सुपौल : कार्तिक महीने के अमावस्या तिथि को मां लक्ष्मी के साथ – साथ माता काली की पूजा हर्षोंल्लास के साथ संपन्न हुआ. जिला मुख्यालय सहित कई स्थानों पर दीपावली के मौके पर बुधवार को माता काली की प्रतिमा स्थापित कर श्रद्धालुओं ने विधिवत व निष्ठा पूर्वक पूजा अर्चना किया.
काली पूजा को लेकर आयोजन समिति द्वारा आकर्षक तरीके से सजाया गया था. पूजा के दौरान जानकारों द्वारा किये जा रहे मंत्रोच्चार से आस पास का वातावरण भक्तिमय हो गया. मंदिर परिसरों में मेला का भी आयोजन कराया गया था. जहां भक्तजनों ने फूल माला सहित अन्य पूजन सामग्री खरीद कर माता के चरणों में अर्पित कर परिवारों के सुख समृद्धि की कामना की. काली पूजा के मौके पर कई मंदिर परिसरों में छाग बलि देकर माता की आराधना की गयी.
पूजा को लेकर उमड़ी भीड़ मुख्यालय के मालगोदाम स्थित मंदिर में कई दशकों से कार्तिक अमावस्या की तिथि को माता काली सहित अन्य देवताओं की प्रतिमा स्थापित कर पूजा का विधान किया जा रहा है. मां काली की आराधना को लेकर शहरी क्षेत्र सहित आस पड़ोस के दर्जनों गांवों से भक्तजनों की भारी भीड़ जुटती है. दूरदराज के क्षेत्रों से आये श्रद्धालुओं को पूजा अर्चना में कठिनाई का सामना ना करनी पड़े. इसे लेकर आयोजन समिति द्वारा मंदिर परिसरों को बेरिकेट किया गया था.
ताकि भक्त जन बिना की व्यवधान के पूजा अर्चना कर सके. वहीं सदर प्रखंड के मलहद स्थित महाकाली मंदिर में भी स्थानीय जन सहयोग से दीपावली के मौके पर मां काली की पूजा अर्चना भक्ति भाव से संपन्न किया गया. बुधवार के सुबह से लेकर रात भर श्रद्धालुओं का तांता लगा रहा. दी गयी छाग की बलि काली पूजा के अवसर पर श्रद्धालुओं द्वारा दर्जनों छाग की बलि दी गयी.
आयोजन समिति के सदस्यों ने बताया कि मां काली का भोग छाग की बलि देकर किये जाने की परंपरा रही है. बताया कि अधिकांश लोग पूजा पाठ के दौरान मन वांछित फल की प्राप्ति को लेकर माता के समक्ष वचन लेते हैं कि वे सच्चे मन से अपना कर्म कर रहे हैं. फल प्राप्ति के उपरांत माता को भेंट समर्पित करेंगे. बताया कि श्रद्धालु गण कर्म फल की प्राप्ति के उपरांत माता को भेंट स्वरूप छाग की बलि चढ़ावा करते हैं.
