Supaul News: सुपौल में आयोजित ‘सखी वार्ता’ कार्यक्रम महिलाओं और किशोरियों के लिए केवल एक जागरूकता अभियान नहीं रहा, बल्कि अपने अधिकारों, सुरक्षा और सरकारी योजनाओं को समझने का एक महत्वपूर्ण मंच बन गया. बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ योजना के तहत आयोजित इस कार्यक्रम में महिलाओं ने बाल विवाह, दहेज प्रथा, घरेलू हिंसा, लैंगिक भेदभाव और साइबर अपराध जैसे मुद्दों पर खुलकर चर्चा की और विशेषज्ञों से सीधे सवाल पूछे.
बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ योजना के तहत हुआ आयोजन
महिला एवं बाल विकास निगम, बिहार के अंतर्गत जिला हब फॉर एम्पावरमेंट ऑफ वूमेन (DHEW), सुपौल के तत्वावधान में सदर प्रखंड स्थित भारतीय स्टेट बैंक ग्रामीण स्वरोजगार प्रशिक्षण केंद्र (RSETI), मरीचा में ‘सखी वार्ता’ कार्यक्रम आयोजित किया गया.
इसमें सिलाई प्रशिक्षण प्राप्त कर रही महिलाओं और किशोरियों ने बड़ी संख्या में भाग लिया. कार्यक्रम का उद्देश्य उन्हें सामाजिक कुरीतियों और सरकारी सहायता योजनाओं के प्रति जागरूक बनाना था.
किन मुद्दों पर हुई चर्चा?
कार्यक्रम के दौरान प्रतिभागियों को बाल विवाह, लैंगिक भेदभाव, लैंगिक हिंसा, दहेज प्रथा, घरेलू हिंसा और साइबर अपराध जैसे विषयों पर विस्तार से जानकारी दी गई.
विशेषज्ञों ने बताया कि महिलाओं की शिक्षा, आर्थिक आत्मनिर्भरता और कानूनी जागरूकता सामाजिक बदलाव की सबसे बड़ी ताकत है.
मिशन शक्ति और महिला सशक्तिकरण योजनाओं की जानकारी
जिला मिशन समन्वयक हरिनारायण कुमार ने DHEW की भूमिका, मिशन शक्ति के उद्देश्य और बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ योजना के महत्व पर विस्तार से प्रकाश डाला.
उन्होंने महिलाओं को प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना, मुख्यमंत्री कन्या उत्थान योजना, जननी सुरक्षा योजना, साइबर सुरक्षा और डिजिटल जागरूकता से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारी भी दी.
उन्होंने कहा कि महिलाओं और बालिकाओं की सक्रिय भागीदारी से बाल विवाह, दहेज प्रथा, कन्या भ्रूण हत्या और लैंगिक भेदभाव जैसी सामाजिक कुरीतियों पर प्रभावी रोक लगाई जा सकती है.
बाल विवाह रोकने की अपील
लैंगिक विशेषज्ञ नीतू कुमारी ने बाल विवाह प्रतिषेध अधिनियम, 2006 के प्रमुख प्रावधानों, विवाह की वैधानिक आयु और बाल विवाह के दुष्परिणामों की जानकारी दी.
उन्होंने बताया कि कम उम्र में विवाह होने से बालिकाओं के स्वास्थ्य, शिक्षा और भविष्य पर गंभीर प्रभाव पड़ता है. उन्होंने लोगों से अपील की कि यदि कहीं बाल विवाह की जानकारी मिले तो समय रहते प्रशासन को सूचित करें.
वन स्टॉप सेंटर की सेवाओं की जानकारी
सखी वन स्टॉप सेंटर की केंद्र प्रशासक प्रतिभा ने घरेलू हिंसा और लैंगिक हिंसा से पीड़ित महिलाओं के लिए उपलब्ध सेवाओं की जानकारी दी.
उन्होंने बताया कि सुपौल सदर अस्पताल परिसर स्थित वन स्टॉप सेंटर में पीड़ित महिलाओं को एक ही स्थान पर परामर्श, अस्थायी आश्रय, चिकित्सा सहायता, पुलिस सहयोग और न्यायिक सहायता जैसी सुविधाएं उपलब्ध कराई जाती हैं.
उन्होंने महिला हेल्पलाइन 181 और चाइल्ड हेल्पलाइन 1098 की उपयोगिता और आपात स्थिति में इन सेवाओं का लाभ कैसे लिया जाए, यह भी समझाया.
महिलाओं ने पूछे सवाल, विशेषज्ञों ने दिए जवाब
कार्यक्रम के दौरान महिलाओं और किशोरियों ने अपने अधिकार, पोषण, कौशल विकास, शिक्षा, स्वास्थ्य, महिला सुरक्षा और साइबर अपराध से जुड़े कई सवाल पूछे.
विशेषज्ञों ने प्रत्येक प्रश्न का विस्तार से उत्तर दिया और प्रतिभागियों को अपने गांव और पंचायत स्तर पर भी जागरूकता फैलाने के लिए प्रेरित किया.
Supaul News: सामूहिक संकल्प के साथ कार्यक्रम का समापन
कार्यक्रम के अंत में हरिनारायण कुमार, केंद्र प्रशासक प्रतिभा, लैंगिक विशेषज्ञ नीतू कुमारी, मोहम्मद तारीक सिद्धकी, अनिश रंजन (RSETI) सहित सभी प्रतिभागियों ने महिलाओं और बालिकाओं के अधिकारों की रक्षा, सामाजिक कुरीतियों के उन्मूलन और महिला सशक्तिकरण के लिए सामूहिक रूप से कार्य करने का संकल्प लिया.
