विदेशी छात्रों ने भी बहती गंगा में लगायी डुबकी

सुपौल : बिहार बोर्ड व जिले में सक्रिय शिक्षा माफियाओं के गंठजोड़ का ही नतीजा है कि इस बार के इंटरमीडिएट परीक्षा में काफी संख्या में विदेशी छात्रों ने भी बहती गंगा में हाथ धोकर बेहतर परिणाम प्राप्त किया. पड़ोसी देश नेपाल के करीब तीन सौ छात्र जिले के वीरपुर व निर्मली अनुमंडल क्षेत्र स्थित […]

सुपौल : बिहार बोर्ड व जिले में सक्रिय शिक्षा माफियाओं के गंठजोड़ का ही नतीजा है कि इस बार के इंटरमीडिएट परीक्षा में काफी संख्या में विदेशी छात्रों ने भी बहती गंगा में हाथ धोकर बेहतर परिणाम प्राप्त किया. पड़ोसी देश नेपाल के करीब तीन सौ छात्र जिले के वीरपुर व निर्मली अनुमंडल क्षेत्र स्थित इंटर विद्यालयों से फार्म भर कर परीक्षा में शामिल हुए और मनोनुकूल परिणाम प्राप्त किया. पड़ताल से यह स्पष्ट हुआ कि विदेशी छात्र-छात्राओं को परीक्षा में शामिल कर अधिक अंकों से परीक्षा पास करवाने का खेल विगत कई वर्षों से जारी है.

यही वजह है कि इंटर में विगत तीन चार वर्षों के दौरान छात्रों की संख्या में अप्रत्याशित रूप से वृद्धि दर्ज की जा रही है. नेपाली छात्र मैट्रिक नेपाल से पास कर बिहार बोर्ड के निर्देश का उल्लंघन कर वित्त रहित कॉलेज से इंटरमीडिएट की परीक्षा में शामिल हो रहे हैं. यदि एसआइटी की टीम सुपौल जिले में आ कर मामले की गहराई से जांच करती है, तो न सिर्फ इस खेल में शामिल कई गिरोह का परदाफाश होगा, बल्कि बिहार बोर्ड के नियम-कानून व दिशा निर्देशों की जमीनी हकीकत का पोल खुल कर सामने आयेगा.

छात्रों की संख्या में अप्रत्याशित वृद्धि : जिले में सक्रिय शिक्षा माफियाओं के बदौलत केवल जिले से बाहर के ही नहीं बल्कि विदेशी छात्र-छात्रा भी यहां से परीक्षा में शामिल हो कर बेहतर अंक प्राप्त करते हैं. यही वजह है कि पिछले तीन-चार वर्षों के दौरान इंटर की परीक्षा में शामिल होने वाले छात्रों की संख्या में अप्रत्याशित रूप से वृद्धि हुई है. इस वर्ष के इंटरमीडिएट की परीक्षा में 17 हजार परीक्षार्थियों ने भाग लिया, जबकि विगत चार-पांच वर्ष पूर्व छात्र-छात्राओं की संख्या लगभग दस हजार के आसपास थी. सबसे आश्चर्य की बात तो यह है कि इस जिले में इंटर के कई छात्र बेहतर शिक्षा प्राप्त करने के उद्देश्य से राज्य के अन्य जिलों का रुख करते हैं, लेकिन दूसरे जिले व पड़ोसी देश नेपाल के छात्रों का यहां से परीक्षा में शामिल होने के पीछे क्या रहस्य है, इसका खुलासा एसआइटी ही कर सकती है.
मैट्रिक नेपाल से, तो इंटर सुपौल से
पड़ोसी देश नेपाल सुपौल जिले की सीमा से सटा हुआ है. नेपाल के कई छात्र मैट्रिक की परीक्षा नेपाल से पास करने के बाद इंटरमीडिएट में यहां नामांकन करवा लेते हैं.बिहार बोर्ड द्वारा नेपाली छात्रों एवं नेपाल से मैट्रिक पास कर बिहार में इंटर में नामांकन से संबंधित कोई स्पष्ट दिशा निर्देश नहीं जारी किया गया है.
इस वजह से नेपाली छात्र नेपाल से मैट्रिक करने के बाद नेपाल से सटे सुपौल जिले के वीरपुर व निर्मली अनुमंडल के विभिन्न वित्त रहित कॉलेजों में धड़ल्ले से नामांकन करवा लेते हैं. कई कॉलेज के प्राचार्य ऐसे छात्रों से माइग्रेशन और शुल्क प्राप्त कर लेते हैं, जबकि कई कॉलेज के प्राचार्य ऐसे छात्रों से माइग्रेशन भी प्राप्त नहीं करते हैं. बिहार बोर्ड द्वारा स्वतंत्र छात्रों को मैट्रिक परीक्षा में सम्मिलित किये जाने पर रोक लगा दी गयी है. केवल नियमित छात्र ही मैट्रिक परीक्षा में सम्मिलित हो सकते हैं. मैट्रिक में नामांकन के लिए आठवीं कक्षा का प्रमाण पत्र अनिवार्य कर दिया गया है. यही वजह है कि नेपाल के छात्र मैट्रिक की परीक्षा में शामिल नहीं हो पाते हैं.
वित्त रहित कॉलेज में मिलता है संरक्षण
पड़ोसी देश नेपाल के अधिकतर छात्र वीरपुर व निर्मली अनुमंडल के वित्त रहित कॉलेज से इंटरमीडिएट की परीक्षा में सम्मिलित होते हैं. सरकारी कॉलेज एवं सरकारी +2 विद्यालयों में नेपाली छात्रों की संख्या नहीं के बराबर होती है. चूंकि वित्त रहित कॉलेज द्वारा नामांकन के समय छात्रों से आवश्यक कागजात एवं राशि प्राप्त करने में काफी लचीला रुख अपनाया जाता है, जिसका लाभ नेपाली छात्र उठा रहे हैं.चूंकि नेपाल में इंटरमीडिएट की परीक्षा में काफी सख्ती बरती जाती है. इसलिए पड़ोसी देश नेपाल के छात्र यहां से डिग्री प्राप्त करने में अधिक दिलचस्पी दिखाते हैं
.इंटरमीडिएट कॉलेज के प्रबंधक भी ऐसे छात्रों के नामांकन में अधिक रुचि लेते हैं क्योंकि इंटरमीडिएट की परीक्षा के परिणाम पर ही उन्हें सरकार से अनुदान की प्राप्ति होती है. कई नेपाली छात्र नामांकन के समय अपना पता भी गलत रूप से दर्ज कराते हैं. किसी प्रकार उनका नामांकन हो जाय इसके लिए वे सुपौल जिले के किसी गांव का फर्जी पता दिखा कर नामांकन लेने में कामयाब हो जा रहे हैं. यदि इस मामले की गहराई से जांच की जाय तो एक बड़े रैकेट का परदाफाश हो सकता है.
नेपाल के छात्रों का नामांकन नेपाल सरकार द्वारा जारी माइग्रेशन के आधार पर होना है. यदि किसी संस्थान द्वारा माइग्रेशन एवं प्रमाण पत्रों की जांच किये बगैर नामांकन किया जाता है तो यह गलत है.
कामेश्वर गुप्ता, संयुक्त सचिव, बिहार विद्यालय परीक्षा समिति, पटना

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