सुपौल : अगर मुझे पावर रहता तो स्वास्थ्य विभाग की ऐसी दुर्दशा करने वालों को हथकड़ी लगा कर यहां से ले जाती. लेकिन मैं भी मजबूर हूं. सदर अस्पताल में दलालों का संगठित गिरोह सक्रिय है, जिनके द्वारा यहां आने वाले मरीजों का आर्थिक शोषण किया जा रहा है. यहां काम करने वाले अधिकांश चिकित्सक सेवा भावना छोड़ कर केवल नोट बटोरने के लिए काम कर रहे हैं.
उपरोक्त बातें बुधवार की देर संध्या सदर अस्पताल के निरीक्षण के बाद अस्पताल की व्यवस्था से खिन्न सांसद रंजीत रंजन ने कही. सांसद ने कहा कि स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों के रवैये और अस्पताल की दुर्दशा को देख कर प्रतीत होता है कि भगवान भी ऊपर से आ कर इस अस्पताल को ठीक नहीं कर सकता. अधिकारियों में सरकार या विभाग का कोई भय नहीं रह गया है.निगरानी कमेटी की बैठक में स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी गलत रिपोर्ट पेश करते हैं.अस्पताल की बदतर स्थिति से विभाग के मुख्य सचिव और केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री को अवगत करवाया जायेगा. सांसद ने कहा कि जब तक जिले में स्वास्थ्य व्यवस्था को दुरूस्त नहीं कर दिया जाता वह चुप नहीं बैठेगी.
ज्ञात हो कि बुधवार की संध्या सांसद रंजीत रंजन ने करीब दो घंटे तक सदर अस्पताल का निरीक्षण किया. इस दौरान सांसद अस्पताल के ड्रेसिंग रूम से लेकर ऑपरेशन थियेटर, प्रसव कक्ष सहित विभिन्न वार्डों का अवलोकन किया. इस दौरान ड्रेसिंग रूम से भारी मात्रा में एक्सपायर दवा मिलने से सांसद अचंभित थी. वहीं प्रसव कक्ष में सभी प्रसूताओं के पास बाजार से क्रय की गयी दवा को देख कर सांसद ने सिविल सर्जन डॉ रामेश्वर साफी और सदर अस्पताल के उपाधीक्षक डॉ एनके चौधरी को कड़ी फटकार लगायी. दोनों अधिकारी मरीज के द्वारा 90 प्रतिशत दवा बाजार से खरीदने के सवाल पर चुप्पी साध कर बैठ गये थे.
अधिकारियों को हिदायत देतीं सांसद.
पीएचसी से भी बदतर है सदर अस्पताल : सदर अस्पताल में व्याप्त कुव्यवस्था से खिन्न सांसद श्री मती रंजन ने कहा कि सदर अस्पताल की दशा पीएचसी से भी बदतर स्थिति में है. सांसद ने कहा कि क्षेत्र भ्रमण के दौरान विगत दिनों कुमारखंड, पिपरा और त्रिवेणीगंज रेफरल अस्पताल का औचक निरीक्षण किया गया.लेकिन सभी पीएचसी से ज्यादा बदतर स्थिति सदर अस्पताल सुपौल की है.
