एक अदद सड़क के लिए तरस रही हजारों की आबादी
सुपौल : सदर प्रखंड अंतर्गत हरदी पश्चिम पंचायत का मालिक मरड़ टोला आजतक बुनियादी सुविधाओं के लिए तरस रहा है. विकास के इस दौर में सरकार द्वारा एक ओर जहां शहरी व ग्रामीण क्षेत्रों में सड़कों का जाल बिछाया जा रहा है, वहीं दूसरी ओर मालिक मरड़ टोला की करीब एक हजार की आबादी आज […]
सुपौल : सदर प्रखंड अंतर्गत हरदी पश्चिम पंचायत का मालिक मरड़ टोला आजतक बुनियादी सुविधाओं के लिए तरस रहा है. विकास के इस दौर में सरकार द्वारा एक ओर जहां शहरी व ग्रामीण क्षेत्रों में सड़कों का जाल बिछाया जा रहा है, वहीं दूसरी ओर मालिक मरड़ टोला की करीब एक हजार की आबादी आज भी एक अदद सड़क के लिए तरस रही है. पुराने जमाने की कुछेक सड़कें बची हैं, जो जर्जर हो गयी. इससे पैदल चलने में भी परेशानी होती है.
हरदी दुर्गास्थान जाने के लिए इस टोले के लोगों को पहले पगडंडी का सहारा लेकर जाना पड़ता था. कुछ दिन पहले ग्रामीणों के पहल से निजी जमीन होकर पगडंडी को सड़क का मूर्त्त रूप श्रमदान से किया गया, लेकिन विभागीय उदासीनता के कारण अभी तक इस सड़क पर सरकारी मद से मिट्टी भी नहीं दिया गया है. स्थानीय जन प्रतिनिधि व प्रशासनिक पदाधिकारियों से कई बार गुहार लगायी गयी है, लेकिन नतीजा अब तक सिफर साबित हुआ है. इससे ग्रामीणों में असंतोष है.
तय करनी पड़ती है अधिक दूरी : मालिक मरड़ टोला में विशेष रूप से सड़क की समस्या व्याप्त है. इसके कारण आवागमन बाधित हो रहा है. नतीजा है कि ग्रामीणों को मात्र एक किमी की दूरी पर अवस्थित पंचायत मुख्यालय व सुपौल-सिंहेश्वर मुख्य पथ तक पहुंचने के लिए लाउढ़ के गड्ढेनुमा सड़क होते हुए करीब पांच किमी की दूरी तय करनी पड़ती है. ऐसे हालात में किसी बीमार व आपातकालीन स्थिति में मुख्यालय पहुंचना दुष्कर साबित होता है.
पक्कीकरण कराने की मांग : मालिक मरड़ टोला के ग्रामीणों ने समस्या के बाबत स्थानीय जनप्रतिनिधि व जिला प्रशासन से हरदी दुर्गास्थान व मालिक मरड़ टोला के बीच कच्ची सड़क पर ईंट सोलिंग या पीसीसी ढ़लाई कराने की मांग की है. मांग करने वालों में स्थानीय सरपंच मनोहर साह, चंदेश्वरी, उमेश, अनिल, शंकर, पिंटू, आदि शामिल हैं.
सड़क की वजह से पठन-पाठन भी प्रभावित
गांव में सड़क की समुचित सुविधा नहीं रहने के कारण ग्रामीणों के बच्चों का पठन-पाठन भी बाधित होता है. सड़क मार्ग दुरुस्त नहीं होने के कारण सरकार द्वारा संचालित स्कूल, आंगनबाड़ी केंद्र सहित अन्य योजनाओं की सामान्य रूप से जांच नहीं हो पाती है, जिससे इन विभागों में अनियमितता को बढ़ावा मिलता रहा है. स्थानीय ग्रामीणों ने इस समस्या को लेकर कई बार संबंधित पदाधिकारी से लेकर स्थानीय मंत्री तक गुहार लगायी है, बावजूद समस्या जस की तस बनी हुई है.