सुपौल : भगवान के बाद अगर धरती पर कोई विधाता है तो वे किसान हैं. यदि सरहद की रखवाली देश के जवान करते हैं तो भूख मिटाने का महान कार्य किसान करते हैं. जय जवान- जय किसान के मूलमंत्र से यह देश दुनियां में अपनी छाप छोड़ रहा है. भारतीय किसान धूप व बरसात की परवाह किये बगैर दिनरात कठिन परिश्रम करते हैं. फिर भी उन्हें दो वक्त का खाना नसीब नहीं होता है. किसान देश के रीढ़ के हड्डियों के समान है. मोदी सरकार का मूलमंत्र सबका साथ उद्योगपति का विकास के तर्ज पर कार्य कर रही है.
उक्त बाते बिहार प्रदेश किसान महापंचायत के संयोजक सह लोहिया यूथ बिग्रेड के प्रदेश संयोजक डॉ अमन कुमार ने प्रेस वार्ता में कही. डॉ कुमार ने कहा कि माननीय प्रधानमंत्री लाखों किसानों को दिये 40 हजार करोड़ कर्ज की चिंता करते हैं. वहीं आनन फानन में अकेले अडानी को अरबों डॉलर का कर्ज दे देते हैं. मोदी सरकार ने 2015 में 78 हजार करोड़ का कॉरपोरेट टैक्स उद्योगपति को फायदा पहुंचाने के लिए माफ किया है. सरकार के पास विजय माल्या को नौ हजार करोड़ देने के लिए रुपये उपलब्ध है.
लेकिन किसान के मामले में सांप छू जाता है. आज किसान आंदोलन को जनव्यापी व राष्ट्रव्यापी बनाने की आवश्यकता है. अतिशीघ्र सरकार किसानों के द्वारा ली गयी बैंक ऋण को शत प्रतिशत माफ करें और किसानों के हित में ठोस कृषि नीति बनाने का कार्य करें.
डॉ कुमार ने कहा कि किसान सोया हुआ शेर है. जिस दिन जगा उस दिन स्वयं अपना स्वर्णिम इतिहास लिखकर देश को एक नयी दिशा देने का काम करेंगे. कहा कि भारत का कल्याण किसानों पर ही निर्भर है. कृषि को किसानों के लिए घाटे का सौदा बनाया जा रहा है. ताकि किसान खेती बाड़ी छोड़ दे और कृषि उद्योग जगत के लिए बेतहाशा फायदा का सौदा हो जाय. देश में बीज, कीटनाशक और कृषि के यंत्रों के कीमत में पिछले तीन सालों से तेजी से बढ़ोतरी की जा रही है. भारतीय किसान कर्ज में जन्म लेता है, कर्ज में जीता है और कर्ज में ही मर जाते हैं. किसानों को खेत खलिहान व रोटी की एक साथ लड़ाई लड़नी होगी. सरकार के द्वारा किसानों के खेत में लागत मूल्य के दस गुणा समर्थन मूल्य सुनिश्चित किया जाना चाहिए. वर्तमान समय में किसान आंदोलन सबसे बड़ा समाजवादी आंदोलन होगा. सरकारी अधिकृत क्रय केंद्र पर प्रत्येक कार्य दिवस में निर्धारित समर्थन मूल्य पर नकद राशि के माध्यम से फसल खरीदने की व्यवस्था सुनिश्चित किया जाय. कृषि को उद्योग का दर्जा व जमीन की चकबंदी करायी जाय. बटाईदारी व पट्टेदारी करने वाले किसानों को ऋण मुहैया कराया जाय.
