40 घरों में कराया पघलिया

निर्मली : आचार्य महाश्रमण जी महाराज ने गुरुवार को नगर स्थित कुल 40 घरों में जाकर जैन परिवारों को पघलिया करवाया. इसके बाद नव निर्मित महावीर समव सरण भवन में प्रवचन देते हुए आचार्य ने कहा कि अर्हत आडम्य में अदतादान से वीर मन जैन धर्म में 18 पाप का उल्लेख किया गया है. यहां […]

निर्मली : आचार्य महाश्रमण जी महाराज ने गुरुवार को नगर स्थित कुल 40 घरों में जाकर जैन परिवारों को पघलिया करवाया. इसके बाद नव निर्मित महावीर समव सरण भवन में प्रवचन देते हुए आचार्य ने कहा कि अर्हत आडम्य में अदतादान से वीर मन जैन धर्म में 18 पाप का उल्लेख किया गया है.

यहां अदतादान को तीसरा पाप माना गया है. जो चीज नहीं दी गयी है, उसको उठा लेना अर्थात चोरी करना पाप है. प्रेम तब टूटता है, जब स्वार्थ की दीवार बीच में आ जाये. संयुक्त परिवार में बहुतेरे कठिनाइयां उत्पन्न होती हैं, लेकिन आपस में दुश्मनी नहीं करना चाहिए. एक दूसरे को देखने पर गुस्सा आ जाये,

तो ऐसी परिस्थिति को दूर करने का प्रयास करना चाहिए. भाई – भाई के बीच स्वार्थ की दिवार पनपने से संबंध विहीन हो जाता है. प्रेम की रस्सी एक बार टूट जाये तो इसे जोड़ना मुश्किल हो जाता है. दो परिवारों में अन्याय किसी के साथ न हो. प्राणियों को इसके प्रति सचेत रहना चाहिए. धर्म संघ का संबंध मुख्य होता है. साथ ही संघ में गुरु का संबंध सबसे अहम है.

कई राज्य के अनुयायी हुए शामिलआचार्य महाश्रमण जी महाराज के प्रवचन को श्रवण किये जाने को लेकर दिल्ली, कोलकाता, दालकोला, हैदराबाद, बेंगलूरु, राजस्थान सहित अन्य हिस्सों से अनुयायी पहुंचे थे.

नगर मुख्यालय में वाहनों का काफिला देखा गया. ज्ञात हो निर्मली नगर से पूर्व में अपने घरों को छोड़ कर अन्य प्रांतों में अपने व्यवसाय को फैलाने की दृष्टि से लोगों को निर्मली नगर छोड़ना पड़ा था. लगभग 25 वर्षों बाद लोगों ने गुरुदेव के आगमन पर पुन: निर्मली का रूख किया और प्रवचन सुन अपने जीवन को सफल बताया.

डालचंद जी नाहर अपने बाल्यावस्था के 14 वर्ष की उम्र में आर्थिक तंगी के कारण कोलकाता का रुख किये थे. बताया कि वर्तमान समय में वे 71 वर्ष के हैं. उनकी जन्म स्थली पर आचार्य जी के आगमन पर प्रवचन में शामिल होने से जीवन सफल हो गया. छगनलाल सिंघी ने बताया कि इस नगर में जूट का व्यवसाय वृहद पैमाने पर हुआ करता था,

लेकिन 1934 के बाढ़ के बाद व्यापार काफी प्रभावित हुआ. इससे नगर छोड़ उन्होंने दिल्ली स्थित चांदनी चौक में व्यवसाय शुरू किया. ऐसे ही कई एक परिवार निर्मली से बाहर अपना व्यापार प्रारंभ कर नगर में अपने जन्म स्थली को छोड़ कर बाहरी प्रदेश में रहने को विवश हैं.

राकेश कुमार नाहर, सुनील कुमार सिंघी, उमेन कुमार सिंघी, राजेश कुमार सिंघी, रूपेश कुमार नाहर, ऋद्ध करण सिंघी, सुनील कुमार सुराना, अनिल कुमार सुराना, राजेश कुमार नाहटा, राजेश कुमार नाहर व अन्य निर्मली से जिनका लगाव रहा है. आचार्य प्रवर के आगमन पर इन लोगों ने निर्मली तेरा पंथ सभा केअध्यक्ष श्री बाबूलाल जी सुराना को धन्यवाद दिया है.

वहीं इस मौके पर पुलिस प्रशासन ने भी सदल बल उपस्थित होकर आचार्य जी से अध्यात्म का गुर सीखा.जीवन जीने की कला के दिये टिप्स प्रवचन सभा में छात्र व छात्राओं को जीवन जीने की कला से संबंधित कई अहम जानकारी दी गयी. प्रवचन पंडाल में उपस्थित डीपीएस के छात्र-छात्राओं को काेलकाता से आये डालचंद जी नाहर ने बच्चों को जीवन जीने की सही कला के बारे में बताया.

दिल्ली पब्लिक स्कूल के शिक्षकों के साथ 220 छात्र-छात्राओं ने आर्ट ऑफ लिविंग के बारे में श्री नाहर से प्रशिक्षण प्राप्त किया नि:शुल्क जांच शिविर का आयोजन. नेपाल बिहार तेरापंथ सभा के द्वारा नि:शुल्क जांच शिविर का आयोजन कराया गया. जांच शिविर में क्षेत्र के गरीब नि:सहाय लोगों के बीच मुफ्त में दवा , चश्मा का वितरण किया गया.

साथ ही कई रोगियों के चिकित्सीय जांच कर स्वास्थ्य लाभ संबंधित उपाय की जानकारी दी गयी. जैन तेरापंथ संघ के ग्यारहवें आचार्य महाश्रमण जी महाराज ने लोगों के स्वास्थ्य के प्रति सत्संग के माध्यम से शुद्ध खान पान रखने का आग्रह किया. बताया कि प्राणी स्वयं को नशा से मुक्त रखने पर कई बीमारियों के ग्रसित होने से बच सकते हैं.

संघ में अनुशासन का विशेष महत्वप्रवचन कर्ता ने बताया कि तेरापंथ धर्म संघ में अनुशासन का काफी महत्व है. इस धर्म संघ में एक गुरु एक विधान का नियम है. सभी साधु व साध्वी एक गुरु के ही आदेश का सहर्ष स्वीकार करते हैं. बताया कि एक नियम के अपनाने से दिनचर्या भी अच्छा रहता है.

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