वीरपुर : कोशी नदी से बालू निकासी पर स्थायी रोक लगायी जायेगी. विभागीय अधिकारी व डीएम से बात कर कार्रवाई का निर्देश दिया गया है. उक्त बातें जल संसाधन विभाग के प्रधान सचिव अरुण कुमार सिन्हा ने प्रेसवार्ता में कही. गौरतलब है कि कोशी में अवैध बालू निकासी का मामला कई बार उठाया जाता रहा है.
पूर्वी कोशी तटबंध के 15.50 किलोमीटर स्पर के पास से जेसीबी लगाकर सैकड़ों की संख्या में बालू निकलते देखा जा सकता है. कहा जाता है कि यह अवैध बालू बालू माफियाओं की मदद से योजिका कंपी को पहुंचाया जाता है, जो कोशी में 280 करोड़ की लागत का कार्य कर रही है. कोशी विभाग एवं खनन विभाग एक-दूसरे की ओर बालू खनन का मामला उछालते रहे हैं.
कोशी विभाग के अभियंता कहते हैं कि यह देखना खनन विभाग का काम है. जबकि खनन इस मामले को कोशी परियोजना की ओर उछाल कर अपना पल्ला झाड़ रहा है. इस संबंध में प्रधान सचिव जल संसाधन विभाग अरुण कुमार सिन्हा का कहना है कि यह तो अपने पैर में कुल्हाड़ी मारने बाली बात हुई. हम बालू निकलने की छूट देकर अपने पैर में कुल्हाड़ी मारेंगे. बालू कटे जाने से पूर्व से तटबंध के समांतर बह रही नदी को तटबंध की और करीब आने का मौका मिल जायेगा. बालू काटना खतरनाक है.
विभाग के अधिकारियों को इस दिशा में सख्त निर्देश दिया गया है. इस मामले में कोई भी कोताही बर्दाश्त नहीं की जायेगी. वरीय अधिकारी को जिला पदाधिकारी से मिलकर इस मामले में मदद लेने का निर्देश दिया गया है. कुल मिलाकर विभाग इस बार कोशी से अवैध खनन करने वाले बालू माफिया पर लगाम कसने के लिये तैयार दिख रही है. बालू माफिया अब तक किसी न किसी जुगाड़ टेक्नोलॉजी से बालू निकासी का रास्ता निकलते रहे हैं. प्रधान सचिव के सख्ती के बाद इस पर रोक लगने की उम्मीद जग चुकी है.
