जीवन में तपोगुण का है खास महत्व : महाश्रमण जी महाराज

जीवन में तपोगुण का है खास महत्व : महाश्रमण जी महाराज ईमानदारी से कमाया गया धन ही एक मात्र पवित्र धन है : महाश्रमण जी महाराजजैन श्वेतांबर तेरा पंथ धर्म संघ के 11 वें आचार्य का हुआ भव्य स्वागतमुसलमान भाइयों ने भी आचार्य का गर्मजोशी से किया स्वागत फोटो – 11,12,13कैप्सन – प्रवचन देते आचार्य […]

जीवन में तपोगुण का है खास महत्व : महाश्रमण जी महाराज ईमानदारी से कमाया गया धन ही एक मात्र पवित्र धन है : महाश्रमण जी महाराजजैन श्वेतांबर तेरा पंथ धर्म संघ के 11 वें आचार्य का हुआ भव्य स्वागतमुसलमान भाइयों ने भी आचार्य का गर्मजोशी से किया स्वागत फोटो – 11,12,13कैप्सन – प्रवचन देते आचार्य महाश्रमण जी, स्वागत करते स्थानीय, उपस्थित अनुयायीप्रतिनिधि, प्रतापगंज प्राणियों के जीवन में सरलता, क्षमा शीलता, चरित्रता, संयम व नैतिकता ऐसे सूत्र हैं, जिससे विश्व बंधुत्व स्थापित होता है. इसे उतारने से जीवन को सद्गति प्राप्त होती है. यह बातें जैन श्वेतांबर तेरा पंथ धर्म संघ के 11 वें आचार्य महा श्रमण जी महाराज ने प्रवचन सभा में अनुयायियों को संबोधित करते हुए कहीं. कहा कि प्राणियों का जन्म – मरण सृष्टि का शाश्वत नियम है. यह क्रिया सतत चलायमान है. मृत्यु के उपरांत प्राणियों के चार गति दृष्टिगत हैं. प्राणी इसे नरक, त्रियंक, मनुष्य व देव यानी मोक्ष के रूप में भोगते आ रहे हैं. जिन्होंने धरा पर जन्म लिया है उनका एक दिन अवसान होना ही है. इस कारण प्राणियों को जीवन सुधारने का कार्य करना चाहिए. मृत्यु के उपरांत सदगति की प्राप्ति हो इसके लिए तपो गुण की खास महत्ता है. प्राणियों के समक्ष तपो गुण, अनाहार, उनोद्री, उपासना सहित अन्य स्वरुपों में विद्यमान है. जैन परंपरा के अनुसार सूर्यास्त से लेकर सूर्योदय तक रात्रि काल माना जाता है. इस कारण उक्त समय जैन अनुयायियों के लिए भोजन वर्जित है. तपोगुण के हैं पांच सूत्र आचार्य जी ने प्रवचन के दौरान तपोगुण के पांच सूत्र बताये. उन्होंने कहा कि जीवन में सरलता होनी चाहिए. जीवन में किसी प्रकार के छल-कपट से अलग रहना चाहिए. मन व वचन में विसंगति रहने से आत्मा दूषित होती है. जो दूसरों को धोखा देता है, वह अपने आप से धोखा करता है. प्राणियों को कभी भी पवित्रता नहीं छोड़नी चाहिए. ईमानदारी से कमाया गया धन ही एक मात्र पवित्र धन है. क्षमाशीलता है प्राणियों का शृंगार आचार्य जी ने बताया कि क्षमाशीलता प्राणियों के जीवन का सबसे बड़ा शृंगार है. कहा कि विवशता वश प्राणियों द्वारा किये गये कार्य क्षमाशीलता के तहत नहीं आता है. सामर्थ्य अनुरूप किया गया कार्य क्षमा की शोभा बढ़ाता है. मानव जीवन में क्रोध व गुस्सा सबसे खतरनाक है. प्राणी अपने शरीर से जितनी तीव्रता के साथ इसका त्याग करेंगे. मानव का जीवन उतना ही सुखद होगा. कहा कि जीवन को जितना सरल रखेंगे मानव का व्यक्तित्व उतना ही निखरेगा. संयम है जीवन का एक सूत्र प्रवचन के दौरान आचार्य जी ने कहा कि संयम मानव जीवन का एक सूत्र है. कहा कि सादा जीवन- उच्च विचार, यही है जीवन का श्रृंगार. प्राणियों को अपनाना चाहिए. कहा कि संयम ही मानव जीवन को मानवीय रूप प्रदान करता है. कहा कि प्राणियों को जीवन भर खान – पान, वाणी – विचार आदि पर संयम बरतना चाहिए. प्रवचन के दौरान अनुयायियों को सदभावना, नैतिकता, व नशा मुक्ति का संकल्प करवाया. इससे पूर्व साध्वी प्रमुख कनक प्रभा जी ने अनुयायियों को विवेक चक्षु को जागृत करने पर विशेष बल दिया. वंदना प्रस्तुति के साथ अभिवादन आयोजन स्थल पर आचार्य सहित तेरा पंथ के सदस्यों का अभिवादन महिला मंडल द्वारा वंदना व गीत की प्रस्तुति कर किया गया. इस मौके पर उपस्थित पूर्व विधायक लखन ठाकुर ने आचार्य जी को इनसानियत व मानवता का पुजारी बताया. कहा कि प्रवचन सुनने से जीवन जीने की प्रेरणा मिलती है. प्रमुख रमेश प्रसाद यादव ने बताया कि संत व साध्वी के आगमन से यहां की धरती धन्य हो रही है. वहीं पूर्व प्रमुख भूप नारायण यादव ने आचार्य द्वारा निकाली गयी अहिंसा यात्रा को शत – शत नमन किया. ई मोती लाल ने कहा कि अत्याचार, घृणा, नफरत से घिरे इस जगत को शांति की आवश्यकता है. जो भगवान महावीर के संदेश को अपनाने से मिल सकता है. इस मौके पर तेरा पंथ सभा के अध्यक्ष विजय राज छाजेड़ ने आयोजन की सफलता पर क्षेत्र वासियों का अभिवादन किया. जगह – जगह जय घोष के साथ स्वागत आचार्य जी के सूर्यापुर पंचायत स्थित परसा बीरबल में पहुंचते ही उपस्थित श्रद्धालु जय घोष कर अभिनंदन किये. झुनकी चौक के निकट उप प्रमुख कार्तिक भिंडवार ने स्वागत किया. इसके बाद आचार्य जी का काफिला सूर्यापुर पहुंचा, जहां सैकड़ों की संख्या में अल्पसंख्यक समुदाय के लोग कतार बद्ध होकर अभिवादन किये. नेशनल मेडिकल हॉल के समीप नुरुल होदा जफरूल अंसारी के नेतृत्व में दर्जनों लोगों ने आचार्य जी का स्वागत किया. साथ ही सत्संग भवन के समीप उपस्थित स्कूली बच्चों व जन समुदाय ने जय घोष के साथ आचार्य जी का स्वागत किया. इसके बाद अशोक बाबा रघुनंदन मल्लिक सहित कई सत्संग कर्मियों के आग्रह पर आचार्य जी को सत्संग भवन ले जाया गया.

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