंगे. ताकि गलत प्रमाण पत्र पर कार्यरत आंगनबाड़ी सेविकाओं पर नियमानुसार कानूनी कार्रवाई की जा सके. वहीं एक माह से अधिक समय बीत जाने के बाद भी कई प्रखंडों में जांच प्रक्रिया भी प्रारंभ नहीं कराया जा सका है.
एक माह से अधिक समय बीत जाने के बाद कई प्रखंडों में जांच प्रक्रिया प्रारंभ नहीं
