बदहाली की मार झेल रहा वीरपुर का स्टेडियम

वीरपुर : सरकारी उदासीनता की वजह से अनुमंडल मुख्यालय स्थित क्रीड़ा स्टेडियम बदहाली की मार झेल रहा है. सीमा क्षेत्र विकास कार्यक्रम के तहत भारत-नेपाल सीमा से लगे मधुबनी, किशनगंज और वीरपुर में खेल संरचना के विकास के उद्देश्य से स्टेडियम निर्माण की स्वीकृति दी गयी थी. 06 जून, 2004 को बिहार सरकार के कला, […]

वीरपुर : सरकारी उदासीनता की वजह से अनुमंडल मुख्यालय स्थित क्रीड़ा स्टेडियम बदहाली की मार झेल रहा है. सीमा क्षेत्र विकास कार्यक्रम के तहत भारत-नेपाल सीमा से लगे मधुबनी, किशनगंज और वीरपुर में खेल संरचना के विकास के उद्देश्य से स्टेडियम निर्माण की स्वीकृति दी गयी थी.

06 जून, 2004 को बिहार सरकार के कला, संस्कृति एवं युवा कार्य तथा पर्यटन विभाग के मंत्री अशोक कुमार सिंह द्वारा प्रस्तावित स्टेडियम का शिलान्यास किया गया था.

लेकिन 15 साल बीत जाने के बाद भी अधूरा स्टेडियम अपने भाग्य पर आंसू बहा रहा है. खेल से जुड़ी प्रति स्पर्धाओं में अपना अलग इतिहास बनाने वाले वीरपुर के खिलाड़ी एवं खेल प्रेमी सरकारी उदासीनता से जहां खिन्न हैं. वहीं जिला प्रशासन भी हाथ पर हाथ धरे बैठा है.

कोसी क्लब वीरपुर की ओर से वर्ष 1968 में काठमांडू नेपाल से त्रिभुवन कप जीतने वाली टीम के 61 वर्षीय गोल कीपर क्रांति सिंह चौहान का मानना है कि खेल के प्रति सरकारी दावे जहां लगातार खोखले साबित हो रहे हैं. वहीं खिलाडि़यों की दक्षता बढ़ाने के लिए सरकार के पास कोई योजना नहीं है. बिहार की पहली महिला ब्लेक बेल्ट खिलाड़ी वीरपुर निवासी शिवानी देव की माने तो विद्यालयों में खेल उपस्करों का जहां भाड़ी अभाव है.

वहीं सरकारी दस्तावेज इसे झूठ बतला रहे हैं. विभिन्न खेलों से जुड़े खिलाड़ी विशाल कुमार, अमित कुमार सिंह, विकास कुमार, अमोल कुमार, गुलाब अंसारी, माइकल, सोनू घोष आदि ने जिला पदाधिकारी एम राम चंद्रु डू से अधूरा पड़े स्टेडियम के निर्माण कार्य को पूरा करने की मांग की है.

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