छातापुर. अंचल क्षेत्र में भूदान किसानों की जमीन का दाखिल खारिज नहीं किया जा रहा है और ना ही उन्हें जमीन पर दखल दिलाने की कार्रवाई की जा रही है. राज्य सरकार के निर्देश पर अंचल कार्यालय द्वारा भूमि ऑपरेशन दखल दिहानी शिविर भी आयोजित किया गया, लेकिन आज भी भूदान किसान अपने हक व अधिकार से वंचित हैं. बिहार भूदान यज्ञ कमेटी के सदस्य सह कोसी व पूर्णियां प्रमंडल के प्रभारी फेक नारायण मंडल ने अपर समाहर्ता सुपौल को पत्र भेज कर पूर्व से चल रहे जमाबंदी को रद्द कर उक्त जमीन पर भूदान परचा धारियों को कब्जा दिलाने का अनुरोध किया है. पत्र मंे श्री मंडल ने बताया है कि महाराज दरभंगा द्वारा वर्ष 1954 में अंचल के विभिन्न मौजा की 2659 एकड़ जमीन संत विनोबा भावे के नाम पर दान दी गयी थी. भूमि सुधार उप समाहर्ता सुपौल द्वारा उक्त जमीन की संपुष्टि के बाद भूदान कार्यालय द्वारा भूमिहीन परिवारों के बीच परचा के माध्यम से जमीन का वितरण किया गया. तकरीबन छह दशक बीतने के बाद भी परचा धारियों को जमीन पर कब्जा नहीं मिल पाया है. बताया है कि भूदान अधिनियम 1954 के विभिन्न धाराओं में अंचलाधिकारी को भूदान किसान के हित में कार्य करने का संपूर्ण अधिकार प्राप्त है, लेकिन अंचल द्वारा इस दिशा में किसी प्रकार की कार्रवाई नहीं की जा रही है.
भूदान किसानों को नहीं मिल रहा जमीन पर कब्जा
छातापुर. अंचल क्षेत्र में भूदान किसानों की जमीन का दाखिल खारिज नहीं किया जा रहा है और ना ही उन्हें जमीन पर दखल दिलाने की कार्रवाई की जा रही है. राज्य सरकार के निर्देश पर अंचल कार्यालय द्वारा भूमि ऑपरेशन दखल दिहानी शिविर भी आयोजित किया गया, लेकिन आज भी भूदान किसान अपने हक व […]
