लोकतंत्र के महापर्व पर महा मेले की तैयारी

सुपौल : किसी भी पर्व पर मेले के आयोजन की परंपरा रही है. तो लोकतंत्र के महापर्व पर भी महा मेले का आयोजन स्वाभाविक है. साधारणतया मेले का आयोजन किसी विशिष्ट अनुष्ठान के मौके पर किसी खास वर्ग द्वारा किया जाता है. पर, लोकतंत्र के महापर्व पर आयोजित मेले में भारतीय संविधान में निहित सभी […]

सुपौल : किसी भी पर्व पर मेले के आयोजन की परंपरा रही है. तो लोकतंत्र के महापर्व पर भी महा मेले का आयोजन स्वाभाविक है. साधारणतया मेले का आयोजन किसी विशिष्ट अनुष्ठान के मौके पर किसी खास वर्ग द्वारा किया जाता है. पर, लोकतंत्र के महापर्व पर आयोजित मेले में भारतीय संविधान में निहित सभी वर्गों की सामान्य भागीदारी होती है. जब मेला का आयोजन हो तो मेले की प्रति लोगों की उत्सुकता तो लाजिमी है.

कहा जाता है कि मेला दो सभ्यताओं और संस्कृतियों की मिलन स्थली है. जबकि लोकतंत्र के महापर्व पर आयोजित मेले में सभ्यताओं व संस्कृतियों की दशा व दिशा तय करने को लेकर आम लोगों की भागीदारी होती है. इसलिए लोकतंत्र के इस महापर्व का अपना एक अलग महत्व है, और इस महापर्व को लेकर आम लोगों में अलग उत्साह का माहौल है.

जिले में पांच विधान सभा क्षेत्र 41-निर्मली, 42-पिपरा, 43-सुपौल, 44-त्रिवेणीगंज(सुरक्षित) एवं 45-छातापुर में अंतिम चरण में चुनाव होना है. इस चुनाव का निष्पक्ष व शांतिपूर्ण संपन्न कराये जाने की दिशा में प्रशासन भी मुस्तैद है.

एक तरफ जहां प्रशासन द्वारा चुनाव को लेकर प्रशासनिक तैयारी के साथ जगह-जगह मतदाता जागरूकता रैली निकाल कर आम मतदाताओं को जागरूक करने की दिशा में कार्य किया जा रहा है. तो दूसरी तरफ विधान सभा क्षेत्रों से विभिन्न पार्टी के प्रत्याशियों द्वारा रिक्सा, ऑटो व अन्य वाहनों पर लगे ध्वनि विस्तारक यंत्र से प्रचार-प्रसार किया जा रहा है. प्रत्याशी व उनके समर्थक आम मतदाता से संपर्क स्थापित कर अपने पक्ष में मत डालने की अपील मतदाताओं से घर-घर जा कर रहें हैं.

गांव की गलियारों से लेकर शहर तक हर जगह लोगों का हुजूम मेला सा एहसास दिलाता है.जगह-जगह सजने लगी हैं दुकानेंचुनाव को लेकर जिला मुख्यालय से मुख्य केंद्र समाहरणालय, स्टेडियम, बीएसएस महाविद्यालय परिसर है. जहां चुनाव से संबंधित सारे कार्यों का निष्पादन प्रशासन द्वारा किया जा रहा है. उक्त स्थलों पर सड़क किनारे व्यवसायियों द्वारा दुकान लगाना प्रारंभ कर दिया गया है. दुकानदार पल्लव कुमार, राम चंद्र कुमार, अर्जुन साह, लक्ष्मी देवी, विरेंद्र साह आदि बताते है कि इस बार भी लोकतंत्र के मौके पर आयोजित मेले में अच्छा कारोबार होने की संभावना है.

बताया कि ऐसा मौका पांच वर्ष में एक बार आता है. बीएसएस कॉलेज परिसर में प्रत्येक वर्ष मतगणना का कार्य किया जाता है. जहां लोगों की आवाजाही काफी रहती है. इसलिए इन स्थलों पर हमलोग दुकान लगाते है.क्योंकि चुनाव के मौके पर विभिन्न स्थान से सरकारी कर्मी के साथ अन्य लोगों का आना-जाना यहां लगा रहता है. जिसे खाने से लेकर अन्य जरूरत की वस्तु की आवश्यकता होती है. लोगों को जरूरत के हिसाब से समान भी मिल जाता है. और हम लोगों का व्यवसाय भी हो जाता है.

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