सुरक्षित ठिकाना खोज रहे पीड़ित

परेशानी. छह प्रखंडों के 150 गांव बाढ़ की चपेट में, सभी परेशान जिले के छह प्रखंडों के 150 गांव बाढ़ की चपेट में है. इससे ग्रामीणों की मुश्किलें बढ़ गयी है. पीड़ित सुरक्षित ठिकानों की ओर पलायन कर रहे हैं. सुपौल : जिले के छह प्रखंडों के करीब 150 गांव बाढ़ की चपेट में है. […]

परेशानी. छह प्रखंडों के 150 गांव बाढ़ की चपेट में, सभी परेशान

जिले के छह प्रखंडों के 150 गांव बाढ़ की चपेट में है. इससे ग्रामीणों की मुश्किलें बढ़ गयी है. पीड़ित सुरक्षित ठिकानों की ओर पलायन कर रहे हैं.
सुपौल : जिले के छह प्रखंडों के करीब 150 गांव बाढ़ की चपेट में है. यहां निवास करने वाले लोगों की मुश्किलें कोसी नदी के जल स्तर में वृद्धि के बाद बढ़ गयी है. इन गांवों में सदर प्रखंड के चंदैल, बलवा, गोपालपुर सिरे, तेलवा, डुमरिया, निर्मली, सुकेला, घूरण, घीवक, चकला, डभारी, किसनपुर प्रखंड के बेलागोठ, दिघिया, दुबियाही, मौजहा, सुकमारपुर, सिसौनी, झखराही, नौआबाखर, हांसा, एगडारा, बौराहा, अर्राहा, कमलदाहा, परसामाधो, सरायगढ़-भपटियाही प्रखंड के कोरली, सिमरी, छिटही हनुमान नगर, लौकहा, रूपौली, सिकरहट्टा पलार, मौरा, झहुरा, लगुनियां, बिलंदी, धरहरा, सीतापुर पलार, सिसौनी छीट, सनपतहा,
बनैनियां,भुलिया, ढ़ोली, सियानी आदि सहित निर्मली, मरौना व बसंतपुर प्रखंड के 150 से अधिक गांव शामिल हैं. इन गांवों में निवास करने वाले हजारों लोगों को प्रतिवर्ष बाढ़ की विभिषिका झेलने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है.
बाहर निकलने में बाधक बनी नाव की समस्या: बाढ़ के कहर की वजह से प्रभावित क्षेत्र के लोग अब सुरक्षित स्थानों की ओर पलायन करने लगे हैं. नदी की तेज धारा से किसी प्रकार सुरक्षित बाहर निकले लोगों ने तटबंध व स्परों पर शरण लेना प्रारंभ कर दिया है. जहां उन्हें खुले आकाश के नीचे जीवन बसर करना पड़ रहा है. वहीं हजारों की संख्या में अब भी लोग तटबंध के भीतर फंसे हुए हैं. इन लोगों को बाहर निकलने में सबसे बड़ी समस्या नाव की अनुपलब्धता बनी हुई है. सरकारी स्तर पर पर्याप्त संख्या में नाव नहीं रहने के कारण निजी नाव मालिकों द्वारा बाढ़ पीड़ितों से मनमाना किराया वसूल किया जा रहा है. निजी नाव मालिक के दोहन का शिकार बनने से बेहतर लोग तटबंध के भीतर रहना ही मुनासिब समझ रहे हैं. हालांकि जिला प्रशासन के निर्देश पर संबंधित प्रखंडों में सीओ द्वारा नाव की बहाली की गयी है, लेकिन निगरानी के अभाव में सरकारी नाव के नाविक लोगों की मदद के बजाय अन्य कार्यों में नाव को लगा रखा है. इस वजह से बाढ़ पीड़ितों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है.
174 नाव का हो रहा परिचालन: जिला प्रशासन द्वारा बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में लोगों की सुविधा के लिए मुक्कम्मल व्यवस्था किये जाने के दावे किये जा रहे हैं. बाढ़ प्रभावित प्रत्येक गांव व टोलों में नाव उपलब्ध कराने के साथ-साथ सरकारी स्तर पर राहत उपलब्ध कराने की भी बात बतायी जा रही है, लेकिन हकीकत यह है कि तटबंध के भीतर बाढ़ में फंसे लोग दाने-दाने के लिए मोहताज हैं. जिला प्रशासन द्वारा जिले के बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में 174 नाव का परिचालन किये जाने की बात बतायी गयी है. इनमें 110 सरकारी व 64 निजी नाव शामिल हैं, लेकिन नाव परिचालन के लिए चिन्हित अधिकांश स्थानों पर नाव का परिचालन नहीं हो रहा है. बाढ़ प्रभावित क्षेत्र के लोगों की मानें तो कागज पर भी कई नावों का परिचालन हो रहा है. प्रशासन के इस रवैये की वजह से बाढ़ प्रभावित क्षेत्र के लोगों में असंतोष का माहौल व्याप्त है.
पूर्व विधायक ने डीएम को सौंपा स्मार पत्र
बाढ़ प्रभावित परिवार को राहत सामग्री उपलब्ध कराने की दिशा में पहल करने के लिए पूर्व विधायक सह भाजपा नेता किशोर कुमार मुन्ना ने डीएम को स्मार पत्र सौंपा है. पत्र में कहा गया है कि भाजपा प्रतिनिधि मंडल द्वारा चार अगस्त को बाढ़पीड़ितों को राहत उपलब्ध कराने के लिए 11 सूत्री मांग पत्र सौंपा गया था. सौंपे मांग पत्र के आलोक में डीएम के द्वारा बाढ़ राहत के दिशा में कार्यवाही का आश्वासन दिया गया था. अब तक राहत मुहैया नहीं कराया गया है.

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