वैज्ञानिक पद्धति से करें खेती

तीन फसला जमीन के बावजूद पिछड़े हैं किसान बलुआही मिट्टी में सोना उपजाने के लिए सभी किसानों को वैज्ञानिक तरीके से खेती करना होगा. तीन फसला जमीन रहने के बावजूद लोग आज भी आर्थिक रूप से काफी पिछड़े हैं. सुपौल : प्रत्येक वर्ष छह महीने तक कोसी की विनाश लीला से प्रभावित रहने वाले तटबंध […]

तीन फसला जमीन के बावजूद पिछड़े हैं किसान

बलुआही मिट्टी में सोना उपजाने के लिए सभी किसानों को वैज्ञानिक तरीके से खेती करना होगा. तीन फसला जमीन रहने के बावजूद लोग आज भी आर्थिक रूप से काफी पिछड़े हैं.
सुपौल : प्रत्येक वर्ष छह महीने तक कोसी की विनाश लीला से प्रभावित रहने वाले तटबंध के अंदर पारंपरिक खेती से खुशहाली नहीं आ सकती है. बलुआही मिट्टी में सोना उपजाने के लिए हम सभी किसानों को वैज्ञानिक तरीके से खेती करना होगा.
तीन फसला जमीन रहने के बावजूद हम आज भी आर्थिक रूप से काफी पिछड़े हैं. अगर नयी तकनीक और वैज्ञानिक तरीके से खेती की जाय तो कोसी के युवाओं को रोजगार के लिए भटकना नहीं पड़ेगा.
अपने खेत से ही रोजगार के अवसर पैदा किये जायेंगे. उपरोक्त बातें रविवार को सदर प्रखंड के बैरिया पंचायत स्थित हारुण टोला चकला में आयोजित किसान गोष्ठी का शुभारंभ करते हुए विधान परिषद के उप सभापति हारुण रसीद ने कही. उन्होंने कहा कि किसान की उन्नति से देश की विकास की नीति तय की जाती है. राज्य सरकार विगत कई वर्षों से कृषि क्षेत्र में वैज्ञानिक सोच को शामिल करने की पक्षधर बन कर राज्य के किसानों के हित के लिए प्रयास रत है. खास कर तटबंध के भीतर बसे किसानों को अब वैज्ञानिक सोच के साथ कदम से कदम मिला कर चलना होगा.
तटबंध के भीतर औषधीय खेती की अपार संभावना
किसान गोष्ठी में उपस्थित मुख्य प्रशिक्षक सह कृषि वैज्ञानिक डॉ मनोज कुमार ने गोष्ठी में उपस्थित सैंकड़ों किसानों को वैज्ञानिक तरीके से की गयी उन्नत खेती का उदाहरण बताते हुए कहा कि पारंपरिक खेती के दौरान लगने वाली कुल पूंजी के आधा खर्च में वैज्ञानिक तरीके से खेती कर कई गुणा अधिक मुनाफा कमाया जा सकता है. अभी भी कोसी के इलाके में किसान मात्रा से ज्यादा रासायनिक उर्वरक प्रयोग कर खेत के साथ – साथ पर्यावरण को दूषित कर रहे हैं. किसान गोष्ठी में उपस्थित जिला उद्यान पदाधिकारी ज्ञानचंद ने कहा कि तटबंध के अंदर की भूमि और जलवायु वागवानी लगाने के लिए उपयुक्त है. बांस की खेती सहित विभिन्न किस्मों के पेड़ पौधे का विकास इस भूमि पर कम समय में अधिक होने की संभावना है. वैज्ञानिक पद्धति की खेती के साथ – साथ किसान बागवानी लगा कर बेहतर मुनाफा अर्जित कर सकते हैं.
कृषि गोष्ठी के दौरान उपस्थित अन्य विशेषज्ञों ने वैज्ञानिक पद्धति से करायी जाने वाली किसानी का गुर बताते हुए कहा कि कोसी तटबंध के अंदर औषधीय खेती की अपार संभावनाएं हैं. किसान राज्य सरकार द्वारा मुफ्त प्रशिक्षण प्राप्त कर इस इलाके में औषधीय खेती कर अपने साथ – साथ गांव व इलाके को खुशहाल बना सकते हैं. गोष्ठी के दौरान कृषि विभाग के विशेषज्ञ शिव नाथ झा, मनमोहन झा, जवाहर प्रसाद, कृष्ण कुमार, पशुपति पांडेय, उमेश कुमार सहित समृद्ध किसान विंदेश्वरी सिंह, विनोद माझी, दारेण रसीद, सुबंत सिंह, पंसस ताहीरा परवीण, पिंटू यादव, मो बसर, शाकीम आलम सहित अन्य उपस्थित थे.

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