Sudhir Kumar Success Story: करियर में बड़ा मुकाम हासिल करने के लिए दिन-रात मेहनत करनी पड़ती है। कई युवाओं को इसके लिए अपनी भूख-प्यास और आराम तक भूलना पड़ता है, तो कुछ को घर-परिवार से दूर रहकर संघर्ष करना पड़ता है. लेकिन बिहार के सुधीर कुमार की कामयाबी की कहानी इन सबसे अलग है. उनकी सफलता का सफर फिल्मों के शौक और पैसों की जरूरत से शुरू हुआ. इनाम की राशि जीतने की चाहत ने उनकी जिंदगी को ऐसा मोड़ दिया कि एक साल में 500 से ज्यादा फिल्में देखने वाले सुधीर आगे चलकर अफसर बन गये. उन्होंने BPSC की 66वीं परीक्षा में रैंक-1 हासिल की और बाद में UPSC सिविल सेवा परीक्षा भी पास की.
वैशाली के रहने वाले हैं सुधीर
बिहार के वैशाली जिले के रहने वाले सुधीर कुमार एक सामान्य परिवार से आते हैं. उनके माता-पिता दोनों सरकारी सेवा में कार्यरत हैं. उनकी मां ऑक्सिलरी नर्स मिडवाइफरी (ANM) हैं, जबकि पिता डाक विभाग में काम करते हैं. सुधीर का सपना इंजीनियर बनने का था. इसी लक्ष्य के साथ वह इंजीनियरिंग प्रवेश परीक्षा की तैयारी करने कोटा पहुंचे.कोटा में शुरुआती दिनों में उन्होंने दोस्तों के साथ मिलकर खूब पढ़ाई की. हालांकि, कड़ी प्रतिस्पर्धा के बीच धीरे-धीरे उनका आत्मविश्वास कमजोर पड़ने लगा. जोश टॉक्स को दिये एक इंटरव्यू में सुधीर ने बताया कि प्रतियोगिता के दबाव के कारण उनका कॉन्फिडेंस डोल गया था. इसके बाद वह मानसिक तनाव से जूझने लगे.
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पढ़ाई छोड़ी, एक साल में देखीं 500 से ज्यादा फिल्में
तनाव का असर उनकी पढ़ाई पर भी पड़ा. एक समय ऐसा आया जब उन्होंने पढ़ाई से दूरी बना ली और मोबाइल पर फिल्में देखने लगे. देखते ही देखते उनका फिल्मों का शौक इतना बढ़ गया कि उन्होंने एक साल में 500 से ज्यादा फिल्में देख डालीं. इसका सीधा असर कोचिंग में होने वाले टेस्ट पर पड़ा. जहां पहले सुधीर की रैंक 15 से 20 के बीच रहती थी, वहीं बाद में यह गिरकर 80 से 90 के बीच पहुंच गयी.
इसके बाद कोचिंग संस्थान की ओर से उनकी काउंसलिंग की गयी. इस काउंसलिंग के बाद सुधीर ने खुद को संभाला और दोबारा पढ़ाई पर ध्यान केंद्रित किया। उन्होंने IIT-JEE की परीक्षा पास की और IIT कानपुर में दाखिला लिया. यहां से उन्होंने सिविल इंजीनियरिंग में डिग्री हासिल की.
IIT से पढ़ाई के बाद गांव में बच्चों को पढ़ाने लगे
IIT कानपुर से पढ़ाई पूरी करने के बाद सुधीर ने सीधे कॉर्पोरेट नौकरी का रास्ता नहीं चुना. वह अपने गांव लौट आये और वहां बच्चों को पढ़ाने लगे. नौकरी नहीं करने के फैसले को लेकर उन्हें गांव के लोगों के ताने भी सुनने पड़े. इसी दौरान वह आगे की जिंदगी को लेकर कुछ योजना बना ही रहे थे कि कोरोना महामारी आ गयी. कोविड के कारण उनकी कोचिंग भी बंद हो गयी. इससे उनके सामने आर्थिक परेशानियां खड़ी हो गयीं. हालांकि, उनके माता-पिता दोनों सरकारी नौकरी में थे, लेकिन सुधीर खुद आर्थिक रूप से संघर्ष कर रहे थे.
