शहर के प्रवेश द्वार हैं एलइडी से रोशन शहर के अंदर छाया रहता है अंधेरा

सुपौल : जिला मुख्यालय के आम शहरी इन दिनों नगर परिषद व विद्युत विभाग की कार्य प्रणाली से हैरान हैं. दरअसल इन दिनों नप की निगरानी में शहर के सभी सड़कों के किनारे एलइडी लाइट लगाया जा रहा है. कुछ महीने पूर्व प्रारंभ हुए इस कार्य के दौरान अधिकतर स्थानों पर एलइडी लाइट लगा दिया […]

सुपौल : जिला मुख्यालय के आम शहरी इन दिनों नगर परिषद व विद्युत विभाग की कार्य प्रणाली से हैरान हैं. दरअसल इन दिनों नप की निगरानी में शहर के सभी सड़कों के किनारे एलइडी लाइट लगाया जा रहा है. कुछ महीने पूर्व प्रारंभ हुए इस कार्य के दौरान अधिकतर स्थानों पर एलइडी लाइट लगा दिया गया है.

वहीं शेष बचे स्थानों पर लाइट लगाने की प्रक्रिया जारी है. लेकिन हैरत की बात है कि लाइट लगने के बाद शहर में प्रवेश करने वाली मुख्य सड़कें तो इन एलइडी लाइटों से जगमग हो चुकी है. लेकिन शहर के अंदरूनी हिस्सों में अंधेरा पसरा हुआ है.
दरअसल एलइडी लगाने के क्रम में प्रमुख सड़कों के किनारे पूर्व से लगे भेपर लाइट को खोल लिया गया और उक्त स्थल पर एलइडी लाइट लगायी गयी. लेकिन स्टेशन चौक, महावीर चौक लोहिया नगर, हटखोला रोड आदि स्थानों पर लगाये गये एलइडी लाइट को अब तक रौशन नहीं किया गया है. नतीजा है कि पूर्व से जल रहे भेपर लाइट की रौशनी भी अब लोगों को मयस्सर नहीं हो पा रही है. वहीं दूसरी ओर लगाया गया नया एलइडी लाइट बंद पड़ा है. जिसकी वजह से प्रमुख सड़कों पर अंधेरा फैला रहता है.
बोर्ड की बैठक में उठा था मुद्दा
शहर में फैले अंधेरे और नये एलइडी लाइट के रौशन नहीं होने का मुद्दा हाल ही में नगर परिषद बोर्ड की बैठक में जोर-शोर से उठाया गया था. पूर्व उप मुख्य पार्षद रमेंद्र कुमार रमण सहित अन्य कई पार्षदों ने इस संबंध में कार्यपालक पदाधिकारी से पूछताछ की थी. साथ ही पोल पर से खोले गये पुराने भेपर लाइट के संबंध में भी खोजबीन की गयी थी. पार्षदों ने सवाल खड़े किये थे कि आखिर क्या कारण है कि शहर के प्रवेश द्वारों पर एलइडी लाइटें रौशन हैं तो फिर शहर के अंदर अंधेरा क्यों पसरा है.
खोले गये पुराने भेपर लाइट का हिसाब-किताब किसके जिम्मे है. वहीं महीनों बीत जाने के बावजूद स्टेशन रोड जैसे प्रमुख स्थानों पर लगाये गये एलइडी क्यों रौशन नहीं हुए हैं. कार्यपालक पदाधिकारी ने पार्षदों को इस संबंध में उचित कार्रवाई का आश्वासन दिया था. लेकिन दुर्भाग्य है कि बैठक के करीब तीन सप्ताह से अधिक बीत जाने के बावजूद इस दिशा में कोई कार्रवाई नहीं की गयी है. जिससे आम शहरियों में असंतोष का माहौल व्याप्त है.
बंद पड़े हैं हाइमास्ट लैंप
शहर के प्रमुख चौक-चौराहों पर प्रशासन द्वारा पूर्व में कई हाइमास्ट लैंप लगाये गये थे. लेकिन दुर्भाग्य है कि समुचित देखरेख के अभाव में अधिकांश हाइमास्ट लैंप खराब पड़े हैं. स्टेशन चौक, लोहिया नगर, महावीर चौक, पटेल चौक आदि स्थानों पर बंद पड़े हाइमास्ट लैंप विभागीय लापरवाही का जीता-जागता उदाहरण पेश कर रहा है. लोहिया नगर चौक पर लगे हाइमास्ट लैंप को तो कुछ दिन पूर्व मरम्मत के लिये नीचे उतारा भी गया.
लेकिन उसे ठीक करने के बजाय जस की तस छोड़ दिया गया. नतीजा है कि शहर के इन प्रमुख चौराहों पर रात में अंधेरे का साम्राज्य व्याप्त हो जाता है. इसके अलावा महिला कॉलेज गली में वर्षों से झुका पड़ा बिजली का पोल व कांग्रेस ऑफिस के समीप सड़क किनारे जर्जर व झुका बिजली का पोल विभागीय उदासीनता की गवाही देता प्रतीत होता है.
कहीं अंधेरा तो कहीं दिन में भी जलती है लाइट
गौरतलब है कि एक ओर जहां शहर की हृदय स्थली माने जाने वाले स्टेशन चौक, महावीर चौक व लोहिया नगर जैसे स्थानों पर रौशनी की पर्याप्त व्यवस्था उपलब्ध नहीं है. वहीं दूसरी ओर किसनपुर जाने वाली सड़क में डिग्री कॉलेज के समीप व अन्य कई स्थानों पर दिन में भी पोल पर लगे लाइट जलती रहती है. ऐसे में लाखों रुपये खर्च कर लगाये गये इन लाइटों के भविष्य का सहज अंदाजा लगाया जा सकता है.
कहते हैं अधिकारी
इस चालू वर्ष में नगर स्थित सड़क किनारों के पोल पर भेपर एलइडी लाइट लगाने के लिए विभाग को लाइट की आपूर्ति की गयी थी. पोल पर लगे खराब लाइट को बदल कर स्टॉक कर लिया गया है. जरूरत पड़ने पर और लाइट की खरीद की जायेगी. स्टेशन रोड एवं महिला कॉलेज की गली में पूर्व में लगाये गये एलइडी लाइट को अगस्त के प्रथम सप्ताह में कार्य एजेंसी द्वारा ठीक कर दिया जायेगा.
भवेश कुमार, कार्यपालक पदाधिकारी, नगर परिषद, सुपौल

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