आस्था. हर्षोल्लास के साथ मनाया जा रहा श्रीकृष्ण जन्मोत्सव
जिले भर में श्रीकृष्ण जन्मोत्सव का त्योहार धूमधाम से मनाया जा रहा है. बुधवार की मध्य रात्रि वैदिक मंत्रोच्चार के साथ स्थापित प्रतिमाओं में प्राण प्रतिष्ठा दिया गया. कई जगहों पर दर्जनों देवी देवताओं की प्रतिमा स्थापित किया गया है. वहीं मंदिर परिसर में रात भर विभिन्न कलाकारों की टोलियों द्वारा धार्मिक व सांस्कृतिक कार्यक्रम की प्रस्तुति दी गयी.
सुपौल : जिले भर में श्रीकृष्ण जन्मोत्सव का त्योहार धूमधाम से मनाया जा रहा है. भादव माह के अष्टमी तिथि को आयोजित होने वाले दो दिवसीय त्योहार को लेकर श्रद्धालुओं में हर्ष व उत्साह का माहौल बना हुआ है. इस त्योहार को लेकर बीते एक सप्ताह पूर्व से ही संबंधित पूजा समितियों द्वारा मंदिर परिसरों की साफ सफाई से लेकर विभिन्न देवी देवताओं की प्रतिमाओं की स्थापना की तैयारी में जुटे थे. वहीं सदर प्रखंड के कर्णपुर गांव में कई दशकों से जन्माष्टमी का त्योहार भव्य तरीके से मनाया जाता रहा है. बुधवार की मध्य रात्रि वैदिक मंत्रोच्चार के साथ स्थापित प्रतिमाओं में प्राण प्रतिष्ठा दिया गया.
साथ ही मूर्तिकार द्वारा बनाये गये विभिन्न देवी देवताओं की प्रतिमाओं का विधान पूर्वक पट खोले जाने का कार्य संपन्न कराया गया. जहां उपस्थित भक्त जनों के द्वारा वृंदावन बिहारी लाल की जय सहित अन्य जयघोष के साथ मंदिर परिसरों में उत्सवी माहौल उपस्थित हो गया. प्रतिमाओं में प्राण प्रतिष्ठा कार्य पूर्ण कराये जाने के बाद पूजा समिति द्वारा प्रसाद का वितरण कराया गया. वहीं मंदिर परिसर में रात भर विभिन्न कलाकारों की टोलियों द्वारा धार्मिक व सांस्कृतिक कार्यक्रम की प्रस्तुति दी गयी.
जन्मोत्सव के मौके पर मटकाफोड़ प्रतियोगिता का आयोजन :
आयोजन समिति के सदस्यों ने बताया कि जन्मोत्सव के मौके पर मंदिर परिसर में शुक्रवार के अपराह्न मटकाफोड़ प्रतियोगिता का आयोजन किया जायेगा. प्रतियोगिता आयोजन को लेकर तैयारी पूरी कर ली गयी है. साथ ही प्रतियोगिता में शामिल होने के लिए 20 सदस्यीय बाल गोपाल के टीमों द्वारा पंजीयन का कार्य कराया जा रहा है. बताया कि मटका फोड़ने वाले टीम के सदस्यों को आयोजन समिति द्वारा पुरस्कृत भी किया जाता है. श्रीकृष्ण के बाल्यकाल में माखन व मटकी का अद्भुत संयोग रहा है. कभी ग्वाल बाल के साथ जबरन माखन खा लेने की कहानी हो या फिर माखन ले जाती गोपियों के मटके के ऊपर कंकड़ फेंकने की कहानी. यह चर्चा प्राणियों को हर्षित कर देता है.
