परेशानी. जलजमाव की समस्या से नहीं मिल पायी मुक्ति
सुपौल : बजबजाती नालियां, सड़कों पर बहती पानी से लोगों का चलना दुष्कर हो गया है. कूड़े ने छोटे-बड़े, गोल-गोल गुंबद का आकार ले लिया है. कूड़े के एकत्रित होने से सड़कों पर फिसलन की समस्या बन गयी है. दो पहिया वाहनों और साइकिल सवारों की तो शामत ही आ गयी है. जो भी हो स्थिति देखने के बाद साफ होता है कि गंदगी को लेकर नगर परिषद संवेदनशील नहीं हो सकी है. कचरे की ढेर देख कर नगर परिषद की कार्यशैली का सहज अंदाजा लगाया जा सकता है.
कार्यपालक पदाधिकारी सुशील मिश्रा की माने तो जल्द ही समस्याओं का समाधान कर लिया जायेगा. वार्ड नंबर 07, 11, 12, 13, 26 आदि के लोगों को अब तक जलजमाव की समस्या से मुक्ति नहीं मिल पायी है. साल-दर-साल नासूर बन चुकी जलजमाव की समस्या पर किसी का भी ध्यान नहीं जा रहा है. वार्ड संख्या 13 के हरदेव मुखिया ने बताया कि सड़कों की न तो कायदे से सफाई होती है और न ही जलजमाव की समस्या का समाधान हो पा रहा है. जलजमाव से उठती सड़ांध जहां महामारी की आशंका को पुख्ता करती है
वहीं साफ-सफाई के मामले में बरती गयी उदासीनता का सबूत भी पेश करती है. लोगों ने बताया कि प्रशासनिक लापरवाही व नगर परिषद की उदासीनता के कारण जलजमाव की समस्या इस वार्ड की पहचान बन चुकी है. हल्की बारिश में ही घरों में पानी घुस जाता है. वार्ड नंबर सात 7 की स्नेहा ने कहा कि नप जनता से कर लेती है.
नप की लापरवाही से नाले की नहीं होती है सफाई
वार्डवासियों का आरोप है कि प्रशासनिक लापरवाही व नप की उदासीनता के कारण नाले की सफाई नहीं की जाती है. जलजमाव की समस्या इस वार्ड की पहचान बन चुकी है. वार्ड नंबर 26 के धर्मेंद्र कुमार ने बताया कि बारिश के बाद घर में पानी घुस जाता है. बहरहाल, जलजमाव का निदान नहीं होने से नगर वासी काफी परेशान हैं. शहर की गंदगी शहर में ही घूमती रहती है. नालियां लबालब रहती है. यहां बता दें कि कचरा प्रबंधन संचालन नियम 1959 के तहत कचरा को जमा करने व निष्पादन के लिए जगह की पहचान व प्रबंधन का दायित्व राज्य सरकार, प्रदूषण नियंत्रण पर्षद व नगर निकायों की है. लेकिन यहां किसी ने भी जिम्मेवारी नहीं समझी है.
