लोक अदालत में 1197 मामलों का हुआ निष्पादन, लगभग पौने चार करोड़ रुपये का हुआ समझौता

सुरक्षा के किये गये थे पुख्ता इंतजाम

– सिविल कोर्ट सुपौल व वीरपुर कोर्ट में राष्ट्रीय लोक अदालत का किया गया आयोजन – प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश, डीएम, एसपी सहित अन्य अधिकारियों ने दीप प्रज्ज्वलित कर किया उद्घाटन – सुरक्षा के किये गये थे पुख्ता इंतजाम सुपौल. व्यवहार न्यायालय परिसर, सुपौल में शनिवार को जिला विधिक सेवा प्राधिकार के सौजन्य से राष्ट्रीय लोक अदालत का आयोजन किया गया. कार्यक्रम का उद्घाटन प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश सह अध्यक्ष जिला विधिक सेवा प्राधिकार अनंत सिंह, जिलाधिकारी सह डालसा के उपाध्यक्ष सावन कुमार, पुलिस अधीक्षक शरथ आरएस, परिवार न्यायालय के प्रधान न्यायाधीश राहुल उपाध्याय, जिला एवं अपर सत्र न्यायाधीश प्रथम गजनफर हैदर, जिला एवं अपर सत्र न्यायाधीश द्वितीय दिलीप कुमार सिंह, जिला एवं अपर सत्र न्यायाधीश चतुर्थ विनय शंकर, जिला एवं अपर सत्र न्यायाधीश पंचम सुनील कुमार, जिला एवं अपर सत्र न्यायाधीश अष्टम गौतम कुमार यादव, अवर न्यायाधीश प्रथम गुरूदत्त शिरोमणी, सचिव अफजल आलम सहित अन्य न्यायिक पदाधिकारी एवं बार एसोसिएशन के जिलाध्यक्ष नागेंद्र नारायण ठाकुर, सचिव दीप नारायण भारती ने संयुक्त रूप से दीप प्रज्वलित कर किया. लोक अदालत को लेकर व्यवहार न्यायालय परिसर में हेल्प डेस्क बनाया गया. वहीं वादों के निपटारे को लेकर 12 बैंच का गठन किया गया था. सभी बैंचों पर न्यायिक पदाधिकारी मौजूद थे. न्यायालय परिसर में मेडिकल टीम की नियुक्ति भी की गयी थी. वहीं लोक अदालत को लेकर कोर्ट परिसर में सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किये गये थे. मौके न्यायिक दंडाधिकारी प्रथम श्रेणी भवेश कुमार, चेतन आंनद, प्रोवेशनल मुंसिफ प्रकाश आनंद आदि मौजूद थे. स्वागत भाषण अफजल आलम ने किया. जबकि धन्यवाद ज्ञापन अफजल आलम ने किया. जबकि संचालन जिला नाजीर सर्वेश कुमार झा ने किया. राष्ट्रीय लोक अदालत में सुपौल व्यवहार न्यायालय में 09 बेंच तथा वीरपुर न्यायालय में 03 बेंच था. लोक अदालत में सुपौल व वीरपुर में कुल 1197 वादों का निष्पादन किया गया. जिसमें 04 करोड़ 76 लाख 01 हजार 108 रुपये का समझौता हुआ. प्री लिटीगेशन में कुल 823 वादों का निपटारा किया गया. जिसमें 03 करोड़ 47 लाख 78 हजार 363 रुपये का समझौता किया गया. वहीं पोस्ट लिटीगेश में 374 वादों का निपटारा किया गया. जिसमें 01 करोड़ 28 लाख 22 हजार 745 रुपये का समझौता हुआ. प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश अनंत सिंह मुख्यालय में उपस्थित नहीं रहने के कारण मोबाइल पर लोक अदालत की सफलता एवं अधिक से अधिक वादों के निष्पादन की अपील की. अंतिम उम्मीद के साथ न्यायालय में आते हैं लोग : जिला जज कार्यक्रम को संबोधित करते हुए प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश अनंत सिंह ने कहा कि न्यायालय में आने वाला प्रत्येक व्यक्ति अंतिम उम्मीद के साथ आता है, इसलिए न्यायाधीशों का कर्तव्य है कि वे निष्पक्ष होकर सेवा करें. उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय लोक अदालत में लोगों की समस्याओं का त्वरित समाधान संभव है, जिससे समाज को बड़ी राहत मिलती है. उन्होंने बैंकों से अपील की कि वे गरीब और जरूरतमंद लोगों के मामलों में उच्च स्तर पर जाकर समझौता करें ताकि उनका कल्याण हो सके. लोगों की उम्मीद पूरा करना हमसबों की जिम्मेवारी : डीएम जिलाधिकारी सावन कुमार ने मैथिली, हिंदी और अंग्रेजी में संबोधित करते हुए राष्ट्रीय लोक अदालत एवं जिला विधिक सेवा प्राधिकार की महत्ता पर प्रकाश डाला. उन्होंने सभी विभागों और कर्मियों को अधिक से अधिक मामलों में समझौता सुनिश्चित करने का निर्देश दिया, जिससे आम लोगों की न्याय संबंधी परेशानियां कम हो सकें. कहा कि लोग उम्मीद लेकर आते हैं और लोगों की उम्मीद पूरा करना हम सबों की जिम्मेवारी है. उन्होंने लोगों से अपील करते कहा कि आपलोग अपने-अपने मुकदमे को समाप्त कर लें. यह सुनहारा अवसर है कि एक दिन में मुकदमा खत्म हो जायेगा और फिर इसका कभी कहीं अपील भी नहीं होगा. वहीं लोक अदालत में मौजूद बैंक कर्मियों से कहा कि पक्षकारों से समन्वय स्थापित कर बैंक से संबंधित मामले का अधिक से अधिक निष्पादन हो, इसको लेकर प्रयास करें. जिससे कोई भी व्यक्ति यहां से ना उम्मीद के साथ नहीं लौटे. सेल्फी प्वाइंट, न्यायिक अधिकारियों ने ली यादगार तस्वीरें राष्ट्रीय लोक अदालत के अवसर पर सुपौल व्यवहार न्यायालय परिसर का नजारा अलग ही रहा. आयोजन स्थल पर बनाए गए विशेष सेल्फी प्वाइंट ने सभी का ध्यान खींचा. न्यायिक अधिकारियों, प्रशासनिक पदाधिकारियों और अन्य गणमान्य व्यक्तियों ने यहां तस्वीरें खिंचवाकर कार्यक्रम की यादें संजोईं. इस मौके पर उपस्थित अधिकारियों ने आमलोगों को राष्ट्रीय लोक अदालत के महत्व से अवगत कराते हुए कहा कि लोक अदालत न्याय दिलाने का सबसे आसान, त्वरित और किफायती माध्यम है. उन्होंने लोगों से अपील की कि वे अधिक से अधिक संख्या में इसका लाभ उठाएं और छोटे-मोटे विवादों को समझौते के माध्यम से निपटाकर राहत पाएं.

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