जनमाष्टमी के मौके पर उमड़ती रही है भीड़ : धरती पर प्रेम व स्नेह को परिभाषित करने तथा मानव को अपने कर्म के अनुसार फल मिलने का संदेश देने के लिए सृष्टि के पालनहार भगवान विष्णु के अवतार के रूप में अवतरित हुए. भगवान श्रीकृष्ण के जन्मोत्सव के मौके पर कर्णपुर गांव स्थित श्रीकृष्ण मंदिर परिसर में जिला मुख्यालय सहित आस पास के कई पंचायतों के श्रद्धालु पूजा अर्चना व आराधना करने पहुंचते रहे हैं. वहीं पूजा के मौके पर उपस्थित होने वाले भीड़ के मद्देनजर मंदिर परिसर में सुरक्षा व्यवस्था का पुख्ता इंतजाम कराया गया है.
सार्वजनिक सहयोग से होता रहा है आयोजन
गौरतलब हो कि कर्णपुर गांव स्थित दो स्थानों पर जन्माष्टमी का त्योहार भव्य व आकर्षक तरीके से मनाया जाता रहा है. त्योहार को हर्षोल्लास व धूमधाम के साथ मनाये जाने को लेकर दो दिवसीय त्योहार के मौके पर सप्ताह से अधिक दिनों तक विविध प्रकार के कार्यक्रम का आयोजन करवाया जाता है.
इस वर्ष श्रावणी पूर्णिमा के संध्याकाल से ही बुधवार की देर रात्रि तक श्रीकृष्ण मंदिर उत्तर परिसर में जहां श्रीमद्भागवत कथा की संगीतमय प्रस्तुति करायी गयी. वहीं श्री श्री 108 श्रीकृष्ण मंदिर दक्षिण परिसर में जन्माष्टमी के मौके पर रामलीला का आयोजन कराया गया. वहीं श्रीकृष्ण पूजा के मौके पर उक्त दोनों मंदिर परिसर में गुरुवार व शुक्रवार को सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन कराया जायेगा. उक्त मंदिर परिसर में यह आयोजन दशकों पूर्व से सार्वजनिक सहयोग से कराया जा रहा है.
शेषनाग पर स्थापित श्रीकृष्ण प्रतिमा बना रहा आकर्षण का केंद्र
वैसे तो श्रीकृष्ण पूजा के मौके पर दर्जनों देवी देवताओं की प्रतिमा स्थापित कराया जाता है. लेकिन श्रीकृष्ण पूजा समिति दक्षिण परिसर में कुछ वर्षों से एक विशेष प्रतिमा भी स्थापित करायी जाती रही है. जो इस महोत्सव में श्रद्धालुओं के बीच आकर्षण का केंद्र बना होता है. इस वर्ष उक्त मंदिर में शेषनाग के ऊपर श्रीकृष्ण की प्रतिमा को स्थापित किया गया है.
जो लोगों को यह संदेश दे रहा है कि मानव दृढ़ संकल्पित होकर कोई भी कार्य का शुभारंभ करे तो उसे सफलता अवश्य ही मिलेगी. साथ ही कोई भी कितनी बलशाली क्यूं ना हो. उन्हें अपने कर्मफल भुगतना ही पड़ता है.
त्योहार के मौके पर भव्य मेला का आयोजन : आयोजन समिति द्वारा त्योहार के मौके पर भव्य मेला का आयोजन कराया गया है. जहां मेला के दृश्य को देख बच्चों का उत्साह चरम पर होता है. वहीं मेला घूमने आये श्रद्धालुओं को उचित कीमत पर पूजन सामग्री सहित श्रृंगार व अन्य सामग्रियों उपलब्ध हो जाता है.
एक बड़ी आबादी वाले कर्णपुर गांव में दो स्थानों पर जनमाष्टमी का मेला आयोजित होने से एक दूसरे के बीच प्रतिस्पर्धा की भावना भी जग जाती है. जिस कारण मेला का आकर्षण और भी बढ़ जाता है. वहीं राष्ट्रीय त्योहार के मौके पर विद्यालयों में छुट्टी रहने के कारण बच्चों की टोलियों ने जम कर मेला का लुफ्त उठाया.
