अब तक नहीं हुआ नदी में सरकारी नावों का परिचालन

नवहट्टा : प्रखंड क्षेत्र की आधी से अधिक आबादी कोसी तटबंध के भीतर निवास करती है. जिन लोगों को तटबंध के भीतर से प्रखंड मुख्यालय और जिला मुख्यालय आना-जाना मुसीबत के पहाड़ से कम नहीं है. खासकर 15 जून से लेकर 15 अक्टूबर तक बाढ़ अवधि में लोगों को बिना नाव का आना जाना संभव […]

नवहट्टा : प्रखंड क्षेत्र की आधी से अधिक आबादी कोसी तटबंध के भीतर निवास करती है. जिन लोगों को तटबंध के भीतर से प्रखंड मुख्यालय और जिला मुख्यालय आना-जाना मुसीबत के पहाड़ से कम नहीं है. खासकर 15 जून से लेकर 15 अक्टूबर तक बाढ़ अवधि में लोगों को बिना नाव का आना जाना संभव नहीं है.

जिला प्रशासन के निर्देशानुसार और स्थानीय लोगों की विकट परिस्थिति को देखते हुए प्रखंड क्षेत्र के सभी प्रमुख घाटों पर सरकारी नाव बहाल की जाती है. जिससे लोगों को इस पार से उस पार करने का निर्देश दिया जाता है. लेकिन सरकार के अधीनस्थ कर्मचारी के द्वारा कागजी रिपोर्ट पर ही नाव को बहाल कर दिया जाता है.
जिससे लोगों को सरकारी नाव का लाभ नहीं मिल पाता है. जहां घाट पर निजी नाव चालक की मनमानी भी चरम पर है. प्रति सवारी 20 से 30 रुपये की वसूली की जाती है. दो नदी पार करने में 50 रुपये तक का भुगतान करना पड़ता है. वाजिब से दो से तीन गुना किराया वसूली करने के बावजूद निजी नाव चालक के लिए समय सीमा का कोई महत्व नहीं रहता है.
स्थानीय लोग तो किसी तरह पश्चिमी भाग से पूर्व विभाग आर पार होते हैं. लेकिन जो प्रखंड क्षेत्र के स्वास्थ्य केंद्र व सरकारी विद्यालय सहित अन्य विभागों में कार्यरत कर्मचारी हैं, उनके लिए पंचायत और अपने क्षेत्र में जाना बड़ी मुसीबत हो जाती है. जिस कारण 15 जून से 15 अक्टूबर तक पदस्थापित कर्मचारी महीने में दो से चार दिन ही कार्यस्थल पर पहुंच पाते हैं. जिस कारण लोगों के कई तरह के कार्य बाधित होते हैं व सरकारी शिक्षण व्यवस्था चौपट हो जाती है.

प्रभात खबर डिजिटल प्रीमियम स्टोरी

लेखक के बारे में

यह प्रभात खबर का डिजिटल न्यूज डेस्क है। इसमें प्रभात खबर के डिजिटल टीम के साथियों की रूटीन खबरें प्रकाशित होती हैं।

Read More

संबंधित खबरें >

यह भी पढ़ें >