UGC: विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) की ओर से अनुसूचित जाति (SC), अनुसूचित जनजाति (ST) और अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) के छात्र-छात्राओं को उच्च शिक्षण संस्थानों में न्याय और समानता दिलाने के लिए बनाए गए ‘उच्च शिक्षा में समता संवर्धन रेगुलेशन एक्ट 2026’ पर सुप्रीम कोर्ट की ओर से मात्र 15 दिनों के भीतर रोक लगाए जाने के विरोध में छात्र समाज में भारी आक्रोश है. इस दमनकारी फैसले और बहुजन छात्रों के साथ हो रहे ऐतिहासिक अन्याय के खिलाफ 2 फरवरी को अमर शहीद बाबू जगदेव प्रसाद की जयंती के अवसर पर पटना यूनिवर्सिटी एवं पटना सहित पूरे बिहार में SC/ST/OBC समाज के छात्र उग्र आंदोलन और प्रदर्शन करने वाले हैं. अम्बेडकर छात्रावास, पटेल छात्रावास, कपूरी छात्रावास, PG रानीघाट छात्रावास आंदोलन में शामिल रहेंगे
संस्थागत भेदभाव का अंत
उच्च शिक्षा के क्षेत्र में जातीय भेदभाव, जानबूझकर कम नंबर देना और रैगिंग के हजारों मामले सामने आते हैं, जिससे तंग आकर दलित, आदिवासी और पिछड़े वर्ग के होनहार छात्र आत्महत्या जैसे कदम उठाने पर मजबूर होते हैं. UGC एक्ट 2026 इन कुरीतियों को रोकने का एक सशक्त माध्यम था.
न्यायपालिका के दोहरे मापदंड पर सवाल
प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि किसान आंदोलन और EWS जैसे कानूनों पर सुप्रीम कोर्ट का रुख अलग रहता है, लेकिन जैसे ही 85% आबादी (SC/ST/OBC) के हक की बात आती है, न्यायपालिका तुरंत रोक लगा देती है.
आबादी के अनुसार हिस्सेदारी
हमारी मांग है कि निजी क्षेत्र, न्यायपालिका, जल-जंगल-जमीन, उद्योग और खनिज संपदा जैसे सत्ता के तमाम स्रोतों में SC/ST/OBC को उनकी 85% आबादी के अनुपात में आरक्षण और हिस्सेदारी मिलनी चाहिए.
अस्तित्व की लड़ाई
यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि बहुजन समाज को केवल चुनाव के समय हिंदू माना जाता है, लेकिन अधिकारों के समय उन्हें हाशिए पर धकेल दिया जाता है. UGC एक्ट 2026 का विरोध करने वाली ताकतें सामाजिक न्याय एवं हिंदू विरोधी हैं. हमारी स्पष्ट मांग है कि UGC एक्ट 2026 पर लगी रोक को तत्काल हटाया जाए और इसे पूर्णतः लागू किया जाए. निवेदक मंडल 2.0 में छात्र युवा संघर्ष समिति पटना बिहार के अमर आजाद पासवान, मनीष यादव, गौतम आनंद, अंबुज पटेल, गौतम कुमार, काशिफ यूनुस, सुधीर रजक, शाश्वत कुमार, ओमकार कुमार और अजय यादव