50 हजार रुपये की प्राइज मनी ने बदली जिंदगी की दिशा
इसी दौरान दोस्तों ने सुधीर को बताया कि BPSC की परीक्षा पास करने वाले अभ्यर्थियों को सरकार की ओर से 50 हजार रुपये की प्रोत्साहन राशि दी जाती है. आर्थिक जरूरत को देखते हुए सुधीर ने BPSC की तैयारी शुरू कर दी। उन्होंने परीक्षा दी और प्रीलिम्स में सफलता हासिल कर ली. इसके बाद जब उन्होंने 50 हजार रुपये की प्रोत्साहन राशि के लिए आवेदन किया, तो उन्हें पता चला कि यह राशि सामान्य वर्ग के अभ्यर्थियों को नहीं दी जाती है. इससे उन्हें निराशा हुई। हालांकि, BPSC की प्रारंभिक परीक्षा पास करना उनकी जिंदगी का सबसे बड़ा टर्निंग प्वाइंट साबित हुआ. प्रीलिम्स क्वालीफाई करने के बाद सुधीर ने इस परीक्षा को गंभीरता से लिया. उन्होंने सिलेबस को गहराई से समझा और अपनी तैयारी को उसी के अनुसार आगे बढ़ाया. दिन-रात मेहनत के बाद उन्होंने मेन्स और इंटरव्यू भी पास कर लिया.
BPSC 66वीं में रैंक-1, बने अफसर
सुधीर ने अपने पहले ही प्रयास में BPSC की 66वीं परीक्षा में सफलता हासिल की. वर्ष 2022 में जारी परिणाम में उन्होंने रैंक-1 हासिल कर टॉप किया. वह DSP बनना चाहते थे, लेकिन शारीरिक मानकों के कारण उन्हें बिहार में स्टेट टैक्स असिस्टेंट कमिश्नर का पद मिला. इसके बाद भी उन्होंने पढ़ाई नहीं छोड़ी. उन्होंने UPSC सिविल सेवा परीक्षा की तैयारी शुरू कर दी. वर्ष 2023 में उन्होंने UPSC सिविल सेवा परीक्षा भी पास कर ली और रेलवे सेवा (IRMS) में अधिकारी बने.
सुधीर की कहानी सिर्फ एक परीक्षा में टॉप करने या अधिकारी बनने की कहानी नहीं है. यह बताती है कि मुश्किल दौर में रास्ता भटकने के बाद भी अगर कोई व्यक्ति खुद को संभालकर दोबारा लक्ष्य पर ध्यान केंद्रित करे, तो सफलता हासिल की जा सकती है.
सुधीर ने बताये BPSC क्रैक करने के टिप्स
BPSC टॉपर सुधीर कुमार का कहना है कि सफलता किसी शॉर्टकट से हासिल नहीं होती. इसके लिए लगातार मेहनत और सही दिशा में तैयारी जरूरी है. उनके मुताबिक BPSC परीक्षा की तैयारी के लिए सिर्फ सामान्य ज्ञान की किताबों पर निर्भर रहना पर्याप्त नहीं है. लिखित परीक्षा के लिए विषयों की गहरी समझ जरूरी है. सुधीर सोशल मीडिया के इस्तेमाल को लेकर भी अभ्यर्थियों को सावधान करते हैं. उनका कहना है कि सोशल मीडिया का इस्तेमाल जानकारी हासिल करने के लिए किया जाना चाहिए, टाइम पास के लिए नहीं. उन्होंने सरकारी प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करने वाले छात्रों को NCERT की किताबें पढ़ने की सलाह दी है. उनके मुताबिक, बुनियादी अवधारणाओं को मजबूत करने में NCERT की किताबें काफी मददगार साबित हो सकती हैं.
