राघोपुर. प्रखंड क्षेत्र के सिमराही, करजाइन और गनपतगंज जैसे प्रमुख बाजार में हर दिन हजारों लोगों की आवाजाही होती है, लेकिन हैरानी की बात यह है कि इन भीड़भाड़ वाले बाजार में कहीं भी शुद्ध पेयजल की समुचित व्यवस्था नहीं है. सबसे ज्यादा दयनीय स्थिति सिमराही नगर पंचायत के अंतर्गत आने वाले सिमराही बाजार की है. यहां के मुख्य मार्गों पर रोजाना भारी भीड़ उमड़ती है, लेकिन राहगीरों और दुकानदारों के लिए पानी का कोई इंतजाम नहीं दिखता. खासकर सिमराही का प्रसिद्ध हाट सह गुदरी, जो हर मंगलवार और शुक्रवार को हजारों लोगों से गुलजार रहता है. वहां भी पीने के पानी की सुविधा नदारद है. स्थानीय व्यापारियों का कहना है कि उनसे नियमित रूप से राजस्व वसूला जाता है, लेकिन बदले में मूलभूत सुविधाएं नहीं मिलती. करजाइन बाजार की तस्वीर भी कुछ अलग नहीं है. यहां दुकानदारों और ग्राहकों को पानी के लिए इधर-उधर भटकना पड़ता है. गर्मी के इस मौसम में यह परेशानी और अधिक गंभीर हो जाती है. गनपतगंज बाजार में भी हालात जस के तस बने हुए हैं, जहां लोग अपनी प्यास बुझाने के लिए निजी दुकानों या अस्थायी साधनों पर निर्भर हैं. स्थानीय लोगों में इस समस्या को लेकर गहरी नाराजगी है. उनका कहना है कि हर साल गर्मी के मौसम में यही स्थिति बनती है, लेकिन प्रशासन स्थायी समाधान निकालने में विफल रहता है. लोगों की मांग है कि बाजारों में सार्वजनिक पेयजल की व्यवस्था, जैसे पानी के टैंकर, हैंडपंप या वाटर कूलर, जल्द से जल्द लगाए जाएं. स्थानीय लोगों का कहना है कि वर्तमान में तापमान करीब 40 डिग्री सेल्सियस के आसपास महसूस हो रहा. जिस कारण पिछले कई दिनों से गर्मी के कहर से आमलोगों का जीना मुहाल हो रहा है. बावजूद इसके, अभी तक अधिकारियों द्वारा पेयजल का कोई व्यवस्था नहीं किया गया है. जिसके कारण स्थानीय व्यापारियों के साथ साथ राहगीरों को भी परेशानी हो रही है. लोगों ने मांग किया है कि जल्द से जल्द पेयजल की व्यवस्था किया जाय ताकि लोगों को इस भीषण गर्मी से कुछ राहत मिल सके. इस मामले में बीडीओ सत्येंद्र कुमार यादव ने बताया कि सिमराही की व्यवस्था नगर पंचायत के अधीन है, फिर भी संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिए जा रहे हैं. साथ ही गनपतगंज और करजाइन बाजारों में वैकल्पिक पेयजल व्यवस्था जल्द करने का आश्वासन दिया गया है.
भीषण गर्मी में पेयजल की सुविधा नहीं, राहगीर परेशान
स्थानीय व्यापारियों का कहना है कि उनसे नियमित रूप से राजस्व वसूला जाता है, लेकिन बदले में मूलभूत सुविधाएं नहीं मिलती
