एसडीओ व पंचायत प्रतिनिधियों की नाव पूरी रात नदी के अंदर फंसे रहने के कारण जिला प्रशासन में खलबली मची रही. जिला प्रशासन के आला अधिकारियों के अलावा पंचायत जन प्रतिनिधियों के परिजनों में भी कोलाहल की स्थिति बनी रही. आपदा विभाग के एडीएम अरुण प्रकाश द्वारा घटना की सूचना मिलने पर एनडीआरएफ टीम को सूचित किया गया, लेकिन रोशनी की व्यवस्था नहीं रहने के कारण एनडीआरएफ की टीम रात में अधिकारियों व जनप्रतिनिधियों को सुरक्षित बाहर निकालने में नाकाम रही.
सुबह जब पुन: एनडीआरएफ की टीम तैयार हुई तो उनके दोनों हवा वाले मोटर वोट पंचर पाये गये. इस बीच सामान्य नाव से ही धारा में फंसे सभी लोग वापस निकल आये. गौरतलब है कि एनडीआरएफ की टीम पूर्व में भी इस तरह के अभियान में बेकार साबित हुई है. बीते 15 दिन पूर्व प्रखंड के बलथरवा गांव में नाव पलटने से चार लोग लापता हो गये थे. घटना की सूचना मिलने के बाद भी टीम द्वारा रेस्क्यू अभियान दूसरे दिन सुबह से प्रारंभ किया गया.
इस बीच लापता हुए सभी लोगों की मौत नदी में डूबने से हो चुकी थी. एनडीआरएफ का कैंप राघोपुर प्रखंड अंतर्गत गनपतगंज में बनाया गया है, जो तटबंध से 18 किलोमीटर दूर है. जबकि आपदा के समय में काम आने वाली इस टीम की प्रतिनियुक्ति प्रभावित क्षेत्र व तटबंध के बिल्कुल करीब होनी चाहिये.
