सहरसा : रेलवे के कार्यों की जहां हमेशा से सराहना होती रही है, वहीं कुछ वर्षों से उनके कार्यों पर सवालिया निशान खड़े हो रहे हैं. जबकि आये दिन सहरसा रेलवे परिक्षेत्र में होने वाले निर्माण कार्य में अनियमितता को लेकर लगातार खबर छपती रही है. लेकिन अधिकारियों के कानों पर जूं तक नहीं रेंगी. लेकिन सोमवार को प्लेटफॉर्म संख्या दो पर यात्रियों के बैठने के लिए हो रहे बेंच निर्माण की अनियमितता रेलवे के कार्यों की पूरी पोल खोल रही थी.
25 वर्ष पुराने तीन नंबर ईंट से हो रहा बेंच निर्माण
सहरसा : रेलवे के कार्यों की जहां हमेशा से सराहना होती रही है, वहीं कुछ वर्षों से उनके कार्यों पर सवालिया निशान खड़े हो रहे हैं. जबकि आये दिन सहरसा रेलवे परिक्षेत्र में होने वाले निर्माण कार्य में अनियमितता को लेकर लगातार खबर छपती रही है. लेकिन अधिकारियों के कानों पर जूं तक नहीं रेंगी. […]

निर्माण कार्य के दौरान तीन नंबर ईंट का उपयोग धड़ल्ले से किया जा रहा था. लेकिन कार्यों की गुणवत्ता को देखने वाला वहां कोई नहीं था. लगभग 25 वर्ष पूर्व मीटर गेज के समय में ही यात्रियों के बैठने के लिए छोटे बेंच का निर्माण किया गया था एवं उसकी सुंदरता के लिए उसपर टाइल्स लगा दिया गया था. मीटर गेज होने के कारण प्लेटफॉर्म पर यात्रियों का दबाव कम था.
लेकिन बाद में मीटर गेज से ब्रॉडगेज में बदलने के बाद सहरसा जंक्शन पर यात्रियों का दबाव काफी बढ़ गया. उसके बाद रेलवे द्वारा सहरसा जंक्शन का धीरे धीरे विस्तार किया जाने लगा. उसी विस्तार के दौरान यात्रियों के बैठने के लिए नये सिरे से बेंच का निर्माण किया जाने लगा. जिसमें पुराने बेंच को तोड़कर नये बेंच का निर्माण शुरू हुआ.
जहां नये सिरे से बनाये जा रहे बेंच में पूर्ण अनियमितता बरती जा रही थी. साफ तौर पर कहा जाए तो पुराना बेंच पूरी तरह से तीन नंबर ईंट से तैयार किया गया था. इसे तोड़ने के बाद 25 वर्ष पुराने इसी तीन नंबर ईंट का इस्तेमाल नये सिरे से बनाये जा रहे बेंच में किया जा रहा है. जबकि पूर्व में भी प्लेटफॉर्म 4 व 5 के निर्माण में दो नंबर व तीन नंबर ईंट का इस्तेमाल धड़ल्ले से किया गया. जिसकी खबर भी छपी थी. लेकिन किसी भी अधिकारी ने इसकी जांच तक नहीं की.
वहीं प्लेटफॉर्म संख्या 5 के समीप यात्रियों के लिए बने इको फ्रेंडली पार्क निर्माण के समय भी पार्क के चारों ओर पीसीसी बिना सोलिंग मिट्टी के ऊपर की गयी. रेलवे की इस तरह के कार्यों में लूट खसोट के कारण अनियमितता पूरी तरह से भरी पड़ी दिखती है. जबकि बेंच निर्माण में अनियमितता के बाबत पूछे जाने पर एडीईएन मनोज कुमार ने बताया कि इस कार्य में ईंट का कोई उपयोग नहीं है. थोड़े बहुत कार्यों के कारण पुराने ईंट का ही इस्तेमाल किया जा रहा है. जबकि बेंच के लिए मुख्य कार्य ग्रेनाइट लगाने का है. काम अच्छा हो रहा है.