दवा घोटाला : निगरानी जांच की उठने लगी मांग
सुपौल : करोड़ों रुपये के दवा घोटाला मामले में लगातार दूसरे दिन भी जांच टीम में शामिल अधिकारी जब्त दवाओं की सूची तैयार करने में जुटे रहे. हालांकि इस मामले में लीपापोती का खेल शुरू हो चुका है. स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी जांच को प्रथम चरण में ही प्रभावित करने के प्रयास में जुटे हुए […]
सुपौल : करोड़ों रुपये के दवा घोटाला मामले में लगातार दूसरे दिन भी जांच टीम में शामिल अधिकारी जब्त दवाओं की सूची तैयार करने में जुटे रहे. हालांकि इस मामले में लीपापोती का खेल शुरू हो चुका है. स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी जांच को प्रथम चरण में ही प्रभावित करने के प्रयास में जुटे हुए हैं.
बुधवार को जांच टीम बंद कमरे में घोटाले के आरोपी कर्मियों के साथ बैठ कर मनमाने तरीके से जब्त दवाओं की सूची तैयार कर रहे थे. इस दौरान क्षेत्रीय स्वास्थ्य उप निदेशक के प्रतिनिधि सह जांच टीम के वरिष्ठ सदस्य डॉ के के झा कहीं नजर नहीं आ रहे थे. दवा की सूची तैयार कर रहे जांच टीम के स्थानीय सदस्य मीडिया कर्मी सहित अन्य लोगों से परहेज बरत रहे थे. जांच टीम के इस रवैये पर घोटाले मामले के शिकायत कर्ता राजद नेता शमसूल कमर सिद्दीकी ने असंतोष व्यक्त करते हुए कहा कि स्थानीय अधिकारी निष्पक्ष जांच के राह में रोड़े बन रहे हैं.
मामले की निष्पक्ष जांच के लिए दूसरे जिले के अधिकारियों की टीम बहाल करनी होगी. ज्ञात हो कि विगत वर्ष 2012 से लेकर वर्ष 2016 तक जिला स्तर पर दवा की खरीदारी करने के दौरान स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी एवं कर्मियों ने करोड़ों रुपये के घोटालों को अंजाम दिया है. इस मामले में शिकायत मिलने के बाद कोसी प्रमंडल के आयुक्त के आदेश पर जांच टीम का गठन कर दवाओं की सूची तैयार करवायी जा रही है.
अधिकांश बरामद दवा एक्सपायर : मंगलवार को दंडाधिकारी सुशील कुमार मिश्र के नेतृत्व में सदर अस्पताल के औषधी भंडार सहित अन्य कमरों से बरामद ज्यादातर दवा एक्सपायर होकर बरबाद हो रहे हैं. जब्त दवाओं की सूची बनाने में जुटे अधिकारियों ने बताया कि अब तक बनाये गये सूची की सभी दवाएं एक्सपायर हैं. ज्यादातर दवा का एक्सपायरी तिथि इस वर्ष के मार्च व अप्रैल निर्धारित है. खासकर एंटी बायोटिक दवा व आर्युवेदिक दवा पूरी तरह खराब हो चुका है.
वहीं मंगलवार को शौचालय की टंकी से बरामद दवाओं को अभी नहीं निकाला गया है. शौचालय की टंकी में हाल के वर्षों में खरीदे गये ज्यादातर दवा फेके गये हैं. महंगे मूल्य के टेवलेट के साथ – साथ इंजेक्शन व सीरप की बड़ी खेप शौचालय की टंकी में फेंका गया है. जांच टीम में शामिल अधिकारियों ने बताया कि गोदाम की दवाओं की सूची तैयार करने के बाद शौचालय की टंकी से दवा निकालकर सूची तैयार किया जायेगा.
करोड़ों रुपये की दवा घोटाले मामले की प्रथम चरण के जांच में जुटी जांच टीम के मनमाने रवैये को देख कर स्थानीय लोगों में आक्रोश गहराता जा रहा है. सामाजिक कार्यकर्ता विद्यापुरी वार्ड नंबर दो निवासी अनिल कुमार सिंह ने जांच टीम के कार्यशैली पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी जांच कार्य को प्रभावित कर रहे हैं. गरीब मरीजों की हकमारी कर दवा खरीद के नाम पर करोड़ों रुपये के घोटाले का खुलासा होना चाहिए.
घोटाले में शामिल दोषी अफसरों को बेनकाव करना होगा.
स्वास्थ्य विभाग द्वारा करवाये जा रहे लूंज पूंज जांच से इस घोटाले का उद्भेदन संभव नहीं है. मामले की जांच निगरानी अन्वेषण ब्यूरो पटना से करवायी जाय. साथ ही वर्ष 2008 से लेकर वर्तमान समय तक पदस्थापित सभी सिविल सर्जन के कार्यकाल की जांच की जाये. स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी जांच कार्य के नाम पर महज खानापूर्ति कर रहे हैं.
खास बातें
आरोपी सिविल सर्जन के अधीनस्थ अधिकारियों के जांच टीम में शामिल रहने से जांच हो रहा प्रभावित
बुधवार को जब्त दवाओं की सूची बना रहे जांच टीम ने बदला तेवर
दो सिविल सर्जन व एक कर्मी पर है घोटाले का आरोप
करोड़ों रुपये मूल्य के दवा घोटाले को लेकर सुपौल के पूर्व सिविल सर्जन डॉ उमाशंकर मधूप, वर्तमान सिविल सर्जन डॉ रामेश्वर साफी समेत सिविल सर्जन कार्यालय के कर्मी व प्रभारी भंडारपाल पवन कुमार सिंह पर घोटाले का आरोप लगाया गया है. मामले की शिकायत कर्ता शमसूल कमर सिद्दीकी ने आयुक्त को दिये अपने आवेदन में इन सभी अधिकारी व कर्मी पर वित्तीय वर्ष 2014 से लेकर 2016 तक कई किस्तों में की गयी दवा खरीदारी के मामले में करीब साढ़े तीन करोड़ रुपये के घोटाले किये जाने का आरोप लगाया है.
वहीं वर्तमान समय में हो रहे जांच के दौरान अधिकारी आरोपी कर्मी पवन कुमार सिंह के साथ बंद कमरों में बैठ कर दवाओं की सूची तैयार कर रहे हैं. जिससे कि शिकायत कर्ता ने जांच प्रभावित होने और घोटाले से जुड़े साक्ष्य से छेड़ छाड़ किये जाने की आशंका व्यक्त करते हुए जांच से आरोपी कर्मी को अलग रखने की मांग की है.
जब्त दवाओं की सूची तैयार की जा रही है. दंडाधिकारी के निर्देश पर कमरा बंद कर जांच किया जा रहा है. अब तक मिले दवाओं में एक्सपायर दवाओं की संख्या अधिक है.
डॉ केके झा, प्रतिनिधि, प्रमंडलीय उप स्वास्थ्य निदेशक, सहरसा.
मेरे द्वारा कमरा बंद कर जांच कार्य किये जाने का कोई निर्देश नहीं दिया गया है. मैं कार्यालय कार्य से बाहर निकला हूं. आवश्यकता पड़ने पर मौजूद रहूंगा.
सुशील कुमार मिश्र, दंडाधिकारी सह कार्यपालक पदाधिकारी नगर परिषद, सुपौल